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मैं जो हूं सो डंके की चोट पर हूं- फिल्म के सेट पर देर से पहुंचने के सवाल पर बोले पवन सिंह

पवन सिंह के सेट पर लेट जाने को लेकर कई प्रोड्यूसर्स शिकायत करते हैं जिसे लेकर पवन सिंह का कहना है कि जहां काम होता है मैं वहीं काम करता हूं। उन्होंने बताया कि जब सेट पर एनर्जी नहीं होती तो वो खुद भी 500 गुना स्लो हो जाते हैं।

pawan singh, pawan singh personal life, bhojpuri cinema newsपवन सिंह अपने विचार रखने में बिल्कुल नहीं हिचकते

पवन सिंह भोजपुरी फिल्मों के सर्वश्रेष्ठ कलाकारों में से एक हैं। वो अपनी फिल्मों से ही भी बल्कि अपने मधुर आवाज़ से दर्शकों के बीच बेहद मशहूर हैं। उन्हें सिर्फ भोजपुरी का ही दर्शक नहीं जानता बल्कि भारत और विदेशों में भी उनके नाम का डंका बजता है। उनका गाना, ‘लॉलीपॉप लागेलू’ हर पार्टी की शान है। पवन सिंह को एक बेबाक अभिनेता के रूप में भी जाना जाता है जो अपनी बातों को कहने से बिल्कुल नहीं डरता। हाल ही में उन्होंने एक यूट्यूब चैनल से बात की जिसमें एक बार फिर उन्होंने अपनी बेबाकी का परिचय दिया है।

कई प्रोड्यूसर्स का यह कहना है कि वो अक्सर सेट पर लेट पहुंचते हैं जिस कारण फिल्म को पूरा करने में काफी वक्त लग जाता है। इसके जवाब में पवन सिंह का कहना था कि वो भले ही सेट पर लेट पहुंचते हैं लेकिन अपनी एनर्जी के बल पर उस काम को बहुत कम समय में ख़त्म भी कर देते हैं। उन्होंने बताया, ‘मैं जो हूं, सो डंके की चोट पर हूं। उदाहरण के तौर पर मैं बता दूं कि ‘घातक’ फिल्म मैंने 19 दिन में पूरा किया है। तो जहां काम होता है वहां मैं काम करता हूं।’

उन्होंने आगे बताया, ‘अगर मैं सेट पर एक घंटा लेट ही पहुंचा लेकिन देखा कि आपके अंदर एनर्जी है तो आपसे 20 गुना फास्ट नहीं हो गया तो फिर पवन सिंह नाम नहीं। वहीं अगर एक घंटा सेट पर लेट पहुंचा और देख रहा हूं कि लोग आलस में बैठे हैं, 5 – 7 घंटा सेट पर बैठे रहेंगे तो वहां काम नहीं हो सकता। जहां काम होता है, वहां मैं काम करता हूं। जहां टाइम पास होता है, और सेट पर पहुंचकर लगता है कि एनर्जी नहीं है तो मैं उनसे 500 गुना स्लो हो जाता हूं।’

 

उन्होंने भोजपुरी के नए कलाकारों के बारे में भी बात की और कहा कि उन्हें गायक और अभिनेता रितेश पांडे में सबसे ज़्यादा संभावना दिखती है।  पवन सिंह बोले, ‘आज के समय में हर कोई सामने नहीं आता है, और कोई सामने आता भी है तो जब उसे अपने मुंह से ही सुपरस्टार बन जाना है तो कोई बात ही नहीं। लेकिन जितने लोग मिले नए कलाकारों में, रितेश पांडे अच्छे लगे। उससे जितनी देर भी मैंने फोन पर बात की, चाहे सामने मिला हो, दो तीन साल पहले जब वो मेरे साथ इंडिया से बाहर गया था तो मैंने देखा कि वो दुबक कर बैठा है। मैंने उससे कहा कि इधर आओ, छोटे भाई हो हंसो, खेलो। रितेश पांडे के अंदर भी मैनर है, उसमें धीरज है, ईश्वर उन्हें खूब आगे बढ़ाएं।’

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