भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में बनी हैं, जिन्होंने अपने समय में न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई बल्कि फिल्म इंडस्ट्री की दिशा भी बदल दी। साल 1973 में रिलीज हुई फिल्म ‘बॉबी’ ऐसी ही फिल्मों में गिनी जाती है। कम बजट, नए कलाकार और एक साधारण प्रेम कहानी के दम पर इस फिल्म ने उस दौर में जबरदस्त सफलता हासिल की थी।
यह फिल्म राज कपूर के करियर की भी एक बेहद खास फिल्म मानी जाती है। उन्होंने इस फिल्म के जरिए अपने बेटे ऋषि कपूर को लॉन्च किया था, वहीं फिल्म की हीरोइन डिंपल कपाड़िया ने भी इस फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। ‘बॉबी’ ने इन दोनों कलाकारों को रातों-रात स्टार बना दिया था।
आर्थिक संकट से निकलने की कोशिश थी ‘बॉबी’
‘बॉबी’ के बनने के पीछे एक दिलचस्प कहानी भी है। दरअसल, राज कपूर की पिछली फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो पाई थी। इस फिल्म में उन्होंने बहुत बड़ा बजट लगाया था, लेकिन फिल्म के फ्लॉप होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस मुश्किल दौर से बाहर निकलने के लिए राज कपूर को एक ऐसी फिल्म बनानी थी जो कम बजट में तैयार हो और दर्शकों को भी पसंद आए। इसी सोच के साथ उन्होंने एक युवा प्रेम कहानी पर फिल्म बनाने का फैसला किया।
नए सितारों पर लगाया बड़ा दांव
उस समय बॉलीवुड में बड़े-बड़े सितारों का दौर था। लेकिन राज कपूर ने इस फिल्म के लिए किसी बड़े स्टार को लेने की बजाय नए कलाकारों को मौका देने का फैसला किया। उन्होंने अपने बेटे ऋषि कपूर को फिल्म का हीरो बनाया। वहीं फिल्म की हीरोइन के लिए कई लड़कियों का ऑडिशन लिया गया, जिसके बाद डिंपल कपाड़िया को चुना गया। उस समय डिंपल सिर्फ 16 साल की थीं।
दोनों की ताजगी और मासूमियत ने फिल्म की प्रेम कहानी को और भी ज्यादा वास्तविक बना दिया। दर्शकों को यह नई जोड़ी इतनी पसंद आई कि फिल्म रिलीज होते ही दोनों स्टार बन गए।
साधारण लेकिन दिल को छू लेने वाली कहानी
‘बॉबी’ की कहानी दो अलग-अलग सामाजिक वर्गों के युवाओं के प्यार के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में ऋषि कपूर ने अमीर परिवार के लड़के राजा का किरदार निभाया, जबकि डिंपल कपाड़िया ने मछुआरे की बेटी बॉबी का रोल किया। दोनों की मुलाकात होती है और धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगते हैं। लेकिन समाज और परिवार के फर्क की वजह से उनके रिश्ते को स्वीकार नहीं किया जाता।
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संगीत ने भी बनाई फिल्म को यादगार
‘बॉबी’ की सफलता में इसके संगीत का भी बहुत बड़ा योगदान था। फिल्म के गाने आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं। फिल्म का संगीत मशहूर जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था और गानों को लता मंगेशकर और शैलेंद्र सिंह जैसे दिग्गज गायकों ने गाया था। ‘हम तुम एक कमरे में बंद हों’, ‘मैं शायर तो नहीं’ और ‘झूठ बोले कौवा काटे’ जैसे गाने उस दौर में सुपरहिट हुए और आज भी लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
युवाओं की पसंद बनी फिल्म
‘बॉबी’ को खास तौर पर युवाओं ने बहुत पसंद किया। उस समय बॉलीवुड में अधिकतर फिल्में पारिवारिक या सामाजिक मुद्दों पर आधारित होती थीं। लेकिन ‘बॉबी’ ने पहली बार युवा प्रेम कहानी को इतने बड़े स्तर पर पेश किया। फिल्म में दिखाया गया फैशन, संगीत और रोमांस उस दौर के युवाओं के बीच ट्रेंड बन गया। डिंपल कपाड़िया का स्टाइल और ऋषि कपूर की इमेज युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो गई थी।
बॉक्स ऑफिस पर मचाया धमाल
कम बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। फिल्म ने भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अच्छी कमाई की। ‘बॉबी’ उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हुई और इसे कई पुरस्कार भी मिले। फिल्म की सफलता ने राज कपूर को आर्थिक संकट से बाहर निकाल दिया और आर.के. स्टूडियो को फिर से मजबूती दी।
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बॉलीवुड में शुरू हुआ नया ट्रेंड
‘बॉबी’ की सफलता के बाद बॉलीवुड में युवा प्रेम कहानियों का नया दौर शुरू हो गया। इसके बाद कई फिल्ममेकरों ने नए कलाकारों को लेकर रोमांटिक फिल्में बनानी शुरू कीं। यह फिल्म सिर्फ एक सुपरहिट फिल्म ही नहीं थी, बल्कि उसने हिंदी सिनेमा में एक नई शैली को भी जन्म दिया।
रिलीज के कई दशक बाद भी ‘बॉबी’ को बॉलीवुड की सबसे यादगार रोमांटिक फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म की कहानी, गाने और नई जोड़ी का जादू आज भी दर्शकों को आकर्षित करता है। कम बजट, नए सितारे और मजबूत कहानी के दम पर बनी यह फिल्म इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि अगर कहानी दिल से बनाई जाए, तो फिल्म हमेशा के लिए यादगार बन जाती है।
‘बॉबी’ ने न सिर्फ ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया को स्टार बनाया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि सिनेमा में नई सोच और ताजगी हमेशा दर्शकों को पसंद आती है।
