असम CM को PM मैटेरियल माना जाए या बर्खास्त किया जाए? हिंसा पर बोले पुण्य प्रसून बाजपेयी, फोटोग्राफर पर फूटा फिल्ममेकर का गुस्सा

असम में पुलिस और आम नागरिकों की हिंसक झड़प में दो ग्रामीणों के मारे जाने की खबर है। इस घटना को लेकर कई लोग बीजेपी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।

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मृत ग्रामीण के ऊपर कूदता फोटोग्राफर (Photo-Social Media/File)

असम के दरांग जिले में आम नागरिकों और पुलिस के बीच गुरुवार को हुई हिंसक झड़प में दो ग्रामीणों की मौत हो गई। हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने सत्ता में आने के बाद दरांग जिले में अवैध कब्जा हटाने का निर्देश जारी किया था। मुसलमान बहुल इस इलाके में 800 परिवारों को बेदखल किया गया था जो पुनर्वास की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस और ग्रामीणों की हिंसक झड़प सामने आई है। असम की इस घटना को लेकर कई लोग बीजेपी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, ‘असम सीएम को पीएम मैटेरियल माना जाए या बर्खास्त किया जाए।’ असम की हिंसक झड़प से जुड़ा एक वीडियो भी काफी वायरल हो रहा है जिसमें पुलिस की गोली से ढेर एक प्रदर्शनकारी की छाती पर फोटोग्राफर कई बार कूदता दिखाई दिया है। वो मृत ग्रामीण की छाती पर लात घुसे भी बरसाता दिख रहा है। इस वायरल वीडियो पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।

द हिंदू की नेशनल एडिटर सुहासिनी हैदर ने ट्वीट किया, ‘कुछ राज्यों में पुलिस की बर्बरता अब चौंकाने वाली नहीं लगती है, लेकिन आधिकारिक फोटोग्राफर द्वारा की गई इस अमानवीयता को देखकर लगता है कि राज्य प्रायोजित बीमारी अब फैल रही है।’

वायरल वीडियो पर बॉलीवुड फिल्ममेकर विनोद कापड़ी ने भी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘रोज शाम 5 बजे से आपके घर आ रहे तक़रीबन हर टीवी पर ऐसे ही नरपिशाचों के वो शो शुरू होते हैं जो इस देश को हिंसक भीड़ में तब्दील कर रहे हैं।’ कवि कुमार विश्वास ने ट्वीट किया है, ‘किसी के शव पर, पत्रकारिता (तथाकथित) पहली बार नहीं कूदी है। कूदती ही रहती है, पर अपने-अपने आकाओं व दलों की रौशनी में चुंधियाई, अपनी स्वार्थ-भरी आंखों से अक्सर हमें दिखती नहीं है। अपनी बंधक-नज़रों को तटस्थ-दृष्टि बनाइए, इससे पहले की यह सारा अंधा-मौसम धूल-धूल होकर बदरंग हो जाए।’

रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने ट्वीट किया, ‘क्रूरता का नंगा नाच। उफ्फ, मानव बुद्धि का ये संकुचन।’ कांग्रेस नेता श्रीनिवास बी वी ने ट्वीट किया, ‘इसे गिरफ्तार नहीं किया गया है। ये हर व्हाट्सएप ग्रुप पर है, हर प्राइम टाइम डिबेट पर यही हाल है, हर चुनावी रैली में है ये। इसका नाम नफरत है जिसका जन्म 2014 में हुआ था।’

बहरहाल, फोटोग्राफर की पहचान कर ली गई है। उसका नाम बिजॉय बनिया बताया जा रहा है। जिला प्रशासन ने उसे अवैध कब्ज़ा हटाने के अभियान में दस्तावेजीकरण के लिए रखा था। DGP भास्करज्योति महंत ने बताया है कि फोटोग्राफर को गिरफ्तार कर लिया गया है और अब यह केस CID को सौंप दी गई है।

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