1970 के दशक के अंत में जब सुनील दत्त, शत्रुघ्न सिन्हा और जितेंद्र जैसे दिग्गज कलाकार पर्दे पर राज कर रहे थे, तब निर्देशक राजकुमार कोहली ने इन सभी के साथ मिलकर एक ऐसी फिल्म बनाई जिसने भारतीय हॉरर सिनेमा को ‘ग्रैंड स्केल’ पर लाकर खड़ा कर दिया।

उस फिल्म का नाम था ‘जानी दुश्मन’, जो सिर्फ एक डरावनी फिल्म नहीं थी, बल्कि यह लोक-कथाओं, अंधविश्वास और भव्यता का एक ऐसा मिश्रण था जिसने बॉक्स ऑफिस के सारे समीकरण बदल दिए। चलिए अब सिनेमा डिकोड में हम इस मूवी के बारे में जानते हैं।

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कहानी का आधार: लोक-कथा और अभिशाप

‘जानी दुश्मन’ की कहानी एक ऐसे राक्षस के इर्द-गिर्द घूमती है, जो लाल जोड़ा पहने दुल्हनों का अपहरण कर उन्हें मार देता। दरअसल, फिल्म में दिखाया गया था कि ज्वाला प्रसाद की शादी होती है और शादी वाले दिन ही उसकी पत्नी लाल रंग का शादी का जोड़ा पहने दूध में जहर मिलाकर ज्वाला को मार देती है। इसके बाद वह राक्षस बनकर आता है और बदला लेता है।

ऐसे में फिल्म का मूल आधार लाल जोड़ा के इर्द-गिर्द बुना गया। भारतीय संस्कृति में लाल रंग सुहाग का प्रतीक है, लेकिन इस फिल्म में इसे ‘मौत के निमंत्रण’ की तरह पेश किया गया। यह विरोधाभास ही दर्शकों के मन में डर पैदा करने का सबसे बड़ा हथियार था।

मल्टी-स्टारर कास्ट का दांव

उस दौर में हॉरर फिल्मों को ‘बी-ग्रेड’ माना जाता था, लेकिन राजकुमार कोहली ने इसमें टॉप लेवल के सितारों को लिया। ऐसे में इतनी बड़ी स्टार कास्ट का फायदा यह हुआ कि फिल्म को गंभीरता से लिया गया। हर बड़े अभिनेता को संदेह के घेरे में रखना फिल्म की सबसे बड़ी खूबी थी। दर्शक अंत तक यह नहीं समझ पाते कि इनमें से असली राक्षस कौन है।

राक्षस का डिजाइन और ट्रांसफॉर्मेशन

1979 के हिसाब से इस फिल्म के स्पेशल इफेक्ट्स काफी साहसी थे। राक्षस का वह डरावना चेहरा, घने बाल और चमकती आंखें उस दौर के बच्चों और बड़ों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। फिल्म में इंसान से जानवर/राक्षस बनने की प्रक्रिया को जिस तरह दिखाया गया, उसने आने वाली फिल्मों जैसे ‘वीराना’ और ‘पुरानी हवेली’ के लिए एक बैंचमार्क तय किया।

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तकनीकी क्राफ्ट: संगीत और सस्पेंस

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत इस फिल्म की रीढ़ है। ‘चलो रे डोली उठाओ कहार’ जैसा गाना जो विदाई का गीत है, फिल्म में बजते ही खतरे की घंटी बन जाता है। संगीत के जरिए तनाव पैदा करना इस फिल्म की बेहतरीन तकनीकी उपलब्धि है। इसके अलावा घने जंगल, पुरानी गुफाएं और कोहरे का इस्तेमाल करके एक ऐसी दुनिया बनाई गई जो डरावनी लगती थी।

सामाजिक और मनोवैज्ञानिक एंगल

फिल्म के अंदर ‘अंधविश्वास’ और ‘तर्क’ की जंग दिखाई गई है। एक तरफ गांव वाले हैं जो इसे ‘दैवीय प्रकोप’ मानते हैं, तो दूसरी तरफ शहर से आए पात्र जो इसे सुलझाने की कोशिश करते हैं। यह उस दौर के बदलते भारत की तस्वीर पेश करता है जहां विज्ञान और पुरानी मान्यताओं के बीच द्वंद्व चल रहा था।

बदला लेने की थीम

फिल्म में राक्षस की कहानी के पीछे एक दुखद अतीत छिपा है। हॉरर सिनेमा में अक्सर विलेन सिर्फ बुरा होता है, लेकिन ‘जानी दुश्मन’ में उसके साथ धोखे होते हुए दिखाया गया। यह ‘सिम्पैथी फॉर द विलेन’ वाला एंगल फिल्म को सिर्फ एक मोंस्टर मूवी से ऊपर उठाकर एक इमोशनल ड्रामा बना देता है।

कमर्शियल हिट हुई थी ‘जानी दुश्मन’

बता दें कि उस समय रिपोर्ट के अनुसार, ‘जानी दुश्मन’ फिल्म को लगभग 1.3 करोड़ रुपये में बनाया गया था। वहीं, इसने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 9 करोड़ रुपये की कमाई की थी। ऐसे में यह उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक बनकर उभरी और इसने कमर्शियल सफलता हासिल की।

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