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हेमा मालिनी को डांस सिखाने वालीं डांसर जी रही हैं मुफलिसी की जिंदगी, वादे के बावजूद सरकार से नहीं मिली कोई मदद

तारा बालगोपाल दिल्ली यूनिवर्सिटी की राजधानी कॉलेज में रीडर के पद पर भी कार्यरत रही हैं।

यह तस्वीर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्विटर पर पोस्ट की थी।

एक समय में वे भारत का गर्व हुआ करती थीं, आज वे गरीबी में जिंदगी जीने को मजबूर हैं। एक ऑनलाइन पिटिशन के जरिए पता चलता है कि 80 वर्षीय मशहूर डांसर तारा बालगोपाल दिल्ली की राजौरी में अकेले गरीबी की जिंदगी जी रही हैं। Fसके बाद सरकार ने उनकी मदद करने का फैसला किया था। बालगोपाल कथक, कथाकली, भरतनाट्यम जैसे डांस के लिए मशहूर हैं। उन्होंने हेमा मालिनी को भी डांस सिखाया है। पति की मौत के बाद वे ऐसी जिदंगी जीने को लिए मजबूर हो गईं। क्योंकि उनके पास जितनी भी सेविंग थी, वह कोर्ट में केस लड़ते हुए खत्म हो गई। जब मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए यह जानकारी सरकार तक पहुंची तो सरकार ने जुलाई महीने में उनकी मदद करने का फैसला किया। लेकिन अभी तक उन्हें किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली है।

इसके बाद अगस्त महीने के आखिरी महीने में इस मामले को फिर से उठाया गया। तब 28 अगस्त को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने एक ट्वीट करके बताया था कि सरकार उनकी मदद करने की तैयारी कर रही है। साथ ही लिखा था, ‘भाजपा नेता और साउथ दिल्ली के पूर्व मेयर सुभाष आर्य बालगोपाल के पड़ोसी थे और लगातार उनके संपर्क में थे।’ साथ ही उन्होंने कहा था कि वे इसको व्यक्तिगत तौर पर मॉनिटर करेंगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक बालगोपाल नेहरू-गांधी परिवार के काफी नजदीकी रही हैं। उनके विजय लक्ष्मी पंडित, जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी से काफी अच्छे संपर्क रहे हैं। सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया था।

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बालगोपाल दिल्ली यूनिवर्सिटी की राजधानी कॉलेज में रीडर के पद पर भी कार्यरत रही हैं। वे पहली टीचर हैं, जिन्होंने ऑल इंडिया रेडियो पर यूजी प्रोग्राम का प्रसारण साल 1963 में किया था। उसके बाद साल 1968 में रिटायरमेंट के बाद यूनिवर्सिटी ने उनका बकाया नहीं चुकाया। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी ने उन्हें लेक्चरर की सैलरी दी थीं, जबकि वे रीडर के पद पर कार्यरत थीं। जिसके लिए कोर्ट में वे केस लड़ रही थीं। उनके पति एक चार्टड अकाउंटेंट थे, जिनकी मौत कुछ साल पहले हो गई थी। उसके बाद उन्हें सरकार की ओर से वकील दिया गया था। लेकिन वे कोर्ट में अपना केस हार गईं।

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