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हिंदी फिल्मों में छाए रहे बांग्लाभाषी कलाकार

किशोर कुमार अनूठे बंगाली थे। उन्होंने अभिनय, गायन और निर्देशन क्या नहीं किया। 4 अगस्त, 1929 को मध्यप्रदेश के खंडवा में जन्मे किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था।

4 अगस्त, 1929 को मध्यप्रदेश के खंडवा में जन्मे किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था।

जयनारायण प्रसाद

हिंदी सिनेमा में बांग्लाभाषी अभिनेताओं का अनूठा योगदान रहा है। अशोक कुमार, प्रदीप कुमार, केष्टो मुखर्जी, निर्मल कुमार, असित सेन, तरुण बोस, किशोर कुमार, विश्वजीत, उत्पल दत्त, उत्तम कुमार, मिथुन चक्रवर्ती, समित भांजा, राहुल बोस, रोनित रॉय और रोहित रॉय के नामों के उल्लेख के बगैर बालीवुड अधूरा है।

अशोक कुमार पहले बांग्लाभाषी अभिनेता हैं, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। 13 अक्तूबर, 1911 को बिहार के भागलपुर में जन्मे अशोक कुमार का असली नाम कुमुद लाल गांगुली था। उन्हें लोग दादामुनी के नाम से भी पुकारते थे। 90 वर्ष की उम्र में 10 दिसंबर, 2001 में वे गुजरे। अशोक कुमार की पहली हिंदी फिल्म थी जीवन नैया, जो 1936 में आई थी। फिर इसी वर्ष आई उनकी अछूत कन्या। 1941 की फिल्म झूला और किस्मत (1943) से लेकर मिस्टर इंडिया (1987) तक उन्होंने जमकर काम किया। अशोक कुमार की आखिरी हिंदी फिल्म थी आंखों में तुम हो, जो वर्ष 1997 में आई थी।

प्रदीप कुमार भी बंगाली थे। उनका पूरा नाम था शीतल बटबयाल। 3 जनवरी, 1925 को कलकत्ता में जन्मे प्रदीप कुमार बेहद तंगहाली में 76 की उम्र में 27 अक्तूबर, 2001 में कलकत्ता में ही गुजरे। महज 17 वर्ष की उम्र में वे अभिनय की दुनिया में आ गए थे। पहली फिल्म थी देवकी बोस के निर्देशन में बनी अलकनंदा (1947)। फिर, नागिन, घूंघट, राखी, ताजमहल, अफसाना, अनारकली के जरिए हिंदी सिनेमा में प्रदीप कुमार का नाम अमिट हो गया।

हास्य अभिनेता केष्टो मुखर्जी का जन्म 7 अगस्त, 1905 को बंबई में हुआ।। 3 मार्च, 1982 को वे बंबई में ही गुजरे। केष्टो मुखर्जी शराबी की भूमिका में बेजोड़ दिखते थे। जाने-माने फिल्मकार ऋत्विक घटक फिल्मों में लेकर आए थे।। केष्टो मुखर्जी की पहली हिंदी फिल्म थी मुसाफिर, जो वर्ष 1957 में आई थी। वर्ष 1975 में आई शोले में केष्टो मुखर्जी ने नाईं हरिराम का किरदार निभाया था, जिसे आज भी दर्शक भूलते नहीं। निर्मल कुमार 91 वर्ष की उम्र में कोलकाता में रहते हैं। 14 दिसंबर, 1928 को जन्मे निर्मल कुमार ने कभी हिंदी फिल्में बाजी (1951), हावड़ा ब्रिज (1958), और कहीं आर कहीं पार (1971) में अभिनय किया था। बाजी का निर्देशन गुरुदत्त ने किया था और फिल्म हावड़ा ब्रिज का शक्ति सामंत ने।

असित सेन ऐसे बंगाली थे, जिनका जन्म उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में हुआ था। वर्ष 1953 से लेकर आखिरी वर्षों तक असित सेन ने 200 हिंदी फिल्में की। 1960, 1970 और 1980 के कुछ माह तक असित सेन की बंबई में धाक थी।

किशोर कुमार अनूठे बंगाली थे। उन्होंने अभिनय, गायन और निर्देशन क्या नहीं किया। 4 अगस्त, 1929 को मध्यप्रदेश के खंडवा में जन्मे किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था। वर्ष 1946 में आई शिकारी उनकी पहली फिल्म थी। कई और हिंदी फिल्मों में भी किशोर कुमार ने काम किया। लेकिन गायन के क्षेत्र में ही उनका शानी रहा। सर्वश्रेष्ठ गायक के रूप में किशोर कुमार को आठ फिल्मफेयर पुरस्कार मिले। 13 अक्तूबर, 1987 को वे चल बसे। मशहूर अभिनेता जय मुखर्जी का भी अपने जमाने में बड़ा नाम था। उनकी पहली फिल्म लव इन शिमला 1960 में अभिनेत्री साधना के साथ आई थी।

विश्वजीत का भी हिंदी सिनेमा में काफी नाम था। विश्वजीत 83 वर्ष के हैं और मुंबई में रहते हैं। प्रसेनजीत चटर्जी उन्हीं का बेटा है, जो बांग्ला फिल्म उद्योग में नंबर वन माने जाते हैं। उत्पल दत्त, उत्तम कुमार, मिथुन चक्रवर्ती, समित भांजा, राहुल बोस, रोनित रॉय और उनके अनुज रोहित रॉय ने भी हिंदी सिनेमा में यादगार किरदार निभाया है। उत्पल दत्त की गोलमाल, गुड्डी, नरम गरम, शौकीन, भुवन सोम यादगार फिल्में हैं। उत्पल दत्त 19 अगस्त, 1993 को गुजरे। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी मिला था।

उत्तम कुमार का असली नाम अरुण कुमार चटर्जी था। उत्तम कुमार ने छोटी-सी मुलाकात (1967), देश प्रेमी (1982) और मेरा करम मेरा धरम (1987) समेत चंद हिंदी फिल्मों में अभिनय किया था।

मिथुन चक्रवर्ती को अब तक तीन नेशनल अवॉर्ड मिल चुके हैं। दो अनजाने, शौकीन, अग्निपथ, गुरु, प्यार झुकता नहीं आदि मिथुन की अच्छी कामर्शियल फिल्में हैं।

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