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कान फिल्म फेस्टिवल: सिनेमा के इतिहास का पुनरावलोकन

कान फिल्म समारोह का यह 70वां साल है। इस अवसर पर यहां विश्व सिनेमा के पिछले 70 सालों के इतिहास का आकलन और पुनरावलोकन किया जा रहा है।

Author Updated: May 18, 2017 6:56 AM
फ्रेंच निर्देशक आनी डेप्लेशॉ की नई फिल्म इस्माइल्स घोस्ट्स के प्रदर्शन के साथ 70 वां कान फिल्म समारोह बुधवार को शुरू हो गया।

फ्रेंच निर्देशक आनी डेप्लेशॉ की नई फिल्म इस्माइल्स घोस्ट्स के प्रदर्शन के साथ 70 वां कान फिल्म समारोह बुधवार को शुरू हो गया। इस फिल्म के अधिकतर प्रमुख कलाकारों को कई बार आॅस्कर पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। कारलोटा गिंसबर्ग तो लार्स वान ट्रीयर की विवादास्पद फिल्म निंफोमैनिएक से चर्चा में रही हंै। मैथ्यू अमारिक और मारियों कोटिलार्ड भी बड़े सेलिब्रेटी बन चुके हंै। आनी डेप्लेशॉ ने यहां पहले की तरह सीधे-सीधे कहानी कहने के बजाय पांच जटिल कथाओं को मिला दिया है।  उन्मादी और जुनूनी फिल्मकार इस्माइल अपनी अगली फिल्म की तैयारी में व्यस्त हैं कि तभी बीस साल पहले मृत घोषित की जा चुकी उनकी प्रेमिका कारलोटा वापस लौटती है। इस बीच पिछले तीन साल से वह सिल्विया (कारलोटा गिंसबर्ग) के साथ जटिल प्रेम में डूबा हुआ है। फिल्म में बार-बार फ्लैशबैक का इस्तेमाल पटकथा को भयावह तरीके से विखंडित करता है। दो उन्मादी स्त्रियों के बीच हमारा फिल्मकार जिंदगी को जितना जोड़ने घटाने की कोशिश करता है, उतनी ही चीजें उससे फिसलती जाती हंै।

कारलोटा बताती है कि बीस साल पहले एक दिन अचानक वह ट्रेन में बैठी और चलती गई। वह दिल्ली पहुंच गई जहां एलेक्स से शादी की। कुछ साल भारत में रही और जब एलेक्स की मौत हो गई तो उसके बेटों ने इसे अपमानित करके निकाल दिया।इसी तरह ईवान नामक एक राजनयिक है जो यों ही दुनिया भर में एडवेंचर करता रहता है। इटली के मशहूर फिल्मकार फेदेरिको फेलिनी और खासतौर से उनकी फिल्म एट एंड हाफ से प्रभावित आनी डेप्लेशॉ ने इसमें जैसे अपने ही भीतर के उलझावों को पिरो दिया है। एक स्त्री प्रेम में है। दूसरी के पास प्रेम की स्मृतियां हैं और तीसरी सब कुछ लुटा चुकी है। डेप्लेशॉ फ्रांसुआ त्रूफो के शब्दों में कहते हैं कि यह सोचना मना है कि हम कोई मास्टरपीस बना रहे हैं, हम एक ऐसी फिल्म बना रहे हैं जो जिंदा दिखे। और उन्होंने ऐसा ही किया है। पटकथा, संपादन, छायांकन, और अभिनय के स्तर पर वे जितनी तोड़फोड़Þ कर सकते थे, उतनी की है और हमारे लिए एक जिंदा फिल्म पेश की है जिसका हर चरित्र बिना सोचे-समझे हर जगह कूद पड़ता है।

कान फिल्म समारोह का यह 70वां साल है। इस अवसर पर यहां विश्व सिनेमा के पिछले 70 सालों के इतिहास का आकलन और पुनरावलोकन किया जा रहा है। आने वाले दिनों मे माइकेल हेनेके, रोमान पोलांस्की, अलेक्जांद्रो जी ईनारितु सहित सैकड़ों फिल्मकार यहां आने वाले हैं। स्पेन के मशहूर फिल्मकार पेद्रो अलमोदोवार इस बार जूरी के अध्यक्ष हैं। उदास करने वाली बात बस इतनी है कि दुनिया के सबसे बड़े फिल्म जलसे में इस बार भी भारत की कोई बड़ी उपस्थिति नहीं है। फिल्म स्कूल के लिए सिनेफाउंडेशन खंड में भारतीय फिल्म और टेलिविजन संस्थान एफटीआइआइ (पुणे) की पायल कपाड़िया की फिल्म आफ्टरनून क्लाउड्स को जरूर जगह मिल सकी है। कान फिल्म समारोह 28 मई तक चलेगा।

 

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