CBFC CHIEF PRASOON WIOUT CERTIFICATE SCREENING IS WRONG - Jansatta
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पद्मावती विवाद पर बोले प्रसून जोशी- प्रमाणपत्र मिले बिना प्रदर्शन गलत

जोशी का बयान ऐसे समय आया है जब इस तरह की खबरें आई है कि ‘पद्मावती’ के निर्माताओं ने कुछ पत्रकारों के लिए विशेष स्क्रीनिंग की।

Author मुंबई  | November 19, 2017 2:18 AM
सीबीएफसी के चेयरमैन प्रसून जोशी।

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) प्रमुख प्रसून जोशी ने सेंसर प्रमाणपत्र लिए बिना विभिन्न टीवी चैनलों के लिए ‘पद्मावती’ का प्रदर्शन करने पर फिल्म के निर्माताओं की आलोचना की। इससे एक दिन पहले, सीबीएफसी ने प्रमाणन के लिए आवेदन के ‘अपूर्ण’ रहने पर संजय लीला भंसाली की फिल्म को वापस भेज दिया था। जोशी का बयान ऐसे समय आया है जब इस तरह की खबरें आई है कि ‘पद्मावती’ के निर्माताओं ने कुछ पत्रकारों के लिए विशेष स्क्रीनिंग की। इतिहास के तथ्यों के साथ छेड़छाड़ के आरोप में फिल्म विवादों में है।
जोशी ने कहा कि वह निराश हैं कि सीबीएफसी के देखे बिना या प्रमाणित हुए बिना इसका प्रदर्शन मीडिया के लिए किया गया और राष्ट्रीय चैनलों पर इसकी समीक्षा हुई। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘यह व्यवस्था की भूमिका और संतुलन से समझौता है जो कि एक कार्यरत इंडस्ट्री का हिस्सा है। सुविधा के हिसाब से प्रमाणन प्रक्रिया को तोड़ मरोड़ कर देखना अदूरदर्शिता है।’ उन्होंने कहा, ‘एक तरफ सीबीएफसी को जिम्मेदार बताया जा रहा है और प्रक्रिया को तेज करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, दूसरी ओर सारी प्रक्रिया को उलटने का प्रयास कर अवसरवादी परंपरा कायम की जा रही है।’ उन्होंने फिर कहा कि निर्माताओं की तरफ से फिल्म के प्रमाणन के लिए भेजा गया आवेदन अपूर्ण है और कहा कि इस बारे में सेंसर बोर्ड ने संबंधित पक्ष को सूचित कर दिया है।

 

पद्मावती के विरोध में अब कुंभलगढ़़ किला बंद, विरोध जारी
संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के विरोध में शनिवार को राजसमंद जिले में स्थित ऐतिहासिक कुंभलगढ़ किले को बंद रखा गया। राजपूत करणी सेना की अपील पर सर्वसमाज ने पहले चित्तौड़ किले और अब कुंभलगढ़ किला पर्यटकों के लिए बंद किया है। पद्मावती फिल्म का विरोध शनिवार को भी जारी रहा। विरोध करने वाले संगठनों ने अब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से इस मसले पर दखल देते हुए फिल्म पर रोक लगाने की गुहार की है। करणी सेना के राष्ट्रीय महासचिव गोविंद सिंह सोलंकी ने बताया कि शनिवार से ही कुंभलगढ़ में अहिंसात्मक आंदोलन की शुरुआत कर दी गई है। कुंभलगढ़ किले पर हुई विरोध सभा में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। सोलंकी ने बताया कि विदेशी पर्यटकों को परेशानी नहीं हो, इसलिए उन्हें दुर्ग तक जाने की छूट दी गई। देशी पर्यटकों को शनिवार को दुर्ग में प्रवेश ही नहीं करने दिया गया। इससे यहां आने वाले भारतीय पर्यटकों को परेशान होना पड़ा। प्रदेश के कई हिस्सों में शनिवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शन हुए और भंसाली के पुतले फंूके गए।
राजपूत करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी ने यहां कहा कि फिल्म पर रोक लगाने के लिए प्रधानमंत्री को पहल करनी चाहिए। उन्होंने प्रगतिशील बनने वाले कुछ इतिहासकारों के तर्कों पर एतराज भी जताया। उनका कहना है कि ऐसे इतिहासकार पद्मिनी को ही नहीं मान रहे हैं। इस पर भी उन्होंने कड़ा एतराज जताया। कालवी ने खुद को पद्मावती का वंशज बताते हुए 37वीं पीढ़ी का करार दिया। कालवी ने कहा कि जब तक फिल्म पर रोक नहीं लगेगी उनका आंदोलन जारी रहेगा। विद्याप्रचारिणी सभा के महामंत्री डाक्टर महेंद्र सिंह राठौड़ ने फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ ने रोक के लिए सूचना और प्रसारण मंत्री को पत्र भेजा है।

 

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