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खूबसूरती मायने नहीं रखती : भूूमि पेडणेकर

'मेरा मानना है कि कुछ अलग होता है या कोई अलग करता है, तभी दर्शकों की नजर में आता है। अभिनेत्री बनने से पहले सहायक निर्देशक के तौर पर काम करने का मौका मिला। इस दौरान मैंने यह जाना कि जो अलग है वही हिट है।'

Author Published on: March 27, 2020 1:10 AM
भूमि पेडनेकर ने आयुष्मान खुराना के साथ आपने करिअर की शुरुआत की थी।

आरती सक्सेना

सहायक निर्देशक के तौर पर अपने फिल्मी करिअर की शुरुआत करने वाली भूमि पेडणेकर पर्दे वे सारे किरदार जीना चाहती हैं जो असल जिंदगी में संभव नहीं हंै। हालांकि हर फिल्म की शुरुआत से पहले उन्हें खूब डर लगता है लेकिन एक बार जब वे काम शुरू करती हैं तो यह मायने नहीं रखता कि उनका किरदार सत्तर साल की औरत का है या फिर एक बदसूरत काली लड़की का।

सवाल : ज्यादातर अभिनेत्रियां फिल्मों में अपने किरदार की लंबाई को लेकर सर्तक रहती हैं लेकिन आप ऐसा नहीं करती। ‘भूूत पार्ट वन हांटेड शिप’ और ‘शुभ मंगल सावधान’ जैसी फिल्मों में छोटे किरदार निभाने से भी आप नहीं चुकती। आखिर क्यों?

-मैं फिल्मों में अपने किरदार को अहमियत देती हूं, रोल की लंबाई को नहीं। अगर मुझे लगता है कि फिल्म में मेरा रोल छोटा लेकिन खास है तो फिर उसे करने से नहीं कतराती। यही वजह है कि फिल्म निर्माता मुझे साइन करते वक्त इस बात से नहीं हिचकिचाते हैं कि मैं फिल्म करूंगी या नहीं।

सवाल : आपकी हालिया प्रदर्शित फिल्म ‘पति पत्नी और वो’ और ‘सांड की आंख’ में आपके अभिनय की खूब तारीफ हुई। क्या कहेंगी इस बारे में?
’ यहां तक पहुंचने के लिए मैंने काफी संघर्ष किया है। इसलिए मुझे अपने काम की कीमत पता है। लोग जब मेरे अभिनय की तारीफ करते है तो मुझे दिली बहुत खुशी होती है। लेकिन हां, इसके साथ ही थोड़ा तनाव भी होता है कि मुझे और अच्छा काम करना है।

सवाल : फिल्म ‘पति पत्नी और वो’ में जहां आप ग्लैमरस दिखी हैं वही ‘शुभा मंगल सावधान’ और ‘बाला’ में नॉन ग्लैमरस। ‘शुभ मंगल सावधान’ में जहां आपने मोटी लड़की का किरदार निभाया है वहीं ‘बाला’ में सांवली लड़की का। क्या आपके लिए फिल्मों में खूबसूरत दिखना मायने नहीं रखता?
-असल जिंदगी में आपका स्वभाव आपकी खूबसूरती से कहीं ज्यादा मायने रखता है। आप चाहे कितने भी खूबसूरत हो लेकिन अगर आप अच्छे इंसान नहीं है तो कोई आपको पसंद नहीं करेगा। फिल्में समाज का आईना होती हैं। यहां भी आपका किरदार आपके लुक्स से ज्यादा अहमियत रखता है। दोनों ही फिल्मों में मेरा किरदार काफी अलग और महत्त्वपूर्ण था, जिसे दर्शकों ने सराहा। इसलिए फिल्मों में खूबसूरत दिखने से ज्यादा मेरा किरदार मायने रखता है।

सवाल : ‘दुर्गावती’ और ‘तख्त’ फिल्म की काफी चर्चा है। इन फिल्मों में आप किस तरह का किरदार निभा रही हैं?
– ‘तख्त’ मेरे लिए ड्रीम प्रोजेक्ट है। मैं धर्मा प्रोडक्शन के साथ एक बार फिर काम कर रही हूं। अपने किरदार के बारे में ज्यादा तो नहीं बता पाउंगी, बस इतना कह सकती हूं कि मैं इसमे खून पीने वाली लड़की का मुश्किल किरदार निभा रही हूं। जहां तक ‘दुर्गावती का सवाल है तो यह एक हॉरर थ्रीलर फिल्म है जिसमें मैं आईएएस ऑफिसर बनी हूं। ‘दुर्गावती तेलगु फिल्म ‘भागमती’ की रीमेक है। यह मेरे करिअर की पहली सोलो फिल्म होगी।

सवाल : आपने अपने करिअर की शुरुआत से ही अलग तरह की फिल्में करने की कोशिश की हैं, इसकी क्या वजह रही?
-मेरा मानना है कि कुछ अलग होता है या कोई अलग करता है, तभी दर्शकों की नजर में आता है। अभिनेत्री बनने से पहले सहायक निर्देशक के तौर पर काम करने का मौका मिला। इस दौरान मैंने यह जाना कि जो अलग है वही हिट है। अलग होने के साथ आपकी अदाकारी नेचुरल होनी चाहिए बनावटी नहीं। इसके अलावा हमेशा अलग करने की कोशिश करती रहनी चाहिए। लिहाजा जब मैंने अभिनय की शुरुआत की तो इन बातों का ध्यान रखा और आगे बढ़ती चली आई।

सवाल : कुछ ही सालों में अभिनय को लेकर आप आत्मविश्वासी नजर आती हैं, तो क्या अब आप खुद को एक स्टार मानती हैं?
-अरे नहीं, अभी तो मैंने शुरुआत ही की है। वैसे भी मैंने कभी खुद को एक स्टार नहीं माना। मैं अपने आप को एक अभिनेत्री मानती हूं जो किरदार की भूूखी है। हमेशा कुछ ऐसा करना चाहती है जो उसने कभी नहीं किया। जहां तक आत्मविश्वास की बात है तो अपको सच कहूं, मैं अपनी हर फिल्म की शुरुआत में काफी डरी रहती हूं कि पता नहीं मुझसे होगा कि नहीं। लेकिन जब मैं किरदार में घुस जाती हूं तो सब भूल जाती हूं। यही वजह है कि न तो मैं सत्तर साल की औरत का किरदार निभाने में डरी और न ही अपना वजन पचीस किलो बढ़ाने में।

सवाल : आयुष्मान खुराना के साथ आपने करिअर की शुरुआत की थी। ‘शुभ मंगल सावधान’ और ‘बाला’ में भी आपने उनके साथ काम किया है। आयुष्मान के लिए आप क्या कहेंगी?
-आयुष्मान मेरे लिए बहुत ही खास हैं। वे बहुत ही शांत और फ्रेंडली इंसान है। उन्होंने कभी भी अपना स्टारडम नहीं दिखाया। फिल्म ‘दमा लगा कर हईशा’ के वक्त मैं बहुत डरी हुई थी। लेकिन उस दौरान भी उन्होंने मुझे प्रोत्साहित किया, जिसके कारण मैं अच्छा काम कर सकी। मैं चाहे कितने भी हीरो के साथ काम कर लूं लेकिन आयुष्मान मेरे लिए बहुत खास रहेंगे।

सवाल : रियल लाइफ वाली भूमि रील लाइफ वाली भूमि से कितनी अलग है?
-बहुत अलग है। असल जिंदगी की भूमि मुंबई की एक साधारण लड़की है। मैं कभी गांव में नहीं गई और ना ही वैसी भाषा बोली जैसा कि मैं फिल्मों में बोलते दिखती हूं। मेरे लिए शहर की लड़की का किरदार निभाना आसान होगा। लेकिन मैं ऐसे किरदार करना चाहती हूं जिसे मैं असल जिंदगी में नहीं कर सकती। इसलिए मुझे चुनौतीवाले किरदार पसंद है।

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