हिंदी सिनेमा में हॉरर फिल्मों का सिलसिला काफी पुराना रहा है। 60 से 80 के दशक में कई ऐसी डरावनी फिल्में आईं, जिन्होंने लोगों को खूब डराया। उस समय मूवीज में ज्यादा तकनीक और वीएफएक्स का इस्तेमाल नहीं होता था, लेकिन इसके बावजूद भी उस समय की भूतिया फिल्मों की कहानियां इतनी असरदार होती थीं कि उन्हें देखने के बाद लोगों के रातों की नींद उड़ जाती थी।
आजकल की हॉरर फिल्मों में भले ही नई तकनीक का इस्तेमाल होता है, लेकिन उस दौर की फिल्मों का डर और सस्पेंस अलग ही लेवल का था। चलिए आज हम आपको 70s में आई एक ऐसी मूवी के बारे में बताते हैं, जिसे बॉलीवुड की पहली जॉम्बी जॉनर की मूवी भी कहा जाता है और इस मूवी का नाम है ‘दो गज जमीन के नीचे’।
रामसे ब्रदर्स की डेब्यू फिल्म
30 दिसंबर, 1972 को रिलीज हुई फिल्म ‘दो गज जमीन के नीचे’ रामसे ब्रदर्स की डेब्यू फिल्म थी। इस फिल्म के बाद रामसे ब्रदर्स ने ‘पुराना मंदिर’, ‘वीराना’, ‘बंद दरवाजा’ और ‘तहखाना’ समेत कई सुपरहिट हॉरर फिल्में बनाईं। फिल्म को प्रोड्यूस एफयू रामसे ने किया था और इसका डायरेक्शन तुलसी रामसे और श्याम रामसे ने किया था। बताया जाता है कि यह एक लो बजट की फिल्म थी, जिसे सिर्फ साढ़े तीन लाख रुपये में बनाया गया था। वहीं, फिल्म रिलीज होने के बाद सुपरहिट हुई और इसने करीब 50 लाख की कमाई की थी।
बॉलीवुड की पहली जॉम्बी मूवी
सिर्फ इतना ही नहीं ‘दो गज जमीन के नीचे’ फिल्म को बॉलीवुड की पहली जॉम्बी मूवी माना जाता है। उस समय हॉरर फिल्मों की शूटिंग के लिए बड़े-बड़े सेट नहीं हुआ करते थे, बल्कि उन्हें एक हवेली, जंगल और कब्रिस्तान जैसी जगहों पर ही शूट कर लिया जाता था। यहां तक कि हॉलीवुड की तर्ज पर लाशों का डरावना चेहरा तैयार करने के लिए जिस तरह के मेकअप का इस्तेमाल किया गया, वह भारतीय दर्शकों के लिए एकदम नया और रोंगटे खड़े कर देने वाला था।
डिकोडिंग: रामसे स्टाइल के मुख्य एलिमेंट
इस फिल्म ने हॉरर फिल्मों का एक खास ‘फॉर्मूला’ सेट किया, जिसे आज भी याद किया जाता है। फिल्म का महौल: पुरानी हवेली, घने कोहरे वाले जंगल, चमगादड़ों की आवाजें और चरमराते दरवाजे। इसके बैकग्राउंड स्कोर को इतना डरावना रखा गया कि दृश्य न होने पर भी दर्शक डर जाएं। फिल्म में डर के साथ-साथ इमोशन भी था- एक टूटे हुए दिल का बदला। इसके अलावा रामसे ब्रदर्स ने डर के साथ थोड़ा बोल्ड कंटेंट और ग्लैमर भी जोड़ा, जो बाद में उनकी हर फिल्म की पहचान बन गया।
मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन रणनीति
रामसे ब्रदर्स ने इस फिल्म को प्रमोट करने का एक नया तरीका निकाला था। उस दौर में रेडियो पर फिल्म के डरावने प्रोमो और आवाजें सुनाकर लोगों में उत्सुकता पैदा की गई। फिल्म के पोस्टरों पर डरावनी लाशों को प्रमुखता से दिखाया गया, जो उस समय के चॉकलेटी हीरो वाले पोस्टरों के बीच एकदम अलग और आकर्षक लगते थे। इसने ग्रामीण और शहरी दोनों तरह के दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचा।
‘दो गज जमीन के नीचे’ दफनाने का सीन
अगर किसी ने यह फिल्म देखि है, तो वह जानते होंगे कि ये फिल्म का सबसे महत्वपूर्ण और ‘टर्निंग पॉइंट’ सीन था, जहां राजवंशी की मौत के बाद अंजली और आनंद उसकी लाश को चुपचाप एक सुनसान जगह पर ले जाते हैं और उसे ‘दो गज जमीन के नीचे’ दफना देते हैं।
इस सीन में जिस तरह की खामोशी का इस्तेमाल किया गया, वह डराने वाला था। मिट्टी डालने की आवाज और बैकग्राउंड में बजने वाला धीमा संगीत उस अपराध की गंभीरता को बढ़ा देता है। यहां ‘दो गज जमीन’ सिर्फ एक माप नहीं, बल्कि राजवंशी के प्यार और भरोसे के अंत भी था। यह दृश्य दर्शकों के मन में अपराधी के प्रति नफरत और पीड़ित के प्रति सहानुभूति पैदा करने के लिए बुना गया था।
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फिलहाल हम आपको अपनी सिनेमा डिकोड सीरीज में हॉरर फिल्मों को डिकोड करके बता रहे हैं। अब इस लिस्ट में होने एक और डरावनी मूवी का नाम शामिल किया है, जो ‘गुमनाम’ है। चलिए जानते हैं इस मूवी की कहानी से लेकर सब कुछ। पूरी खबर यहां पढ़ें।
