Batwara 1947 Film Updates: सनी देओल और प्रीति जिंटा स्टारर ‘बटवारा 1947’ 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। रिलीज होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर इसे दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। साथ ही एडवांस बुकिंग में भी इसे ठीक-ठाक रिस्पॉन्स मिला है। फिल्म की खास स्क्रीनिंग एक दिन पहले रखी गई, और इसमें भी फिल्म को जबरदस्त रिव्यू मिले।
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ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क की ताजा एडवांस बुकिंग रिपोर्ट के अनुसार, राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी इस फिल्म के भारत में एडवांस में 8,800 से अधिक शो के लिए 65,000 से ज्यादा टिकट बेचे हैं। फिल्म ने प्री-सेल्स से लगभग 4.21 करोड़ रुपये की कमाई की है।
एडवांस बुकिंग के आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि ‘बटवारा 1947’ स्वतंत्रता दिवस वीकेंड में प्रवेश करने के साथ अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। 14 अगस्त को रिलीज होने वाली इस फिल्म को 15 अगस्त की राष्ट्रीय छुट्टी का फायदा मिलेगा। अगर दर्शकों की प्रतिक्रिया और माउथ-ऑफ-वर्ड सकारात्मक रहती है, तो इससे फिल्म के सिनेमाघरों में प्रदर्शन को बढ़ावा मिल सकता है।
हालांकि, फिल्म को इमरान हाशमी स्टारर ‘आवारापन 2’ से कड़ी टक्कर मिल रही है। शुरुआती एडवांस बुकिंग ट्रेंड में ‘आवारापन 2’ को ‘बटवारा 1947’ से आगे बताया जा रहा है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस वीकेंड पर दोनों फिल्मों के बीच होने वाली यह बॉक्स ऑफिस भिड़ंत काफी दिलचस्प रहने वाली है।
Batwara 1947 Box Office: ‘बंटवारा 1947’ बॉक्स ऑफिस: सनी देओल की फिल्म जल्द पार करेगी 3 करोड़ का आंकड़ा
ट्रेड ट्रैकर Sacnilk के मुताबिक, सनी देओल स्टारर ‘बंटवारा 1947’ ने शुक्रवार शाम 5 बजे तक करीब 2.15 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। फिल्म फिलहाल 5,913 शोज़ में चल रही है।
Batwara 1947 Review and Rating: फिल्म को फिल्मफेयर ने दी 4 स्टार रेटिंग
फिल्मफेयर के ऑफिशियल एक्स पेज पर लिखा है, "बंटवारा 1947 ऐसे समय में आई है, जब हमें बेहद ज़रूरत है यह याद दिलाने की कि सीमा के उस पार रहने वाले लोग महज़ अमूर्त पहचान नहीं, बल्कि इंसान हैं। विभाजन ने एक देश को बाँट दिया, लेकिन नफ़रत ने इंसानों को एक-दूसरे से अलग कर दिया। फिल्म का अंतिम दृश्य एक शांत, लगभग विद्रोही-सी संभावना सामने रखता है-शायद इंसानियत अब भी हमें फिर से जोड़ सकती है।” साथ ही इसे 4 स्टार रेटिंग दी गई है।
Batwara 1947 Review: फिर देश प्रेम में डूबे नजर आए सनी देओल, जानें बेटे करण ने कैसा किया काम, बेहद दर्दनाक है भारत-पाक बटवारे की कहानी
Batwara 1947 में करण देओल रहे बड़ा सरप्राइज
X यूजर @MeghUpdates ने Batwara 1947 को लेकर अपनी राय साझा करते हुए लिखा कि फिल्म की खासियत यह है कि यह अपने किरदारों को सिर्फ अच्छा या बुरा दिखाने के बजाय उन्हें जटिल और कमजोरियों से भरा इंसान बनाती है। कहानी आगे बढ़ने के साथ दर्शक उनके डर, फैसलों और संघर्षों को समझने लगते हैं और अंत तक उनके लिए भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं।
यूजर ने सनी देओल के अभिनय की तारीफ करते हुए कहा कि यह उनकी हालिया फिल्मों की सबसे परतदार परफॉर्मेंस में से एक है। उनका दमदार अंदाज बरकरार है, लेकिन इस बार किरदार के जरिए अपराधबोध, डर और बेबसी भी दिखाई देती है। प्रीति जिंटा को भी गंभीर और भावनात्मक भूमिका में प्रभावशाली बताया गया।
वहीं, निर्देशक राजकुमार संतोषी के पुराने अंदाज की तारीफ करते हुए यूजर ने लंबे संवाद, खामोशी, आमने-सामने के टकराव और ड्रामा को फिल्म की खासियत बताया। करण देओल को उन्होंने फिल्म का बड़ा सरप्राइज बताया।
रिव्यू की सबसे खास बात फिल्म का संदेश है- कभी-कभी परिवार वही होता है, जिसे आप किसी भी हाल में छोड़ने से इनकार कर देते हैं। और यही बात Batwara 1947 को सबसे ज्यादा भावुक और असरदार बनाती है।
Batwara 1947 Review: इंसानियत और उस मां के प्यार की कहानी है ‘बंटवारा 1947’
X यूजर @SAMTHEBESTEST_ ने Batwara 1947 का रिव्यू शेयर करते हुए लिखा कि यह फिल्म उन्हें इतनी भावुक कर गई कि क्लाइमेक्स में उनकी आंखों से दो आंसू निकल आए। उन्होंने खास तौर पर अंतिम संस्कार वाले दृश्य का जिक्र किया, जहां मुस्लिम लोग “राम नाम सत्य है” का जाप करते हैं।
यूजर के मुताबिक, फिल्म सिर्फ हिंदू-मुस्लिम एकता या नफरत की कहानी नहीं है, बल्कि यह इंसानियत और उस मां के प्रति प्यार की कहानी है, जो सांप्रदायिक बहसों से दूर है। हालांकि, उन्होंने फिल्म की धीमी रफ्तार और कमजोर तरीके से पेश किए जाने को इसकी बड़ी कमी बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म देखने आए सनी देओल के कुछ फैंस क्लाइमेक्स में एक्शन न होने से निराश हो सकते हैं। उनके अनुसार, फिल्म को एक खास वर्ग की ओर से विरोध या नफरत का सामना करना पड़ सकता है, और आज के माहौल में इस धारणा को बदलना मुश्किल होगा, जिससे फिल्म की पहुंच सीमित हो सकती है।
Batwara 1947 Review: दर्द और बंटवारे की कहानी 'बंटवारा 1947’, मगर धीमी है रफ्तार
इंडियन बॉक्स ऑफिस ने बटवारा 1947 को 1/5 रेटिंग दी है। समीक्षा में फिल्म को एक गंभीर विषय और महत्वपूर्ण संदेश वाली फिल्म बताया गया, लेकिन इसके निर्देशन, प्रस्तुति और धीमी रफ्तार की आलोचना की गई है।
रिव्यू के मुताबिक, फिल्म की कहानी सनी देओल के किरदार सिकंदर मिर्जा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो विभाजन की अफरातफरी के बीच फंसी एक बुजुर्ग हिंदू महिला माई (शबाना आजमी) की रक्षा करता है।
धर्म से ऊपर इंसानियत का केंद्रीय विचार काफी मजबूत संभावनाओं वाला है, लेकिन समीक्षक के अनुसार फिल्म अपनी नाटकीय ऊर्जा को बनाए रखने में संघर्ष करती है और धीरे-धीरे “बहुत धीमी और उबाऊ फिल्म” बन जाती है।
सनी देओल के अभिनय को ईमानदार और समर्पित बताया गया है, जबकि शबाना आजमी की भूमिका में गरिमा और संजीदगी लाने के लिए उनकी तारीफ की गई है।
बड़े पर्दे पर वापसी कर रहीं प्रीति जिंटा को देखने में सुखद और फिल्म में गर्मजोशी लाने वाला बताया गया है। हालांकि, समीक्षक का मानना है कि उनके किरदार के पास इतना पर्याप्त स्क्रीन स्पेस या मजबूत सामग्री नहीं है कि वह फिल्म में बड़ा प्रभाव छोड़ सके।
Batwara 1947 Review and Rating: फिल्म को क्रिटिक ने दिए 3.5 स्टार
तरण आदर्श ने सनी देओल की फिल्म को 3.5 स्टार रेटिंग दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा है, "Batwara 1947 में Sunny Deol और Rajkumar Santoshi की जोड़ी एक बार फिर अपना जादू चलाने में कामयाब रहती है। फिल्म का असामान्य प्लॉट, दमदार इमोशंस और पावर-पैक्ड परफॉर्मेंस इसकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। साथ ही, फिल्म एक बेहद मजबूत और प्रासंगिक संदेश भी देती है।
असगर वजाहत के चर्चित नाटक ‘जिस लाहौर नइ देख्या, ओ जम्या ई नइ’ पर आधारित यह फिल्म बंटवारे की भयावहता और उस दौर की उथल-पुथल को एक इंटेंस कहानी के जरिए सामने लाती है।
Ghayal (1990), Damini (1993) और Ghatak (1996) जैसी यादगार फिल्मों के बाद Santoshi और Sunny Deol की यह जोड़ी बिल्कुल अलग कहानी और नए किरदारों के साथ वापस आई है।
राजकुमार संतोषी ने कहानी को पूरे विश्वास के साथ संभाला है। 1947 के लाहौर को जिस तरह दोबारा रचा गया है, वह काफी प्रामाणिक नजर आता है। उस दौर की अशांति, अनिश्चितता और डर को फिल्म का माहौल प्रभावी ढंग से महसूस कराता है।
फिल्म का पहला हाफ कहानी और माहौल तैयार करने में थोड़ा वक्त लेता है, लेकिन असली असरदार हिस्सा इसका दूसरा हाफ है। यहां कई ऐसे शानदार सीक्वेंस आते हैं, जिनमें राजकुमार संतोषी की खास छाप साफ दिखाई देती है।
कुल मिलाकर, Batwara 1947 एक इमोशनल, दमदार और संदेश देने वाली फिल्म है, जिसमें Sunny Deol–Santoshi की जोड़ी एक बार फिर प्रभाव छोड़ती है।"
Batwara 1947 में सनी देओल की आंखों ने दिखाया कमाल
X यूज़र @iSwetaChowdhury ने सनी देओल की फिल्म ‘बटवारा 1947’ पर अपनी राय साझा करते हुए लिखा: “मुझे उम्मीद नहीं थी कि बटवारा 1947 फिल्म खत्म होने के बाद भी मेरे साथ इतनी देर तक रहेगी। मैं सनी देओल के हमेशा की तरह दमदार पावरफुल सीन्स की उम्मीद लेकर गई थी, लेकिन फिल्म के खत्म होने के बाद भी जिन शांत और भावुक दृश्यों के बारे में मैं सोच रही हूँ, वे ज्यादा याद रह गए। सिकंदर का धीरे-धीरे माई को अपनी मां के रूप में स्वीकार करना बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है। उस हिस्से में सनी की आंखें ही बहुत कुछ कह देती हैं।”
Batwara 1947 Box Office Collection: सनी देओल की फिल्म ने पहले दिन सुबह 11 बजे तक कमाये 0.43 करोड़
ट्रेड साइट सैकनिल्क के अनुसार, पहले दिन सुबह 11 बजे तक सनी देओल की फ़िल्म 'बंटवारा 1947' के 2,462 शो चल रहे हैं और इसने भारत में 0.43 करोड़ रुपये (नेट) की कमाई की है। फ़िल्म का भारत में ग्रॉस कलेक्शन अभी 0.51 करोड़ रुपये है।
बंटवारा 1947 देखकर दर्शकों को याद आई गदर
राहुल गुप्ता के पारोडी अकाउंट पर एक पब्लिक रिएक्शन का वीडियो सामने आया। जिसमें दर्शक सिनेमाघरों से निकलते दिखाई दिए और साथ ही फिल्म को पैसा वसूल बता रहे हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा- Sunny Deol ने एक बार फिर बड़े पर्दे पर GADAR मचा दिया है। फिल्म को लेकर दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉंस देखने को मिल रहा है।अगर बड़े पर्दे पर दमदार एक्शन और सनी देओल का अंदाज पसंद है, तो बंटवारा 1947 को थिएटर में मिस मत करना।
वर्ड ऑफ माउथ से मिलेगी बंटवारा 1947 को रफ्तार
प्लेटफॉर्म एक्स पर फैंस ने बंटवारा 1947 की तारीफ में कहा- फिल्म की शुरुआत चाहे जैसी भी हो, अगर वह दर्शकों के दिल में जगह बना ले, तो उसका सफर रुकता नहीं है।
‘बंटवारा 1947’ को मिल रहे शुरुआती रिव्यू फिल्म को लेकर उम्मीदें बढ़ा रहे हैं। अब असली असर दर्शकों के बीच वर्ड ऑफ माउथ के जरिए देखने को मिलेगा।शुरुआती प्रतिक्रियाओं से संकेत मिल रहे हैं कि फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कहानी, कंटेंट और इमोशनल कनेक्ट हो सकता है। #batwara1947
प्रीति जिंटा ने बंटवारा 1947 का बताया दिलचस्प किस्सा
एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रीति जिंटा ने लिखा- रिलीज से एक दिन पहले, मैं उस पल को याद करना चाहती थी जहां से यह सफर शुरू हुआ था। यह तस्वीर लुक टेस्ट के दौरान की है, जब मैंने पहली बार हमीदा के किरदार की झलक देखी और उसे महसूस किया था।मेरे लिए हमीदा को रूमी के इन मशहूर शब्दों से खूबसूरती से बयां किया जा सकता है। “अगर आपके आसपास सब कुछ अंधकारमय नजर आए, तो एक बार फिर देखिए, हो सकता है कि रोशनी आप ही हों।”
दीया मिर्जा ने की शबाना आजमी समेत सभी कलाकारों की तारीफ
‘बंटवारा 1947’ की रिलीज़ से पहले दिया मिर्जा ने दिग्गज अभिनेत्री शबाना आज़मी की तारीफ की। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए शबाना आजमी को अपना हीरो बताते हुए कहा कि उनसे उन्होंने कहानी और किरदार के पीछे छिपे ‘क्यों’ को समझने की अहमियत सीखी है।दिया ने फिल्म देखने को लेकर अपनी एक्साइटमेंट भी जाहिर की। उन्होंने बताया कि ‘बंटवारा 1947’ में उनके कई पसंदीदा कलाकार नजर आ रहे हैं, जिनमें सनी देओल और प्रीति जिंटा भी शामिल हैं।
‘बंटवारा 1947’ की टिकटों की कीमत में फर्क
मुंबई में ‘बंटवारा 1947’ के टिकटों की कीमतें अलग-अलग सिनेमाघरों, सीट कैटेगरी और शो के समय के हिसाब से काफी अलग हैं। टिकट की कीमत करीब 100 रुपये से शुरू होकर 1,500 रुपये या उससे ज्यादा तक जा रही है। जहां सामान्य सीटें कम कीमत में मौजूद हैं, वहीं प्रीमियम सीटों, रिक्लाइनर्स और लग्जरी सिनेमाघरों में प्राइम-टाइम शो के टिकट काफी महंगे हैं।
‘बंटवारा 1947’ के लिए बढ़ रही दिलचस्पी
‘बंटवारा 1947’ को लेकर दर्शकों के बीच दिलचस्पी देखने को मिल रही है। BookMyShow पर फिल्म को 1.41 लाख से ज्यादा लोगों ने ‘Interested’ मार्क किया है। 2 घंटे 25 मिनट लंबी इस फिल्म को ‘A’ सर्टिफिकेट मिला है और यह 14 अगस्त को हिंदी में रिलीज हुई है।
Batwara 1947 Review Live: दिल छू लेंगे अली फजल और शबाना आजमी के सीक्वेंस
फिल्म क्रिटिक सुभाष के. झा ने अपनी ‘बटवारा 1947’ की समीक्षा में अली फज़ल के किरदार की तारीफ की। उन्होंने लिखा कि अली फज़ल एक रहस्यमयी कवि और मददगार की भूमिका में नजर आते हैं, जो बेहद सौम्य और व्यंग्यात्मक अंदाज वाला किरदार है। लाहौर की एक धुंधली रोशनी वाली गली में शबाना आजमी के साथ उनका एक लंबा सीक्वेंस है, जहां वह उन्हें समझाते हैं कि दबाव में आकर शहर नहीं छोड़ना चाहिए। यह पल दर्शकों को भीतर तक झकझोर देता है।
सुभाष के. झा ने आगे कहा कि उन्हें फिल्म के ज्यादा समझदार किरदारों के बीच सांप्रदायिक दूरियों को खत्म करने की कोशिश पर और सार्थक बातचीत देखने की उम्मीद थी। उन्होंने फिल्म के क्लाइमेक्स को बेहद प्रेरणादायक बताया और कहा कि वह इतना प्रभावशाली है कि दिल को थाम लेने का मन करता है।
क्रिटिक के मुताबिक, ‘बटवारा 1947’ साल 2002 में आई ‘लज्जा’ के बाद राजकुमार संतोषी का सबसे बेहतरीन और प्रासंगिक काम है। उन्होंने कहा कि संतोषी और सनी देओल ने पहले भी शानदार काम किया है, लेकिन इस फिल्म की प्रासंगिकता और प्रभाव से उसकी तुलना नहीं की जा सकती। हालांकि, उन्होंने फिल्म के कुछ हिस्सों को असमान बताया और ए.आर. रहमान के भजन को सिनेमा में सुने गए सबसे खराब गीतों में से एक कहा। इसके बावजूद उन्होंने फिल्म को बेहद ईमानदार और मजबूत संदेश वाली फिल्म बताया।
फिल्म को लेकर शबाना आजमी ने की बात
शबाना आजमी ने हिंदी सिनेमा में मेलोड्रामा की जगह पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की एक खासियत यह है कि वह मेलोड्रामा को आसानी से अपने भीतर समाहित कर सकती है। उनके ये बयान ऐसे समय आए हैं जब ‘अवारापन 2’ और ‘बटवारा 1947’ अलग-अलग तरीकों से भावनाओं को पर्दे पर पेश कर रही हैं। जहां ‘अवारापन 2’ एक्शन-रोमांस की कहानी के जरिए भावनाओं को दिखाती है, वहीं ‘बटवारा 1947’ विभाजन के दौर की कहानी और इंसानियत जैसे विषयों पर केंद्रित है।
Batwara 1947 Review and Release LIVE Updates:‘आवारापन 2’ vs ‘बटवारा 1947’: कौन मारेगा स्वतंत्रता दिवस पर बॉक्स ऑफिस की बाजी?
सनी देओल की ‘बटवारा 1947’ और इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’ स्वतंत्रता दिवस वीकेंड पर बॉक्स ऑफिस पर आमने-सामने हैं। एडवांस बुकिंग में फिलहाल ‘आवारापन 2’ बढ़त बनाए हुए है, वहीं ‘बटवारा 1947’ को सनी देओल की जबरदस्त मास अपील और विभाजन की भावुक कहानी का फायदा मिलने की उम्मीद है। छुट्टियों के लंबे वीकेंड में दोनों फिल्मों के बीच दर्शकों को लेकर कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। अब ओपनिंग डे की कमाई और दर्शकों की प्रतिक्रिया तय करेगी कि बॉक्स ऑफिस की इस रेस में कौन आगे निकलता है।
‘आवारापन 2’ और ‘बटवारा 1947’ की तुलना करना सेब और संतरे को एक जैसा मानने जैसा है
क्रिएटर-राइटर अनिरुद्ध गुहा ने X पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया कि जब एक ही दिन दो फिल्में रिलीज होती हैं, तो ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म को दूसरी फिल्म से ‘बेहतर’ क्यों माना जाता है? उन्होंने कहा कि अगर यही दोनों फिल्में अलग-अलग शुक्रवार को रिलीज होतीं और समान कमाई करतीं, तो ऐसी तुलना नहीं होती। उन्होंने ‘आवारापन 2’ और ‘बटवारा 1947’ की तुलना को सेब और संतरे की तुलना जैसा बताया।
Batwara Movie Release Updates LIVE: ‘आवारापन 2’ और ‘बटवारा 1947’ में निभाए अलग-अलग किरदारों बोलीं शबाना आजमी
दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी इस स्वतंत्रता दिवस वीकेंड पर दो बिल्कुल अलग फिल्मों ‘आवारापन 2’ और ‘बटवारा 1947’ में नजर आने वाली हैं। ‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि आखिर उन्हें इन दोनों फिल्मों की ओर क्या खींचकर लाया। शबाना के मुताबिक, इन प्रोजेक्ट्स को चुनने की सबसे बड़ी वजह उनके किरदारों में मौजूद विविधता थी।
अभिनेत्री ने कहा कि वह खुशकिस्मत हैं कि उन्हें पिछले कुछ वर्षों में फिल्मों, थिएटर और इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाने का मौका मिला। उन्होंने यह भी कहा कि अभिनय आज भी उन्हें सबसे ज्यादा संतुष्टि देता है।
Batwara 1947 Review LIVE Updates: फिल्म की रिलीज को होगा 14 और 15 अगस्त का फायदा
14 अगस्त को रिलीज हो रही ‘Batwara 1947’ की टाइमिंग को लेकर चर्चा तेज है। फिल्म की रिलीज से एक दिन बाद 15 अगस्त को देश स्वतंत्रता दिवस मनाएगा, जबकि 14 अगस्त को भारत में Partition Horrors Remembrance Day के रूप में विभाजन की त्रासदी और उससे जुड़े विस्थापन व बलिदानों को याद किया जाता है।
फिल्म की इसी टाइमिंग को लेकर X पर @MovieReview_Hub ने पोस्ट किया कि Batwara 1947 का 14 अगस्त को सिनेमाघरों में पहुंचना इसे और खास बनाता है। पोस्ट में फिल्म को असगर वजाहत के चर्चित नाटक ‘जिस लाहौर नइ देख्या, ओ जम्या नइ’ पर आधारित बताया गया है। कहानी विभाजन के बाद लाहौर पहुंचे एक मुस्लिम परिवार और अपनी हवेली में रह रही बुजुर्ग हिंदू महिला के जरिए इंसानियत, विस्थापन और सांप्रदायिक सौहार्द की बात करती है।
पोस्ट में लिखा गया, “14 अगस्त को विभाजन के दर्द और बलिदानों को याद करें और 15 अगस्त को उससे निकले भारत की आजादी का जश्न मनाएं।” यही वजह है कि फिल्म की रिलीज डेट महज एक तारीख नहीं, बल्कि उसकी कहानी और विषय के संदर्भ में भी बेहद प्रतीकात्मक नजर आ रही है।
Batwara Movie Release Updates LIVE: ‘बटवारा 1947’ की एडवांस बुकिंग ने पार किया 1 करोड़ रुपये का आंकड़ा
सनी देओल और प्रीति जिंटा स्टारर ‘बटवारा 1947’ ने सिनेमाघरों में रिलीज से पहले एडवांस बुकिंग में अच्छी पकड़ बनाई है। Sacnilk के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म ने ओपनिंग डे के लिए 7,308 शोज में 37,758 टिकटें बेच ली हैं। इससे फिल्म ने ब्लॉक की गई सीटों को छोड़कर एडवांस बुकिंग से करीब 1.03 करोड़ रुपये की ग्रॉस कमाई कर ली है। वहीं, ब्लॉक की गई सीटों को शामिल करने पर फिल्म की कुल बुकिंग वैल्यू लगभग 3.04 करोड़ रुपये पहुंच गई है।
Batwara Movie Release Updates LIVE: उम्र 68, जोश 28 वाला, 'बटवारा 1947' एक्टर सनी देओल का देसी फिटनेस फॉर्मूला
बढ़ती उम्र के बाद भी बॉलीवुड एक्टर्स की फिटनेस में कोई कमी नहीं आती है। इस बात के उदाहरण में सलमान खान, शाहरुख खान, सनी देओल समेत कई स्टार्स के नाम शामिल हैं। इनकी फिटनेस का राज जानने के लिए फैंस काफी एक्साइटेड भी रहते हैं। एक्टर सनी देओल इन दिनों अपनी आगामी फिल्म बंटवारा 1947 के लिए काफी चर्चाओं में हैं।
सनी देओल ने आगे बताया कि उनका मकसद कभी भी बॉडी को बहुत ज्यादा बल्की बनाना या किसी और की तरह दिखना नहीं रहा। वह सिर्फ एक से दो घंटे एक्सरसाइज करके फिट और हेल्दी महसूस करना पसंद करते हैं और इसी के साथ अपने दिन की शुरुआत करते हैं।
उन्होंने यह भी मजाकिया अंदाज में बताया कि उन्होंने डाइटिंग करने की कोशिश की, लेकिन आखिरकार समोसे, देसी घी और परांठे से खुद को रोक नहीं पाए। सनी ने कहा कि जब वह अपने बच्चों को देखते हैं तो अक्सर उन्हें बताते हैं कि उनकी उम्र में वे भी खूब खाना खाते थे और खाने को लेकर कभी ज्यादा नहीं सोचा करते थे।
Batwara 1947 Movie Review Live:जख्मों पर मरहम की तरह है सनी देओल की फिल्म
फिल्म समीक्षक सुभाष के. झा ने सनी देओल स्टारर ‘बंटवारा 1947’ को पांच सितारों की शानदार रेटिंग दी है। उन्होंने फिल्म की इंसानियत और सांप्रदायिक सौहार्द के मजबूत संदेश के लिए इसकी जमकर तारीफ की।
अपने रिव्यू में उन्होंने लिखा कि नफरत के दौर में यह फिल्म ‘जख्मों पर मरहम’ का काम करती है। उनके मुताबिक, आज के समय में ऐसी फिल्में बेहद कम बनती हैं, जो लोगों से दूसरे समुदाय से नफरत न करने और दुश्मन को अपने भीतर तलाशने की बात कहती हैं।
सुभाष के. झा ने फिल्म की तुलना ‘गर्म हवा’ से भी की। उन्होंने शबाना आजमी के किरदार ‘माई’ की तारीफ करते हुए कहा कि वह जिद्दी, चंचल, उदार और समझदार हैं और अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लेती हैं। समीक्षक ने शबाना आजमी के इस प्रदर्शन को इतना प्रभावशाली बताया कि उनके लिए एक और राष्ट्रीय पुरस्कार की मांग तक कर दी।
Batwara 1947 Movie Review Live: एडवांस बुकिंग के मामले में 'आवारापन 2' से पीछे रह गई बंटवारा 1947
बीते 24 घंटे में ‘अवारापन 2’ की प्री सेल्स बुकिंग में 171.34 प्रतिशत की तेजी आई है और वहीं फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के लिए टिकटों की बिक्री में भी 155.19 प्रतिशत तेजी नजर आई लेकिन इसके बावजूद सनी देओल की फिल्म अवारापन 2 से काफी पीछे नजर आ रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...
Batwara 1947 Movie First Review: सनी देओल-अभिमन्यु सिंह की एक्टिंग ने जीता दिल
सनी देओल की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बंटवारा 1947’ 14 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। रिलीज से एक दिन पहले फिल्म की स्क्रीनिंग रखी गई, जिसमें आमिर खान, अली फजल और फिल्ममेकर रमेश तौरानी भी शामिल हुए। स्क्रीनिंग के बाद रमेश तौरानी ने फिल्म की जमकर तारीफ की और इसे बेहद संवेदनशील और इंसानियत से जुड़ी कहानी बताया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...
