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‘बीड़ी जलइले’ वाकई लोकप्रिय गाना है: नचिकेता

उनका पूरा नाम नचिकेता चक्रवर्ती है, लेकिन बंगाल के लोग उन्हें नचिकेता कह कर ही पुकारते हैं।

नचिकेता चक्रवर्ती है,

जयनारायण प्रसाद
उनका पूरा नाम नचिकेता चक्रवर्ती है, लेकिन बंगाल के लोग उन्हें नचिकेता कह कर ही पुकारते हैं। ढेरों बांग्ला म्यूजिक एल्बम के मालिक नचिकेता बंगाल में अपने जीवनमुखी गानों और रवींद्र संगीत के लिए तो जाने ही जाते हैं, उनका एक परिचय यह भी है कि उन्होंने वर्ष 2006 में बनी विशाल भारद्वाज की बाक्स आॅफिस हिट फिल्म ‘ओंकारा’ में ‘बीड़ी जलइले जिगर से पिया’ जैसा बेहद लोकप्रिय गीत भी गाया। उससे ठीक पहले यानी वर्ष 2005 में मशहूर फिल्मकार श्याम बेनेगल की ऐतिहासिक फिल्म ‘नेताजी सुभाषचंद्र बोस : द फॉरगटन हीरो’ में भी एक गीत उन्होंने सोनू निगम के साथ गाया था। गुलजार, एआर रहमान, विशाल भारद्वाज जैसे फिल्म के महारथियों से उनका साबका पुराना है, तभी तो सभी नचिकेता के प्रशंसक हैं।

महानगर कोलकाता में एक सितंबर,1965 को एक मध्यवर्गीय परिवार में जन्मे और यहां के श्यामबाजार स्थित महाराजा मणिंद्रचंद्र कॉलेज से स्नातक नचिकेता गायक के अलावा गीत लेखक, कंपोजर और एक सफल परफॉर्मर भी हैं। गीत-संगीत के प्रति उनका लगाव बचपन से है। वे कहते हैं-संगीत के प्रति दिलचस्पी बचपन से ही थी। जैसे-जैसे बड़ा होता गया, गीत-संगीत से लगाव गहरा होता गया। नचिकेता कहते हैं कि उनके चाहने वाले अनगिनत हैं। जब स्टेज पर गाता हूं तो लोग झूमने लगते हैं और टूट पड़ते हैं। वे बताते हैं कि मैं अपनी तरह का गायक हूं। पुरानी रवायत से गाने के खिलाफ हूं चाहे वह जीवनमुखी गीत हो या आधुनिक या फिर रवींद्र संगीत क्यों न हो, मैं हमेशा अपने ढंग से गाता हूं।

करीब तीन सौ गीत गा चुके नचिकेता का कहना है कि हिंदी गानों में मेरी दिलचस्पी जरूर है। यही वजह है कि फिल्म ‘ओंकारा’ के गीत ‘बीड़ी जलइले जिगर से पिया’ ने मुझे पॉपुलर बना दिया। यह वाकई पॉपुलर और समूह-गीत है। इससे ठीक एक वर्ष पहले श्याम बेनेगल की ऐतिहासिक फिल्म ‘सुभाषचंद्र बोस : द फॉरगटन हीरो’ में मुझे गाने का मौका मिला था। इस फिल्म के संगीत-निर्देशक एआर रहमान साहेब थे। ये सभी आॅफर मेरे लिए सचमुच अनमोल थे। सभी जानते हैं कि श्याम बेनेगल और विशाल भारद्वाज भारतीय सिनेमा के बड़े और नामी फिल्मकार हैं। दोनों बेहद शांत, सहयोगी और दिमाग से काम करते हैं। तकनीकी तौर पर दोनों दक्ष भी हैं। वे कहते हैं कि दो बॉलीवुड फिल्मों में काम करने के बाद मुझे आगे किसी हिंदी फिल्म के लिए बुलावा नहीं आया। चाहता तो एकाध हिंदी फिल्म में जरूर गा सकता था, लेकिन मैंने कोशिश ही नहीं की। बंगाल और अपनी मादरी जुबान बांग्ला में गाकर मैं पूरी तरह खुश हूं। काम मैं नहीं मांगने जाता, वह खुद मुझ तक चलकर आता है।

नचिकेता कहते हैं कि वक्त मिलता है तो कविता, कहानी या फिर निबंध वगैरह लिख लेता हूं। यह आदत कॉलेज के दिनों की है। वे बताते हैं कि विशाल भारद्वाज की ‘ओंकारा’ विलियम शेक्सपियर की मशहूर साहित्यिक कृति ‘ओथैलो’ पर आधारित थी, जबकि श्याम बेनेगल साहेब की फिल्म एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाली थी। दोनों ही फिल्मों में आकाश-पाताल का फर्क था। एक में मनोरंजन का भरपूर पिटारा था, तो दूसरी हिस्टोरिकल फिल्म थी। ‘ओंकारा’ कॉन और काहिरा के फिल्म महोत्सवों में दिखाई और सराही गई। बेहतरीन गीत-संगीत के लिए पश्चिम बंगाल सरकार के बंगभूषण, संगीतभूषण और वर्ष 2005 में प्रतिष्ठित बीएफजेए पुरस्कारों से नवाजे गए नचिकेता अपने समकालीन और एकदम से नए गायकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।

उस्ताद रशीद खान, मौसुमी दास, अन्वेषा, सुदेष्णा गांगुली और शुभमिता के साथ भी उनके ड्वेट बांग्ला संगीत एल्बम काफी लोकप्रिय हैं। जीवन-युद्ध, चाका, हठात्वृष्टि, जोश, समुद्र साक्षी, जैकपॉट, टारगेट, चैलेंज और हाल में रिलीज जुल्फिकार जैसी बांग्ला फिल्मों में अपने स्वर का जादू बिखेर चुके नचिकेता ने अनेक बांग्ला फिल्मों में संगीत भी दिया है।
एबार नीलांजना उनका काफी पॉपुलर बांग्ला म्यूजिक एल्बम है। इस एल्बम के गाने सुनने के लिए श्रोता हमेशा ही बेताब रहते हैं।

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