बालीवुड हुआ बाग बाग, सिनेमाघरों में लौटे दर्शक

दर्शक सिनेमाघरों में लौट आए। बालीवुड बाग बाग है।

अक्षय कुमार।

दर्शक सिनेमाघरों में लौट आए। बालीवुड बाग बाग है। हजारों करोड़ के कारोबार के सामने कोरोना महामारी और ओवर द टाप (ओटीटी) तकनीक के कारण अनिश्चितता का जो अंधकार छाता नजर आ रहा था, वह दीपावली के दीयों की रोशनी से छंट गया है। अक्षय कुमार की ‘सूर्यवंशी’ और ‘रजनीकांत’ की तमिल फिल्म ‘अन्नाथे’ टिकट खिड़की पर जो एकत्रण कर रही हैं, वह इस बात की गवाही देता है कि सिनेमा कारोबार कोरोना और ओटीटी को पीछे छोड़ रफ्तार पकड़ चुका है। अक्षय की ‘सूर्यवंशी’ तीसरे ही दिन दुनिया भर में 100 करोड़ का कारोबार कर चुकी थी जबकि रजनीकांत की ‘अन्नाथे’ छह दिनों में 200 करोड़ के पार हो गई। यह स्थिति तब है जब अधिकांश थियेटर मात्र पचास फीसद क्षमता के साथ खुले हैं।

दीपावली से ठीक पहले मल्टीप्लेक्स मालिकों में संदेह था कि क्या दर्शक कोरोना महामारी आने के पहले की तरह सिनेमाघरों में लौटेंगे! एक मल्टीप्लेक्स ने तो महाराष्ट्र में सिनेमाघरों के खुलने के बाद पहला शो दर्शकों के लिए मुफ्त रख दिया था, यह जांचने के लिए कि दर्शकों सिनेमाघरों में लौटेंगे या नहीं। बड़े बजट की फिल्मों के निर्माताओं के चेहरों पर चिंता की लकीरें थीं कि क्या वे अपनी फिल्म की लागत निकाल पाएंगे। आखिर महीनों से यह कारोबार अनिश्चितता भंवर में फंसा था। कई फिल्मों की रिलीज स्थगित कर दी गई थी। फिल्मों की शूटिंग के शेड्यूल या तो लड़खड़ा गए थे या रद्द कर दिए गए थे।

नई फिल्में बनाने की घोषणाएं बहुत कम हो रही थीं। कुल मिलाकर सभी को संदेह था कि सिनेमा कारोबार वापस पटरी पर आ पाएगा। दूसरी चुनौती ओटीटी ने पेश की थी। छोटे बजट की ज्यादातर फिल्में ओटीटी पर दिखाई जा रही थीं। अमिताभ बच्चन, सलमान और अक्षय कुमार जैसे सितारों की फिल्में तक लोग घर बैठे ओटीटी पर देख रहे थे। ‘राधे’ के सिनेमाघरों में हुए कारोबार को देखकर तो फिल्मवालों की सांसें अटकने लगी थीं।

मगर दीपावली की रोशनी ने सारे अंधकार को हटा दिया। पांच नवंबर को जब 19 महीने से रुकी पड़ी ‘सूर्यवंशी’ रिलीज हुई तो निर्माताओं और सिनेमाघर मालिकों में टकराव होता दिखाई दिया। ‘सूर्यवंशी’ के निर्माताओं ने सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों से पांच से दस लाख की मिनिमम गारंटी मांगी। कुछ तैयार हो गए, कुछ ने मुंह बनाया। पहले दिन फिल्म ने 26.29 करोड़ को ओपनिंग ली। मगर एकत्रण से ज्यादा जिस बात का उल्लेख किया जाना चाहिए वह यह था कि महीनों से सिनेमा के भूखे दर्शकों की भीड़ कई सिनेमाघरों के सामने से थी। खासकर महाराष्ट्र और मुंबई से मिली खबरों पर भरोसा करें तो मैक्सस सिनेमा बोरीवली के प्रबंधक को 5 नवंबर को रात 11.45, 12.30, 1.45, 2.00 बजे तक अपने शो चलाने पड़े। फिर ढाई घंटे का ब्रेक दिया और फिल्म का प्रदर्शन 4.30, 5.15, 6.00 तक किया। इस दौरान अधिकांश शो फुल थे या लगभग फुल बताए गए।

कुछ ऐसी ही स्थिति मैक्सस मल्टीप्लेक्स भायंदर की बताई जहां रात पौने एक बजे भी फिल्म का प्रदर्शन किया गया। विरार के राकस्टार नोवा सिनेमाघर ने 12.30 और 12.45 बजे भी फिल्म का प्रदर्शन किया। मुंबई के उपनगर चेम्बूर स्थित मूवी टाइम सिनेमाघर में 11.30 का शो खत्म होने के बावजूद लोग सिनेमाघर के सामने इकट्ठा थे। कथित तौर पर ‘जनता की भारी मांग’ के कारण प्रबंधन ने यह शो खत्म होने के बाद एक और शो चलाया। प्रबंधन का कहना था कि 11.30 के बाद भी कई दर्शक बाहर थे और उनकी मांग थी कि फिल्म का एक शो और चलाया जाए। हालांकि ऐसी स्थिति ज्यादातर नहीं, एकाध सिनेमाघरों में ही थी क्योंकि एकत्रण बहुत ज्यादा नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर आगे भी अतिरिक्त शो चलाने की बात मल्टीप्लेक्स प्रबंधन ने कही।

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