फिल्म: आवारापन 2
कलाकार: इमरान हाशमी, दिशा पाटनी, शबाना आजमी, श्रिया सरन, पूरन गब्बी और सुविंदर विक्की
लेखक: विशेष भट्ट , बिलाल सिद्दीकी और नितिन कक्कड़
निर्देशक: नितिन कक्कड़
निर्माता: विशेष भट्ट और मुकेश भट्ट
रेटिंग: 2.5/5

साल 2007 में रिलीज हुई इमरान हाशमी स्टारर फिल्म ‘आवारापन’ बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई थी, लेकिन समय के साथ लोगों ने उसे देखा और पसंद किया, जिसके बाद वह कल्ट फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो गई थी। अब लगभग 19 साल बाद मेकर्स इसका दूसरा पार्ट ‘आवारापन 2’ लेकर आए, जो आज 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो गया। इसे लेकर दर्शकों के बीच भी काफी क्रेज था, सिर्फ इतना ही नहीं एडवांस बुकिंग के मामले में भी यह फिल्म काफी आगे निकल गई। ऐसे में अगर आप यह मूवी देखने का प्लान कर रहे हैं, तो उससे पहले रिव्यू यहां पढ़ लें।

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कमजोर है फिल्म की कहानी

फिल्म ‘आवारापन 2’ की कहानी शिवम पंडित (इमरान हाशमी) से शुरू होती है, जो आलिया (श्रिया सरन) की कब्र पर जाकर उसे याद करता है और उसकी पिछली सभी यादें ताजा हो जाती हैं। इसके बाद शिवम को उसी कब्रिस्तान में एक बच्ची मिलती है, जिसे वह अनाथालय में छोड़ आता है और उसका नाम भी आलिया रखता है। जैसे-जैसे बच्ची बड़ी होती है शिवम के साथ उसका लगाव बढ़ जाता है। फिर एक दिन एक कपल उस बच्ची को गोद ले लेता है। बाद में पता चलता है कि वो कपल एक ह्यूमन ट्रैफिकिंग रैकेट का हिस्सा थे, जो आलिया को बेचने के बाद मार दिए गए।

फिर इंटरपोल वाले से शिवम को इस बारे में पता चलता है और वह आलिया को बचाने के लिए बैंकॉक चला जाता है। वहां जाकर वह शिवम जोरावर (पूरन गब्बी) की गैंग का हिस्सा बनता है। जोरावर का गैंगवॉर नफीसा (शबाना आजमी) से चलता है। इन सबके बीच शिवम को जोरावर की बहन जारा (दिशा पाटनी) से प्यार हो जाता है। अब वह आलिया को ढूंढकर बचा पाएगा या नहीं बस पूरी कहानी इसी पर चलती है।

कैसा है सितारों का अभिनय

फिल्म में इमरान हाशमी ने ‘शिवम’ बनकर दमदार वापसी की है। एक तरह से देखा जाए तो पूरी फिल्म सिर्फ उन्हीं के कंधों पर थी। उनका स्टाइल, अभिनय काफी बेहतर था। लेकिन अगर दोनों पार्ट में इमरान की तुलना की जाए तो यह कहना गलत नहीं होगा कि पहले पार्ट में वह ज्यादा दमदार थे। दिशा पाटनी को देखकर लगा कि उन्हें एक बार फिर सिर्फ नाम के लिए कास्ट किया गया।

‘आवारापन 2’ में दिशा का स्पेस काफी कम है, लेकिन जितना है उतने में ही उन्होंने ठीक-ठाक काम किया है। शबाना आजमी भी फिल्म में विलेन का किरदार निभाते हुए नजर आई हैं। हालांकि, पूरी फिल्म में उनके 4 से 5 ही सीन हैं। फिल्म में जोरावर का किरदार पूरन गब्बी ने निभाया है। वह एक ऐसे विलेन बने हैं, जिनसे न तो डर लगता है और न ही वह विलेन की तरह लगते हैं।

कहां रह गई कमी और कैसा है निर्देशन

सबसे पहले बात की जाए निर्देशन की तो फिल्म बस पूरी तरह से इसके पहले पार्ट की याद दिलाती है। ऐसा लगता है कि नितिन ने मूवी में कुछ भी नया करने और दिखाने की कोशिश नहीं की। कहानी की बात करें, तो वह भी इस बार काफी कमजोर पड़ गई।

चाइल्ड ट्रैफिकिंग, कौन-से सीन के बाद क्या होने वाला है बहुत जगह इस बात का अंदाजा दर्शक खुद लगा लेंगे। कुल मिलाकर कहा जाए, तो इसमें न सस्पेंस है और न ही बेहतरीन क्लाइमैक्स। बस पुराने गानों के साथ फिल्म को बांध कर रखने की एक बेहतरीन कोशिश की गई है।

‘आवारापन 2’ देखें या नहीं

फिल्म को बस सीक्वल के नाम पर दर्शकों तक परोसने की कोशिश की गई है। इमरान हाशमी ‘शिवम पंडित’ बनकर भले ही दर्शकों का दिल जीत लें, लेकिन इसके अलावा कहानी में कोई दम नहीं है। अगर आप सीक्वल और इमरान के नाम पर फिल्म देखना चाहते हैं, तो जरूर देख सकते हैं।

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