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‘नेता नहीं दामाद ढूंढ लेते हैं, वो अपना विकास करता है’, बिहार की राजनीति पर खेसारी लाल यादव का तंज

खेसारी लाल ने कहा कि बिहार को जातिवाद बर्बाद कर रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार छोड़कर आज हर राज्य में फैक्ट्रियां लगी हुई हैं। हम अपने ही घर में प्रवासी बने हुए हैं।

Bihar Assembly Election 2020, khesari lal on Bihar Election,खेसारी लाल इन दिनों बिहार में नई हुनर की तलाश कर रहे हैं।

Bihar Assembly Elections 2020: अक्टूबर-नवंबर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में गहमागहमी शुरू हो गई है। इन दिनों भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल (Khesari Lal) भी बिहार में ही मौजूद हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में एक्टर ने बिहार चुनाव और बिहार की राजनीति को लेकर काफी कुछ कहा है। खेसारी लाल ने कहा कि किसी भी प्रदेश का विकास इसलिए होता है क्योंकि वहां जातिवाद नहीं होता है।

खेसारी लाल ने आगे कहा कि बिहार में हर जाति का एक नेता है। तो हम नेता नहीं दामाद ढूंढते हैं। दमाद ढूंढेंगे तो हमारा विकास कहां से होगा। वह अपना विकास करेगा। हमारा विकास नहीं करेगा। जब हम नेता ढूंढेंगे तो शायद हमारा विकास हो जाएगा। खेसारी ने कहा कि एक ऐसे नेता को ढूंढना पड़ेगा जो बेटा बनकर काम करे। तब हमारे बिहार राज्य का विकास होगा। लेकिन हम दामाद ढूंढते हैं। जब तक हम ऐसा करेंगे बिहार का विकास तो नहीं होगा।

बिहार को जातिवाद बर्बाद कर रहा
खेसारी लाल ने इस दौरान कहा कि बिहार को जातिवाद बर्बाद कर रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार छोड़कर आज हर राज्य में फैक्ट्रियां लगी हुई हैं। प्रत्येक राज्य में रोजगार है। हम अपने ही राज्य में प्रवासी मजदूर हो जाते हैं। खेसारी लाल ने कहा कि मैं जातिगत बात नहीं कर रहा। मैं भी यादव कुल से हूं और मुझे भी यादव प्यारे लगते हैं। मुझे अपनी भी विचारधारा को बदलना पड़ेगा। खेसारी लाल ने कहा कि हम सबको एक साथ मिलकर चलना होगा। अच्छे काम करने वालों का साथ देना होगा।

हर धर्म-जाति को मानने वाले नेता की जरूरत
खेसारी लाल ने आगे कहा कि नेता ऐसा होना चाहिए जो सबको साथ लेकर चले। उन्होंने कहा कि जब हमारे धर्म और कास्ट बंटते हैं तो हमारी विचारधारा भी बंट जाती है। दूसरे राज्य इसलिए विकास करते हैं क्योंकि वहां हर धर्म और जाति के लोग किसी एक को चुनते हैं जो विकास करता है।

अपने ही घर में प्रवासी होने का दुख
खेसारी लाल ने कहा कि हम आज अपने ही घर में प्रवासी मजूदर हो गए हैं। इसका काफी दुख है। अगर बिहार में रोजगार होता तो हम प्रवासी नहीं होते। अपने ही घर में कमाते और अपने परिवार के साथ रहते।

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