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PIFF में पहुंचे ‘शोले’ के डायरेक्टर का खुलासा, एंड से खुश नहीं था सेंसर बोर्ड, ऐसा था फिल्म का आखिरी सीन

इन दिनों देश में सेंसर बोर्ड की भूमिका और फिल्मों पर विवाद के चलते वहां मौजूद ऑडियंस ने फिल्म निर्देशक से सवाल पूछा था।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फोटो सोर्स इंडियन एक्सप्रेस)

पुणे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (PIFF) में देश की सबसे सफल फिल्मों में से एक ‘शोले’ के डायरेक्टर रमेश सिप्पी (70) ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया सेंसर बोर्ड के दबाव की वजह से उन्हें फिल्म का एंड बदलना पड़ा था। दरअसल इन दिनों देश में सेंसर बोर्ड की भूमिका और फिल्मों पर विवाद के चलते वहां मौजूद ऑडियंस उनसे सवाल पूछा था। इसका जवाब देते हुए उन्होंने खुद का निजी अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि साल 1975 में आपातकालीन दौर में फिल्म रिलीज कराने के लिए उन्होंने कितनी मुश्किलों का सामना किया।

फिल्म निर्देशक सिप्पी ने बताया, ‘मैंने शोले का एंड दूसरे तरीके से शूट किया था। जहां ठाकुर गब्बर सिंह को मार देता है, लेकिन सेंसर बोर्ड ने इसे मंजूरी नहीं दी। बोर्ड ठाकुर के पैर से गब्बर सिंह की हत्या से खुश नहीं था। मैं अजीब सी स्थिति में आ गया। आखिर मैं ऐसा क्या करूं जिससे ठाकुर गब्बर को मार सके। क्योंकि ठाकुर हाथ ना होने की वजह से बंदूक से तो गब्बर को नहीं मार सकता था।’ सिप्पी ने आगे बताया कि ज्यादा हिंसात्मक सीन से भी बोर्ड नाखुश था। उन्होंने मुझसे कहा कि आपको एंड में बदलाव करना ही होगा। इससे में बिल्कुल खुश नहीं था। लेकिन मैंने ऐसा किया।

गौरतलब है कि फिल्म फेस्टिवल में पहुंचे रमेश सिप्पी ने इस दौरान फिल्मों में जबरन अश्लील सामग्री और हिंसात्मक सीन डाले जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बॉक्स ऑफिस पर फिल्में हिट कराने के लिए ऐसा नहीं करना चाहिए। जो दूसरे को कॉपी करते हैं वही ऐसा करते हैं। लेकिन यह काम नहीं करता है।

सिप्पी ने इस दौरान मीडिया पर भी कभी-कभी ‘मिसलीडिंग’ खबरें चलाने और विवाद पैदा करने का भी आरोप लगाया। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री पर बात करते हुए निर्देशक ने आगे कहा, ‘मैं इस बात से सहमत नहीं कि आज अच्छे कंटेंट की कमी है। इंडस्ट्री में बहुत से निर्देशक हैं जो अच्छा काम कर रहे हैं। राजकुमार हिरानी इसका उदाहरण हैं।’

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