ये हफ्ता प्यार का है, क्योंकि 7 फरवरी से लेकर 14 फरवरी तक वैलेंटाइन वीक चल रहा है। इस दौरान हर कपल प्यार में डूबा नजर आ रहा है और एक दूसरे को अच्छे-अच्छे तोहफे दे रहा है। इस दौरान कई ऐसी फिल्मों का भी जिक्र हो रहा है जो रोमांटिक है और जिनमें प्यार दिखाया गया है। मगर कम ही लोग उस फिल्म को याद कर पाएंगे जिसमें प्यार इतना सच्चा दिखाया गया कि अगर प्रेमी जोड़ा जीते जी नहीं मिल पाया तो दोनों ने साथ मिलकर मौत को चुना। हम आज सिने गुफ्तगू में कमल हासन और रति अग्निहोत्री की फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ के बारे में बताने जा रहे हैं।
ये फिल्म 1981 में रिलीज हुई थी और ये बॉलीवुड के इतिहास की सबसे दर्दनाक प्रेम कहानियों में से एक है। इस फिल्म की कहानी ने ना केवल दर्शकों को रुलाया बल्कि समाज को आईना भी दिखाया। ये केवल दो प्रेमियों की कहानी नहीं थी, बल्कि भाषा, संस्कृति और सामाजिक बंदिशों के बीच पिसते प्यार की दास्तान थी। इस फिल्म के बाद कई ऐसे प्रेमी जोड़े थे, जिन्होंने आत्महत्या कर ली थी।
फिल्म की कहानी वासु और सपना की थी। जिनके किरदार कमल हासन और रति अग्निहोत्री ने निभाये थे। फिल्म में वासु को एक तमिल लड़का है, जो उत्तर भारत में रहता है और सपना एक उत्तर भारतीय लड़की। दोनों एक-दूसरे से बेइंतहा मोहब्बत करने लगते हैं, लेकिन भाषा और संस्कृति की दीवारें उनके प्यार के सामने सबसे बड़ी बाधा बन जाती हैं। परिवार और समाज इस रिश्ते को स्वीकार नहीं कर पाते और यही इनकार धीरे-धीरे इस प्रेम कहानी बुरे मोड़ पर आ खड़ी हो जाती है।
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‘एक दूजे के लिए’ की सबसे बड़ी ताकत इसका इमोशनल ट्रीटमेंट है। फिल्म दिखाती है कि जब प्यार सच्चा हो, लेकिन समाज साथ न दे तो इंसान किस हद तक टूट सकता है। क्लाइमेक्स में वासु और सपना का आत्महत्या करते हैं और जिन्होंने भी ये फिल्म देखी, यकीन मानिए वो अपने आंसू रोक नहीं पाया। क्लाइमेक्स आज भी दर्शकों को झकझोर देता है। यह अंत उस दौर में इतना प्रभावशाली था कि कई शहरों में थिएटर से निकलते लोग खामोश हो जाते थे।
कमल हासन का अभिनय इस फिल्म की जान है। भाषा न समझ पाने के बावजूद उनके इमोशन, आंखें और बॉडी लैंग्वेज दर्शकों के दिल तक सीधे पहुंचती है। वहीं, रति अग्निहोत्री ने मासूमियत और मजबूरी को जिस सच्चाई से पर्दे पर उतारा, उसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया था।
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फिल्म का म्यूजिक भी इसकी ताकत रही। ‘तेरे मेरे बीच में’, ‘हम तुम दोनों जब मिल जाएंगे’ जैसे गाने आज भी उतने ही दर्द और मोहब्बत के साथ सुने जाते हैं। एल. वी. प्रसाद के निर्देशन में बनी यह फिल्म चार दशक बीत जाने के बाद भी अमर है।
