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आज ‘कैफे सोसाइटी’ के प्रदर्शन से शुरू होगा 69वां कान फिल्मोत्सव

कान फिल्मोत्सव वुडी एलेन को 2002 में ही लाइफ टाइम अचीवमेंट का ‘ऑनरेरी पॉम दि ओर’ सम्मान प्रदान कर चुका है।
Author नई दिल्ली | May 11, 2016 14:52 pm
सुप्रसिद्ध अमेरिकी फिल्मकार वुडी एलेन की नई फिल्म ‘कैफे सोसायटी’ का एक दृश्य।

सुप्रसिद्ध अमेरिकी फिल्मकार वुडी एलेन की नई फिल्म ‘कैफे सोसायटी’ के प्रदर्शन के साथ बुधवार, 11 मई, को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित कान फिल्मोत्सव के 69वें अध्याय की शुरूआत हो रही है। यह समारोह 22 मई तक चलेगा। यह तीसरा मौका है जब कान फिल्मोत्सव की शुरूआत वुडी एलेन की फिल्म से हो रही है। इससे पहले 2002 में ‘हॉलीवुड एंडिंग’ और 2011 में ‘मिडनाइट इन पेरिस’ के प्रदर्शन से कान फिल्मोत्सव की शुरुआत हुई थी।

‘कैफे सोसायटी’ में 1930 के दशक के हॉलीवुड की दुनिया है। एक आदमी दूर दराज से फिल्मों में काम करने की चाहत में हॉलीवुड आता है और ‘कैफे सोसायटी’ के चक्कर में फंस जाता है। हालांकि आगे चलकर वह बड़ा सुपर स्टार बनता है।
वुडी एलेन ने उस दौर के हॉलीवुड सिनेमा-संस्कृति की अब तक अनदेखी परतों से धूल हटाने की कोशिश की है। यह फिल्म 11 मई को ही साथ साथ फ्रांस में रिलीज हो रही है। यह भी संयोग है कि 1979 में मैनहट्टन से लेकर 1915 में ‘इरेशनल मैन’ तक वुडी एलेन की अब तक 14 फिल्में कान के ‘आउट ऑफ कांपिटीशन’ खंड में दिखाई जा चुकी हैं। यूरोप में वुडी एलेन की भारी प्रतिष्ठा की एक वजह यह है कि वे बड़ी पूंजी वाले हॉलीवुड के समानांतर पिछले 65 सालों से स्वतंत्र सिनेमा बनाए जा रहे हैं।

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कान फिल्मोत्सव वुडी एलेन को 2002 में ही लाइफ टाइम अचीवमेंट का ‘ऑनरेरी पॉम दि ओर’ सम्मान प्रदान कर चुका है।
कान फिल्मोत्सव के सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिता खंड में इस बार कुल 21 फिल्में चुनी गई हैं। इनमें स्पेन के पेद्रो अलमोवदोर की ‘जुलेटा’, ईरान के असगर फरहादी की ‘द सेल्समैन’, यूके के आंद्रे अरनोल्ड की ‘अमेरिकन हनी’ आयरलैंड के केन लोच की ‘आई, डेनियल ब्लैक’, ‘कनाडा के जेवियर डोलान की ‘इट्स ओनली दि एंड ऑफ दि वर्ल्ड’ प्रमुख हैं। केन लोच 21 वीं बार कान आ रहे हैं जबकि असगर फरहादी तीसरी बार। इस खंड में सबसे अधिक चार फिल्मों के साथ फ्रांस अपनी बढ़त बनाए हुए है जबकि अमेरिका की तीन फिल्मों को जगह मिली है।

दूसरे खंडों में सबसे अधिक नौ अमेरिकी फिल्मों को जगह मिली है। इस बार दिग्गज आस्ट्रेलियाई फिल्मकार जार्ज मिलर को जूरी का अध्यक्ष बनाया गया है। वे अपनी मैड मैक्स सीरीज की फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। कान के दूसरे सबसे प्रमुख खंड ‘अन सर्टेन रिगार्ड’ में इस बार कुल 19 फिल्में ही चुनी गई हैं। इसमें भी भारत की कोई फिल्म नहीं है। ‘आउट आॅफ कांपिटीशन’, ‘मिड नाइट’ और ‘स्पेशल स्क्रीनिंग’ में 16 फिल्में हैं, पर यहां भी भारत की कोई फिल्म नहीं है।

कान में इस बार आधिकारिक रूप से केवल 84 फिल्मों का ही चयन किया गया है। यह बात अलग है कि बाजार और इंटरनेशनल विलेज में दुनिया के दो सौ से भी अधिक देश भागीदारी कर रहे हैं। इस इलाके में भारत का भी एक पंडाल जरूर लगा है। यहां रोमानिया, फिलिपींस, कंबोडिया, मिस्त्र, दक्षिण कोरिया, जापान, आदि की फिल्मों को भी जगह मिल सकी है, पर दुनिया में हर साल सबसे अधिक फिल्में बनानेवाले देश भारत से किसी फिल्म का न होना आश्चर्यजनक है।

कान फिल्मोत्सव के आधिकारिक चयन में भारत की किसी भी फिल्म को जगह नहीं मिल पाई है। दुनियाभर के फिल्म स्कूलों की 2300 फिल्मों में से चुनी गई 18 शॉर्ट फिल्मों के खंड ‘सिनेफोंडेशन’ में कोलकाता के सत्यजीत राय फिल्म एवं टेलिविजन संस्थान के सौरव राय की फिल्म ‘गुध’ ( घोंसला) को जगह मिली है। कुल 5008 फिल्मों मे से चुनी गई दस शार्ट फिल्मों में भी भारत की एक भी फिल्म नही है। जापान की युवा फिल्मकार नाओमी क्वासे इस खंड की जूरी की प्रमुख हैं।

पिछले कुछ सालों से कान फिल्मोत्सव दुनियाभर के युवा फिल्मकारों से उनकी फिल्मों के प्रस्ताव आमंत्रित करता है, जिसमें भारत के आदित्य बिक्रम सेनगुप्ता की फिल्म परियोजना मेमरीज एंड माई मदर को सफलता मिली है। कान की एक सहयोगी गतिविधि डाइरेक्टर फोर्टनाइट में भारत के अनुराग कश्यप की क्राईम थ्रिलर ‘साइको रमन’ दिखाई जा रही है जिसमें मुख्य भूमिका नवाजुद्दीन सिद्दिकी की है। कान क्लासिक खंड में विश्व की उन महान फिल्मों को दिखाया जाता है जिनको बड़ी मुश्किल से रिस्टोर किया गया है। इस बार ज्यॉ लुक गोदार, आंद्रेई तारकोवस्की, केंजी मिजोगुची, जेम्स आइवरी, तोमास आलिया आदि की फिल्मों के साथ वरिष्ठ फ्रेंच फिल्मकार बर्टांड तावरनियर की डाक्यूमेंटरी का प्रीमियर हो रहा है। सिनेमा के बारे में अलग अलग फिल्मकारों की नौ डाक्यूमेंटरी दिखाई जा रही है।

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