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अब बनेगी फिल्म, पढ़ें जंग में उतरने वाली पहली महिला एयरफोर्स पायलट गुंजन सक्सेना की कहानी

17 साल पहले करगिल युद्ध में गुंजन ने अपने शौर्य का परिचय दिया था। उन्होंने तब घायल सैनिकों को चीता हेलीकॉप्टर की मदद से बचाया था और इतिहास रचा था।

गुंजन सक्सेना साल 1994 में भारतीय वायु सेना द्वारा भर्ती की गई 25 महिला ट्रेनी पायलटों में से एक थीं।

बॉलीवुड फिल्म डायरेक्टर करण जौहर अब बायोपिक बनाएंगे। फिल्म की कहानी गुंजन सक्सेना पर होगी। वह जंग में उतरने वाली पहली महिला एयरफोर्स पायलट हैं। 17 साल पहले कारगिल युद्ध में उन्होंने अपने शौर्य का परिचय दिया था। उन्होंने तब घायल सैनिकों को चीता हेलीकॉप्टर की मदद से बचाया था और इतिहास रचा था। यही कारण है कि आज भी भारतीय वायु सेना में उन्हें ‘कारगिल गर्ल’ के नाम से जाना जाता है। गुंजन, श्रीविद्या राजन के साथ भारत की पहली लड़ाकू पायलट हैं। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में हिस्सा लिया था। युद्ध में घायल हुए सैनिकों को बचाने के लिए वह चीता हेलीकॉप्टर लेकर पहुंची थीं। तकरीबन हफ्ते भर तक वह ड्रास और बटालिक सेक्टरों में सैन्य टुकड़ियों को सामान पहुंचाती थीं।

आउटलुक की रिपोर्ट के मुताबिक, सक्सेना ने तब पहाड़ियों के किनारों पर फंसे शहीदों और घायलों को भी निकाला, जहां हेलीकॉप्टर चलाने के लिए खास क्षमता चाहिए होती हैं। वह भी तब जब पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी और मिसाइलों से हमले किए जा रहे थे। गुंजन को उनके इस कारनामे के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। उनके भाई और पिता भी सेना में थे। 1994 में वह उन 25 महिलाओं में शामिल की गईं, जिन्हें भारतीय वायु सेना ने ट्रेनी पायलट के तौर पर चुना था।

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एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, ” मुझे लगता है कि सबसे शानदार तभी महसूस होता है, जब आप ऐसे हेलीकॉप्टर के पायलट होते हैं। वहां पर तब हमारा मुख्य काम युद्ध में हताहत हुए लोगों को निकालना और बचाना होता था। मैं कहूंगी कि जब आप किसी की जान बचाते हैं, तब सबसे संतोषजनक लगता है, क्योंकि आप उसी के लिए वहां पर लगाए गए होते हैं।” गुंजन के पास वे मौके नहीं थे, जो आज भारतीय वायु सेना में शामिल होने वाली नई महिलाओं के पास हैं। 17 सालों तक उनका कार्यकाल रहा। लेकिन वायु सेना से लगाव और जुड़ाव कभी खत्म न हुआ। शादी भी उन्होंने भारतीय वायु सेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर पायलट से की थी।

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