ताज़ा खबर
 

का-बॉडीस्केप्स में भगवान हनुमान को गलत ढंग से दिखाया गया, सीबीएफसी ने सर्टिफिकेट देने से किया इनकार

सेंसर बोर्ड के चेयरपर्सन पहलाज निहलानी ने भी इस फिल्म को रिजेक्ट करते हुए सर्टिफिकेट नहीं दिया। चेरियन न्‍यूयॉर्क बेस्ट फिल्ममेकर हैं। इस केस को करीब एक साल हो चुका है।

Author नई दिल्ली | March 3, 2017 6:21 PM
सेंसर बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) ने जया चरियन की मलियालम फिल्म का बॉडीस्केप्स को सर्टिफिकेट देने से इंकार कर दिया है।

सेंसर बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) ने जया चरियन की मलियालम फिल्म का बॉडीस्केप्स को सर्टिफिकेट देने से इंकार कर दिया है। सीबीएफसी का मानना है कि फिल्म गे और मोहोसेक्सुअल रिलेशनशिप्स को बढ़ावा देती है। सीबीएफसी द्वारा जारी किए गए बयान के मुताबिक फिल्म के चित्रों के माध्यम से कई मेल बॉडी पार्ट्स को दिखाया गया है जो कि नग्नता फैलाने की श्रेणी में आता है। रिवाइजिंग कमेटी के मुताबिक फिल्म में हिंदुओं के देवता हनुमान को गे के तौर पर ग्रे लाइट में दिखाया गया है जो कि कानून व्यवस्था से संबंधित मुश्किलें पैदा कर सकता है।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन, तिरुवनंतपुरम की रिलीजन ऑफिसर ए.प्रतिभा ने यह आदेश जारी किया है, और गाइडलाइन 1(a), 1(d), 2(vii), 2(viii), 2(ix), 2(xi), 2(xii), 2(xiii), 2(viii) और 3(i) के तरह फिल्म को सर्टिफिकेट नहीं जारी किया गया। फिल्म की निर्देशक जयन चरियन ने फेसबुक पर पोस्ट लिखा- अब यह आधिकारिक हो गया है, मिस्टर पहलाज निहलानी (सीबीएफसी के चेयरमैन) ने मेरे ताबूत में आखिरी कील ठोक दी है। गुरुवार को जब रिव्यू कमेटी मुंबई में फिल्म देखने जा रही थी तो चरियन को सीबीएफसी से हरी झंडी मिलने की उम्मीद थी और उन्होंने फैन्स से फिल्म के लिए प्रार्थना करने के लिए कहा था। उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा- सीबीएफसी चेयरमैन काबॉडीस्केप्स को उच्चतम रिव्यू कमेटी के साथ कल मुंबई में एनएफडीसी में देखेंगे।

मनोरंजन जगत की खबरों के लिए क्लिक करें

सेंसर बोर्ड के चेयरपर्सन पहलाज निहलानी ने भी इस फिल्म को रिजेक्ट करते हुए सर्टिफिकेट नहीं दिया। चेरियन न्‍यूयॉर्क बेस्ट फिल्ममेकर हैं। इस केस को करीब एक साल हो चुका है। लेकिन फिल्म को अभी तक सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया है। फिल्म ‌’लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ को सर्टिफिकेट ना देने के बाद ये दूसरा मामला सामने आया है। केरल में सेंसर बोर्ड की रीजनल ऑफिसर प्रतिभा ए ने इस मामले में निर्देशक चेरियन को एक लेटर भेजा था। वहीं दूसरी ओर ‌इस फिल्म के निर्देशक जयन चेरियन ने फिल्म को सर्टिफिकेट ना देने पर सेंसर बोर्ड के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इससे पहले भी चेरियन की फिल्म ‘पपिलिओ बुद्धा’ को सेंसर बोर्ड ने सर्टिफिकेट नहीं दिया था।

इस बारे में चेरियन का कहना है कि हाईकोर्ट ने सेंसर बोर्ड से कहा था कि वो 30‌ दिन के अंदर फिल्म को सर्टिफिकेट दे, लेकिन सेंसर बोर्ड ने हाई कोर्ट की बात को अनसुना कर दिया और इसके खिलाफ एक अलग याचिक फाइल कर दी। इसके बाद दिसंबर 2016 में दो जज की टीम ने सेंसर बोर्ड की अर्जी को खारिज करते हुए फिल्म को 90 दिनों में सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया था। लेकिन सेंसर बोर्ड ने इस आदेश का भी पालन नहीं किया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App