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आमने सामने : अंतिम सांस तक प्रशंसकों के लिए अभिनय करूंगा

बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन 11 अक्तूबर को 76 साल के हो गए। इस उम्र में भी वे फिल्मों, विज्ञापनों और टीवी की दुनिया में उतने ही व्यस्त हैं जितने 10 साल पहले हुआ करते थे। आज भी उन्हें ध्यान में रख कर फिल्मों की पटकथा लिखी जा रही है। इस उम्र में भी महानायक का ताज अपने सिर पर रखने वाले इस हरफनमौला फनकार से खास बातचीत।

Author October 12, 2018 3:29 AM
अमिताभ बच्चन 11 अक्तूबर को 76 साल के हो गए।

आरती सक्सेना

सवाल : आज आपका जन्मदिन पूरा देश मनाता है। बचपन के जन्मदिन की कुछ यादें हैं?
’सच कहूं तो एक जमाना था जब मैं अपने जन्मदिन को लेकर बहुत रोमांचित हुआ करता था। एक महीने पहले से ही दिन गिनना शुरू कर देता था। उन दिनों बाबूजी (हरिवंश राय बच्चन) मेरा जन्मदिन मनाया करते थे। मैं सिर्फ तोहफे जमा किया करता था। आज मेरे जन्मदिन को लेकर मैं जितना रोमांचित नहीं होता उससे कहीं ज्यादा मेरे परिवार वाले और मेरे प्रशंसक उत्साहित होते हैं। जिनकी वजह से मैं अपने आप को युवा महसूस करता हूं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा जन्मदिन पूरा देश मनाएगा, शुरुआती दिनों में मैं एक कलाकार के रूप में स्थापित हो पाऊंगा यह भी निश्चित नहीं था। मै खुद को खुशनसीब मानता हूं कि लोगों ने मुझे इतना प्यार दिया। लोगों के प्यार का नतीजा है कि मैं आज भी फिल्मों में सक्रिय हूं। मेरा अपने प्रशंसकों से वादा है कि मैं अपनी आखिरी सांस तक उनके लिए अभिनय करता रहूंगा।

सवाल : छोटा हो या बड़ा आपने हर परदे की चुनौती स्वीकार की। यह कैसे संभव हो पाया?
’मैं बस अपना काम ईमानदारी से करता हूं। यही वजह है कि मुझे सफलता मिलती गई। मैं किसी भी काम को चुनौती नहीं बल्कि अगले अध्याय के रूप में लेता हूं। बाकी सब कुछ भगवान पर छोड़ देता हूं।

सवाल : आपकी आवाज में जादू है। आपके गाए सारे गाने हिट रहे हैं। क्या आप खुद अपनी आवाज की गहराई से प्रभावित हैं?
’ये तो अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने वाली बात हो जाएगी। मेरा मानना है कि जब समय आपके पक्ष में होता है तो आपके माइनस प्वाइंट भी प्लस हो जाते हैं। जिन चीजों को लोग आपकी खामी बताते हैं बाद में उसी को आपकी खूबी बताने लगते हैं। मेरी इसी आवाज की वजह से मुझे रेडियो सेवा से अस्वीकार किया गया था और आज इसी आवाज की कई सारी नकल बनाई जा रही है।

सवाल : बचपन का अमिताभ कैसा था?
’बचपन का अमिताभ बहुत ज्यादा शर्मिला था। अपनी बात कहने में भी उसे काफी समय लग जाता था। आज भी मैं शर्मिला हूं। लेकिन हालात के हिसाब से अपने आप को ढाल लेता हूं। आज भी मुझे भीड़ के बीच खड़े रह कर बोलना पड़े तो मुझे थोड़ी असहजता महसूस होती है। मुझे ऐसा लगता है कि हजारों लाखों आंखें मुझे देख रही हैं। ऐसे में मैं बहुत सजग हो जाता हूं।

सवाल : आप की भगवान के प्रति श्रद्धा है। अपने जन्मदिन पर मंदिर जाना पसंद करते हैं?
’मैं एक आस्थावान आदमी हूं। नियमित रूप से तिरुपति बालाजी के दर्शन करने जाता हूं। मेरी आस्था सिद्धिविनायक में भी है और वैष्णो देवी में भी। लेकिन जहां तक जन्मदिन का सवाल है तो मैं अपने जन्मदिन पर घर में बने मंदिर में भगवान की पूजा कर आशीर्वाद लेता हूं।
सवाल : जिंदगी के इस पड़ाव में आप अपना आकलन कैसे करते हैं?
’मुझे अपनी अब तक की जिदंगी से कोई शिकायत नहीं है। मैंने अपनी जिंदगी में वह सब पाया है जिसकी मुझे चाहत थी। वास्तव में मैं सामान्य जिंदगी जीता हूं। आगे भी ऐेसे ही जिंदगी जिऊंगा।

सवाल : इतनी व्यस्त जिंदगी में ऐसी कोई ख्वाहिश जो आप पूरी नहीं कर पाए?
हां मुझे किताब लिखने का शौक था लेकिन उसके लिए मुझे कभी वक्त ही नहीं मिला। इसके अलावा मैं संगीत सीखना चाहता था या कोई बाद्य सीखना चाहता था वो भी मैं नहीं सीख पाया।

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