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रामलीला में मां की साड़ी चुरा रवि किशन निभाते थे सीता का रोल, डायरेक्टर ने पैसे देने से कर दिया था इन्कार

रवि किशन का मानना है कि जो हार नहीं मानते और मुंबई से लड़ते हैं, वही रविकिशन बनते हैं। शहर को रेंग कर नापा है। लंबी इमारत को देख पगालाया नहीं। योद्धा हूं। अनजान मौत नहीं मरना...

बॉलीवुड में एक से एक हीरे हैं। कुछ को चमकाया गया, तो कुछ ने खुद को तराशा। चप्पले घिंसी। संघर्ष किया। अपने बलबूते मायानगरी में मुकाम हासिल किया। इसी फेहरिस्त में यूपी के छोरे का नाम भी है। जनाब जौनपुर से ताल्लुक रखते हैं। नाम है रवि किशन। बात-बात पर हर हर महादेव कहते हैं और पहला प्रेम सिनेमा को मानते हैं। इसके लिए घर में पिटे भी। 500 रुपए लेकर मुंबई आए। कमरतोड़ू संघर्ष किया।

डायरेक्टरों के नखरे झेले, मगर हार नहीं मानी। सिनेमा की दुनिया में ऊंचाई पर पहुंचने पर भी जमीन नहीं छोड़ी। अब तक 400 फिल्में कर चुके हैं। 100 करोड़ से लेकर भोजपुरी तक इसमें शामिल हैं। प्रोडक्शन हाउस भी चला रहे हैं। जानते हैं कैसे यह सिनेमाई योद्धा रवि किशन बना, जिसे उसके पिता पुजारी बनाना चाहते थे।

रवि किशन का जन्म 17 जुलाई 1969 को हुआ। जौनपुर में बिसुइन में। मिट्टी के घर में पैदा हुए थे। गुरबत की जिंदगी जी। गांव, खेत-खलिहान और गंगा के इर्द-गिर्द बड़े हुए। पिता पुजारी थे। छुटपन में रवि रामलीला करते थे। सीता बनते थे। मां की साड़ी चुराकर। पिता को यह पसंद नहीं था, इसलिए रवि कई बार कूटे भी गए। वह बताते हैं कि रामलीला के चक्कर में पिता से पिटा। वह धमकी देते थे, इसलिए मां कहतीं कि जो तुम यहां से (जौनपुर) चले जाओ। उन्होंने ही 500 रुपए देकर भेज दिया था, ताकि पिता जी से बच सकूं।

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अब वह मुंबई पहुंच गए थे। शुरुआत में हाथ-पैर मारे। रंगमंच किय, लेकिन कुछ खास बात नहीं बनी। 16 साल की उम्र में काजोल के साथ फिल्म की। ‘उधार की जिंदगी’। फिर काफी दिन खलिहर रहे। पहली फिल्म पीतांबर थी, जो 1992 में आई थी। उसके बाद अक्षय कुमार संग फिल्म आई, लेकिन दोबारा बेगारी के दिन देखे। यहां तक कि एक बार तो रवि किशन को एक फिल्म के लिए डायरेक्टर ने पैसे देने से मना कर दिया। वह इससे टूट गए। तब पिता की बात याद आई। गांव लौटने के बारे में सोचा, लेकिन हार नहीं मानी।

संघर्ष के बारे में बताते हैं कि स्ट्रग्ल कर रहा था। शाहरुख-अक्षय के साथ काम किया, लेकिन कुछ हुआ नहीं। सलमान के साथ ‘तेरे नाम’ की। पुजारी का रोल मिला। फिल्म में पापा को कॉपी किया। धोती, कुर्ता और कंठी उन्हीं की इस्तेमाल की। इसके लिए नेशनल अवॉर्ड में बेस्ट सर्पोटिंग एक्टर के लिए नाम गया। वहीं, से भोजपुरी इंडस्ट्री के अलावा नाम कमाया और लोगों ने पहचाना।

रवि के मुताबिक जो मुंबई से लड़ते हैं, वही रविकिशन बनते हैं। शहर को रेंग कर नापा है। लंबी इमारत को देख पगालाया नहीं। योद्धा हूं। अनजान मौत नहीं मरना। आए हो, तो अगल-बगल के लोग जानें कि दुनिया को अलविदा कहा। एक्टिंग और डांसिंग के बाद राजनीति में आए। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस में शामिल हुए। जौनपुर से। फिर फरवरी 2017 में वह भाजपा में आ गए। उससे पहले 2006 में रिएलिटी टीवी शो बिग बॉस में आए। 2012 में झलक दिखला जा सीजन 5 में 7वें नंबर पर एलिमिनेट हुए थे।

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