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संगीत का जुनून सेना से मायानगरी ले गया, 40 में से 4 फिल्मफेयर झोली में, गाने भी गाए

बॉलीवुड फिल्मों के लिए एक से बढ़कर एक गाने लिखने वाले गीतकार आनंद बख्शी की कहानी एक ऐसे मुसाफिर की है जिसने अपनी अंतरात्मा के संगीत को दुनिया के कानों तक पहुंचाने के लिए सेना से मायानगरी तक का सफर किया।

Anand Bakshi के नाम से फेसबुक पर बने एक अकाउंट से ली गई तस्वीर।

बॉलीवुड फिल्मों के लिए एक से बढ़कर एक गाने लिखने वाले गीतकार आनंद बख्शी की कहानी एक ऐसे मुसाफिर की है जिसने अपनी अंतरात्मा के संगीत को दुनिया के कानों तक पहुंचाने के लिए सेना से मायानगरी तक का सफर किया। 21 जुलाई 1930 को पाकिस्तान के रावल पिंडी में जन्मे आनंद बख्शी ने 1983 में दूरदर्शन को दिए एक इंटरव्यू में बॉलीवुड तक के अपने दिलचस्प सफर की कहानी सुनाई थी। बख्शी ने बताया था कि उन्होंने शुरुआती पढ़ाई के दौरान 20 वर्ष की उम्र में भारतीय सेना को ज्वाइन किया था, जहां समय की कमी के कारण वह कभी कभार ही लिख पाते थे लेकिन जब भी वक्त मिलता था तो वह अपनी कविताएं लिखना जारी रखते थे। वह अपने सैन्य दल से संबंधित कार्यक्रमों अपने लिखे गानों का इस्तेमाल करते थे। 2 वर्ष 4 महीने और 12 दिनों तक सेना में काम करते हुए वह मायानगरी के लिए भी प्रयास करते रहे। इससे पहले उन्होंने महज 14 वर्ष की उम्र में रॉयल इंडियन नेवी को भी ज्वाइन किया था।

सेना को छोड़ने का फैसला उनका ही था लेकिन वह बतौर वॉलिटिंयर सेना से जुड़े रहे थे और 1956 में इससे भी मुक्ति पा ली थी। 1956 में ही वह गायक, गीतकार, अभिनेता और संगीत संगीतकार के तौर पर काम खोजने के लिए मुंबई चले गए। ब्रिज मोहन की 1958 में आई फिल्म ‘भला आदमी’ से उन्हें पहला मौका मिला। उन्होंने इसके लिए 4 गाने लिखे। पहला गाना था- धरती के लाल न कर मलाल। 2 साल पहले वह यह गाना रेडियो के लिए खुद गा चुके थे। सफलता उन्हें 1962 में आई फिल्म ‘मेहंदी लगी मेरे हाथ’ के लिए गाने लिखकर मिली। इस फिल्म के लिए संगीतकार की भूमिका उस वक्त छाए कल्याण जी आनंद जी ने निभाई थी। इसके बाद आनंद बख्शी की गाड़ी चल पड़ी। उन्होंने फिल्म- काला समंदर (1962), हिमालय की गोद में (1965), जब जब फूल खिले (1965), मिलन (1967) के लिए शानदार गाने लिखे।

गीतकार के तौर पर उन्होंने साढ़े तीन हजार से ज्यादा गाने लिखे, जिनमें 638 गाने फिल्मों के लिए लिखे। 1972 में आई फिल्म ‘मोम की गुड़िया’ के लिए उन्होंने पहली बार गाना गाया। गाने के बोल है- बागों में बहार आई होठों पे पुकार आई। इसमें लता मंगेशकर ने उनका साथ दिया। बख्शी को 40 बार फिल्मफेयर पुरस्कारों के लिए नामित किया गया, जिसमें से 4 बार वह विजेता रहे। उन्होंने अपने करियर में बॉलीवुड के तकरीबन सभी दिग्गज कलाकारों, संगीतकारों, गायक-गायिकाओं के साथ काम किया। 30 मार्च 2002 को मुंबई के नानवती अस्पताल में उन्होंने 72 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली।

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