एक वक्त था जब बड़े पर्दे पर जगह बनाना ही स्टारडम की पहचान माना जाता था, लेकिन फिर धीरे-धीरे समय बदला और फिर ओटीटी के अलग-अलग प्लेटफॉर्म ने दस्तक दी। इसके बाद मेकर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए अलग-अलग कहानियां लेकर आने लगे, जिसे लोगों ने पसंद किया। हालांकि, शुरुआत में कोई बड़ा स्टार जल्दी से ओटीटी पर काम करने के लिए तैयार नहीं होता था। ऐसे में ओटीटी की फिल्मों और सीरीज के लिए कई बार उन स्टार्स को लीड रोल दिया जाता था, जिन्हें बड़े पर्दे की फिल्मों में साइड रोल तक सीमित कर दिया गया था।
आज हम आपको ऐसे ही कुछ सितारों के बारे में बताते वाले हैं, जिनकी किस्मत ओटीटी प्लेटफॉर्म ने बदल दी। इस लिस्ट में पंकज त्रिपाठी से लेकर प्रतीक गांधी समेत कई नाम शामिल हैं। ओटीटी पर वेब सीरीज करने के बाद न सिर्फ उनके अभिनय की तारीफ हुई, बल्कि उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया।
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पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi)
इस लिस्ट में सबसे पहला नाम पंकज त्रिपाठी का है, जिन्होंने फिल्मों में छोटे रोल करने से लेकर ‘कालीन भैया’ बनने तक का सफर तय किया। जो लोग उन्हें जानते हैं वह इस बात को भी बखूबी जानते होंगे कि पंकज त्रिपाठी सालों तक फिल्मों में छोटे-छोटे किरदार निभाते रहे हैं। उन्होंने ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘फुकरे’ जैसी फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें लीड पहचान नहीं मिल पाई।
इसके बाद आई वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’। इसमें उन्होंने ‘कालीन भैया’ का किरदार निभाया था और वह इतना पॉपुलर हुआ कि पंकज त्रिपाठी रातों-रात ओटीटी के सबसे बड़े स्टार बन गए। उनके डायलॉग, उनका अंदाज- सब कुछ वायरल हो गया। आज वे कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा के सबसे भरोसेमंद चेहरों में गिने जाते हैं।
जयदीप अहलावत (Jaideep Ahlawat)
लिस्ट में दूसरा बड़ा नाम जयदीप अहलावत का है। जयदीप ने कई फिल्मों में काम किया, जिनमें ‘रईस’ भी शामिल है, लेकिन वे बड़े सितारों की भीड़ में कहीं खो गए। इसके बाद ओटीटी पर साल 2020 में आई ‘पाताल लोक’ सीरीज ने सब बदल दिया। इसमें अभिनेता ने इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी का किरदार निभाया, जिसने उन्हें एक नई पहचान दी।
सीरीज देखने के बाद उनके अभिनय की इतनी तारीफ हुई कि वे गंभीर और दमदार कलाकारों की लिस्ट में शामिल हो गए। ओटीटी ने उन्हें वो स्पेस दिया, जो फिल्मों में शायद उन्हें नहीं मिल पाया था।
मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee)
मनोज बाजपेयी हिंदी सिनेमा के उम्दा सितारे हैं। वह पहले ही ‘सत्या’ से पहचान बना चुके थे, लेकिन एक दौर ऐसा भी आया जब उनका करियर धीमा पड़ गया। फिर उनकी वापसी ओटीटी पर आई सीरीज ‘द फैमिली मैन’ ने करवाई। ‘श्रीकांत तिवारी’ के रोल ने उन्हें नई पीढ़ी का पसंदीदा स्टार बना दिया। एक आम आदमी और जासूस की दोहरी जिंदगी को उन्होंने जिस अंदाज में निभाया, उसने उन्हें ओटीटी का सबसे मजबूत चेहरा बना दिया।
शेफाली शाह (शेफाली शाह)
शेफाली शाह ने फिल्मों में काम तो किया, लेकिन उन्हें लंबे समय तक वह स्पेस नहीं मिला जिसकी वे हकदार थीं। इसके बाद आई उनकी सीरीज ‘दिल्ली क्राइम’। इसमें उन्होंने डीसीपी वर्तिका चतुर्वेदी के रोल में ऐसा असर छोड़ा कि पूरी दुनिया ने नोटिस किया। इस सीरीज को इंटरनेशनल अवॉर्ड भी मिले और शेफाली शाह की अदाकारी की जमकर तारीफ हुई।
प्रतीक गांधी (Pratik Gandhi)
लिस्ट में आखिरी नाम प्रतीक गांधी का है, जो पहले थिएटर और गुजराती सिनेमा में सक्रिय थे, लेकिन राष्ट्रीय पहचान नहीं थी। फिर आई उनकी सीरीज ‘स्कैम 1992’, जिसमें उन्होंने हर्षद र्षद मेहता के किरदार ने मशहूर कर दिया। उनकी डायलॉग डिलीवरी और बॉडी लैंग्वेज सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगी। यह शायद OTT के इतिहास की सबसे बड़ी ‘स्टार-मेकिंग’ कहानियों में से एक रही।
क्यों ओटीटी बन गया गेम चेंजर?
अब सवाल आता है कि आखिर बड़े पर्दे और ओटीटी में ऐसा क्या अंतर था, जिससे ये सितारे वहां छा गए। तो इसके कई जवाब हैं… जैसे बड़े पर्दे की फिल्मों में छोटे सितारे बड़े स्टार्स के पीछे छिप जाते हैं। वहीं, ओटीटी पर उनके किरदार को विस्तार मिलता है। यहां नए चेहरों को मौका मिला है और बॉक्स ऑफिस का दबाव नहीं होता। ओटीटी पर कंटेंट हीरो होता है। अगर वह अच्छा हो तो स्टारडम नहीं, बल्कि एक्टिंग चलती है।
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16 फरवरी से 22 फरवरी के बीच ओटीटी पर एक से बढ़कर एक मूवी और वेब सीरीज आने वाली। इसमें अनुराग कश्यप की ‘केनेडी’ से लेकर ‘द नाइट एजेंट 3’ तक कई नाम शामिल हैं। इस खबर को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
