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भोजपुरी के लिए एक अच्छे ओटीटी प्लेटफार्म की जरूरत- भोजपुरी फिल्मों में अश्लीलता को लेकर बोलीं आम्रपाली दुबे

भोजपुरी एक्ट्रेस आम्रपाली दुबे का कहना है कि भोजपुरी कंटेंट के लिए कोई नेटफ्लिक्स या अमेज़न जैसा ओटीटी प्लेटफॉर्म नहीं है जिस कारण सारा कंटेंट बिना रेगुलेशन वाले प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर जाता है और दर्शक अच्छे और बुरे में फर्क नहीं कर पाते।

आम्रपाली दुबे का कहना है कि भोजपुरी के लिए भी कोई प्लेटफॉर्म होना चाहिए जिससे अच्छे और बुरे कंटेंट में फर्क हो

भोजपुरी फिल्मों की शीर्ष अभिनेत्री आम्रपाली दुबे ने फिल्म ‘निरहुआ हिंदुस्तानी’ से भोजपुरी सिनेमा में कदम रखा और देखते ही देखते दर्शक उनके अभिनय के फैन बन गए। बिहार के गोरखपुर की रहने वाली आम्रपाली दुबे ने अपने अभिनय और खूबसूरती से सबका दिल जीता है। उनके गाने या फिल्में रिलीज़ होते ही लाखों- करोड़ों व्यूज बटोर लेती हैं। आम्रपाली दुबे एक सुलझी हुई अभिनत्री मानी जाती हैं जो समय- समय पर मीडिया में अपने विचार भी रखतीं हैं। थोड़े दिनों पहले एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने भोजपुरी फिल्मों और गानों की अश्लीलता पर भी बात की।

उन्होंने कहा, ‘देखा जाए तो आज जितने भी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स हैं जैसे नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, वैसा कोई ओटीटी प्लेटफॉर्म भोजपुरी के लिए नहीं है। इसलिए भोजपुरी का जो भी कंटेंट होता है वो यूट्यूब पर आता है। यूट्यूब पर किसी तरह का सेंसर नहीं है। जिस यूट्यूब पर हम बहुत अच्छी भोजपुरी फ़िल्में अपलोड करते हैं, उसी यूट्यूब पर बिना किसी सेंसर सर्टिफिकेट के चीप एल्बम्स, चीप गाने अपलोड होते हैं। जब दर्शक भोजपुरी फ़िल्में सर्च करते हैं तो फिल्मों के साथ वो चीप गाने भी आते हैं। इसलिए दर्शक कंफ्यूज हो जाते हैं और फर्क नहीं कर पाते।’

आम्रपाली ने आगे बताया, ‘इसकी वजह से सभी भोजपुरी कंटेंट को एक साथ डिग्रेड कर दिया गया। पूरी भाषा को ही अपने आप में खराब बोल दिया गया है। मुझे लगता है जब कोई ऐसा ओटीटी प्लेटफॉर्म होगा जहां पर अच्छी खासी साफ – सुथरी भोजपुरी फिल्में देखने का मौका लोगों को मिलेगा, तब उन्हें पता चलेगा कि रियल कंटेंट ये है।’ आम्रपाली दुबे का कहना है कि ऐसा हर इंडस्ट्री में होता है। हर इंडस्ट्री में ए, बी, सी ग्रेड की फिल्में होती है लेकिन यहां लोग फर्क नहीं कर पाते।

 

उनका कहना था, ‘यहां लोग फर्क नहीं कर पाते और इसका कारण है। अगर आप हिंदी फिल्मों को देखें तो एक तरह की फिल्में एक तरह के थियेटर्स में रिलीज़ होती हैं, दूसरी तरह की दूसरे थियेटर्स में। आप अगर नेटफ्लिक्स या अमेज़न पर कोई फिल्म देख रहे हैं तो आपको पता है कि वो फिल्म अच्छी है इसलिए इन प्लेटफॉर्म्स पर है। जो अच्छी नहीं होगी वो किसी रेगुलर प्लेटफॉर्म पर होगी शायद। तो उनके पास यह अंतर दिखाने के लिए प्लेटफॉर्म्स हैं लेकिन हमारे पास एक ही जरिया है अपने टैलेंट को शोकेस करने का। और उसी में सब टैलेंट मिक्स हो जाता है और सब किसी को डिफेम कर दिया जाता है।’

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