दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अभिनेत्री काजोल के हक में बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने कहा कि बिना काजोल की अनुमति कोई भी उनके नाम, फोटो, आवाज या पहचान का इस्तेमाल कमाई के लिए नहीं कर सकता।
जस्टिस ज्योति सिंह ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कई लोगों और कंपनियों को ऐसा करने से रोक दिया। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक जैसी तकनीकों के जरिए काजोल की पहचान से छेड़छाड़ करना या नकली वीडियो बनाना भी गलत है। अदालत ने संकेत दिया कि आगे और सख्त आदेश दिए जा सकते हैं ताकि कोई भी उनकी तस्वीर या आवाज का गलत तरीके से इस्तेमाल न कर सके। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि काजोल के खिलाफ इंटरनेट पर डाली गई अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट तुरंत हटाया जाए।
पिछले कई दिनों में बॉलीवुड से लेकर साउथ तक के कई एक्टर्स पर्सनालिटी राइट्स को लेकर अदालत का रुख कर चुके हैं। हिंदी सिनेमा से आर माधवन, विवेक ओबरॉय, सलमान खान, अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन भी पर्सनालिटी राइट्स मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं और साउथ की बात करें तो नागार्जुन और जूनियर एनटीआर के नाम भी इनमें शामिल हैं। इसके अलावा कुछ समय पहले सलमान खान ने फिल्ममेकर अभिनव कश्यप के खिलाफ मानहानि का केस भी किया था।
ये सब खबरें सब पढ़ते तो हैं, लेकिन समझ में किसी-किसी को ही आता है कि आखिर क्यों एक्टर्स या बड़ी हस्तियां पर्सनालिटी राइट्स की मांग कर रहे हैं, या फिर कोई एक्टर किसी के खिलाफ मानहानि का केस क्यों कर रहा है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि एंटरटेनमेंट से जुड़ी हस्तियां ये कदम क्यों उठा रही हैं।
आज के समय में पर्सनालिटी राइट्स और मानहानि के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले जहां फिल्मी सितारों से जुड़ी खबरें या अफवाहें अखबारों में छपती थी, लेकिन अब सोशल मीडिया के दौर में ना केवल उनसे जुड़ी अफवाहें फैलती हैं, बल्कि उनपर मीम्स भी बनते हैं, यहां तक की उनकी आवाज, तस्वीरों आदि का भी गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में उनके पास अपने अधिकार की लड़ाई लड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।
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क्या है पर्सनालिटी राइट्स?
पर्सनालिटी राइट्स का मतलब है किसी व्यक्ति की पहचान, नाम, फोटो, आवाज या छवि का अधिकार। बॉलीवुड में अक्सर देखा गया है कि कोई विज्ञापन, पोस्टर या ऑनलाइन कंटेंट किसी सितारे की अनुमति के बिना उनके नाम या चेहरे का इस्तेमाल कर लेती है। ऐसे में सितारे कानूनी कार्रवाई करते हैं ताकि उनकी छवि का गलत उपयोग रोका जा सके।
उदाहरण के लिए बता दें कि हाल ही के कुछ सालों में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण ने उन कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमे दायर किए हैं, जो उनकी छवि या नाम का गलत प्रचार कर रहे थे।
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क्या है मानहानि का केस?
सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने मानहानि के मामलों को बढ़ावा दिया है। अफवाहें, झूठी खबरें और बिना अनुमति के वीडियो या पोस्ट स्टार्स की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। मानहानि केस सिर्फ आर्थिक मुआवजा ही नहीं दिलाते, बल्कि ये भी बताते हैं कि किसी की छवि का अपमान करना कानूनी अपराध है।
मानहानि का केस केवल सितारे नहीं, बल्कि आम लोग भी किसी के द्वारा खुद के बारे में फैलाई गई अफवाह या फिर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी
क्यों कानून का सहारा ले रहे स्टार्स?
ब्रांड वैल्यू की सुरक्षा
आज एक बड़ा स्टार सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि एक ब्रांड होता है। वे कई कंपनियों के ब्रांड एंबेसडर होते हैं और करोड़ों रुपये के कॉन्ट्रैक्ट साइन करते हैं।
अगर किसी विवाद या झूठी खबर से उनकी छवि खराब होती है, तो इसका असर सीधे उनके ब्रांड एंडोर्समेंट पर पड़ता है। यही वजह है कि सितारे अब अपनी छवि को लेकर बेहद सजग हैं।
दीपिका पादुकोण जैसी अभिनेत्रियों के नाम से कई बार फर्जी विज्ञापन चलाए गए, जिनमें उनकी अनुमति नहीं थी। ऐसे मामलों में लीगल टीम तुरंत कार्रवाई करती है ताकि ब्रांड इमेज सुरक्षित रहे।
कोर्ट से मिलती है मदद
जब कोई स्टार अदालत जाता है, तो वह आमतौर पर तीन तरह की राहत मांगता है:
इंजंक्शन (Injunction): यानी संबंधित व्यक्ति या संस्था को तुरंत रोकने का आदेश।
कंटेंट हटाने का निर्देश: सोशल मीडिया या वेबसाइट से विवादित सामग्री हटाना।
मुआवजा (Damages): आर्थिक हर्जाना।
बॉलीवुड में कई सितारे अब मीडिया और डिजिटल कंपनियों को नोटिस भेजते हैं और गंभीर मामलों में मुकदमा दायर करते हैं। कोर्ट में वे पर्सनालिटी राइट्स और मानहानि का हवाला देकर न्याय की उम्मीद करते हैं। इससे उन्हें न केवल न्याय मिलता है बल्कि उनकी प्रतिष्ठा भी बनी रहती है। पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
