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पटाखों को लेकर अशोक पंडित ने राजदीप सरदेसाई पर साधा निशाना, बोले, ‘देशभर में खुशियां मन रही हैं, तथाकथित पत्रकार शोक मना रहे हैं’

जब चारों तरफ देश भर में खुशियां मनायी जा रही हैं तो यह तथाकथित पत्रकार शोक मना रहे हैं! वैसे अर्बन नक्सलियों का यही चरित्र है। भारत में खुशी इनको बर्दाश्त नहीं होती!

ashoke pandit, rajdeep sardesai, diwali crackersराजदीप सरदेसाई पर अशोक पंडित ने साधा निशाना।

Rajdeep Sardesai: दीपावली पर पटाखों और प्रदूषण को लेकर राजनीति जारी है। बॉलीवुड डायरेक्टर अशोक पंडित ने पत्रकार राजदीप सरदेसाई पर निशाना साधते हुए कहा है,’जब चारों तरफ देश भर में खुशियां मनायी जा रही हैं तो यह तथाकथित पत्रकार शोक मना रहे हैं! वैसे अर्बन नक्सलियों का यही चरित्र है! भारत में खुशी इनको बर्दाश्त नहीं होती! इनकी जिंदगी मां बेटे की गुलामी कर कर के बीत गयी है! अरे राजदीप जी ज़िंदगी में ख़ुश रेहना भी सीखो!’

दरअसल पत्रकार राजदीप ने रात पटाखों पर ट्वीट करते हुए लिखा था, ‘लगभग रात के 12:34 हो रहे हैं, अभी भी पटाखों की आवाज आ रही है। पटाखे बैन का क्या हुआ? जब नागरिक अपनी जिम्मेदारी की भावना खो दें, जब कानून पूरी शक्ति से अपना काम ना करे, तब हमारे पास खुद को दोष देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।’

राजदीप पर अशोक के इस ट्वीट पर यूजर्स की तरह-तरह की प्रतिक्रिया भी सामने आ रही हैं। दिनेश शर्मा नाम के एक यूजर ने लिखा है, ‘इसमें इनका दोष कतई नहीं है अशोक पंडित पहले ऐसे रागदरबारी पत्रकारों के लिए 10 जनपथ से भर भर कर महंगे कीमती तोहफे आते थे, लेकिन जैसे ही मोदी सरकार सत्ता में आई इनके बुरे दिन शुरू हो गए। इनको दलाली मिलनी बंद हो गई, गुस्सा आना लाज़मी है बस इतनी-सी बात है।’

चितरंजन नाम के एक यूजर ने लिखा है, ‘अशोक जी, ये खुश होते हैं जब एंटी-नेशनल काम करते हैं या फिर जब एंटी-नेशनल लोगों के प्रोपेगेंडा के कारण हिन्दुस्तान का नाम बदनाम होता है।’ श्रीकांत शुक्ला नाम के एक यूजर ने लिखा है,’जिनकी गुलामी ही फितरत है, उनकी अपनी खुद की सोच हो ही नहीं सकती। वो तो उतना ही सोचेंगे, जिसमें मालकिन खुश रहे और उनके नंबर 1 का गुलाम का दर्जा बना रहे।’

चांदनी शाह नाम की एक यूजर ने राजदीप सरदेसाई के लिए लिखा है, मैं व्यक्तिगत तौर पर पटाखे नहीं पटकाती। यह मेरी व्यक्तिगत पसंद है। पर मुझे वास्तव में यह समझ नहीं आता कि आप इतने पाखंडी कैसे हो सकते हैं? कभी ईद पर पशुओं की कुर्बानी पर पूछा? कभी लोगों से पशुओं को खाना बंद करने के बारे में पूछा क्योंकि आपकी बायो-डायवर्सिटी बेहद असंतुलित है और यह जलवायु परिवर्तन का एक कारण है।’

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