बिजनेसमैन अशनीर ग्रोवर की पत्नी माधुरी जैन ग्रोवर इन दिनों अपने एक बयान को लेकर सोशल मीडिया पर विवादों में घिर गई हैं। रियलिटी शो ‘लॉक अप 2’ में उन्होंने परिवार, बच्चों और आर्थिक स्थिति को लेकर ऐसी बात कही, जिसने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी।

हालिया एपिसोड में एलिमिनेशन से बचने के लिए माधुरी ने अपनी निजी जिंदगी का एक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि वह और अशनीर ग्रोवर तीसरे बच्चे की प्लानिंग कर चुके थे, लेकिन परिवार के विरोध और सही समय न होने की वजह से यह फैसला आगे नहीं बढ़ सका।

गरीबों पर टिप्पणी कर फंसीं माधुरी ग्रोवर

इसके बाद माधुरी ने कहा, “तीसरा बच्चा आपको जवान बनाए रखता है। शाहरुख खान समेत कई अमीर लोगों के तीन बच्चे हैं। ‘हम दो, हमारे दो’ का नियम हर किसी पर लागू नहीं होता। जितने ज्यादा अमीर लोग बच्चे पैदा करेंगे, उतनी अमीरी बढ़ेगी और गरीब ज्यादा बच्चे पैदा करेंगे तो गरीबी बढ़ेगी।”

उनका यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कुछ लोगों ने इसे आर्थिक सोच से जोड़कर देखा, जबकि कई यूजर्स ने इसे वर्गभेदी और संवेदनहीन टिप्पणी बताया।

एक यूजर ने लिखा, “लगता है उन्हें देश में आय की असमानता और बुनियादी अर्थशास्त्र की समझ नहीं है।” एक अन्य ने कहा, “उनकी बात में कुछ हद तक सच्चाई हो सकती है, लेकिन सिर्फ अमीर होने के आधार पर यह कहना कि आपको तीसरा बच्चा पैदा करने का अधिकार है, सार्वजनिक मंच पर कहना बिल्कुल उचित नहीं है।”

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कुछ लोगों ने तो उनके बयान को ‘यूजेनिक्स’ जैसी विचारधारा से भी जोड़ दिया। एक वायरल पोस्ट में लिखा गया, “अगर यही पैमाना सही है, तो उनसे ज्यादा अमीर लोग भी मौजूद हैं। फिर क्या उसी तर्क से उन्हें भी तय करना चाहिए कि कौन बच्चे पैदा करे और कौन नहीं?”

हालांकि, माधुरी के समर्थन में भी कई लोग सामने आए। उनका कहना था कि माता-पिता बनने से पहले आर्थिक रूप से सक्षम होना जरूरी है। एक यूजर ने लिखा, “अगर आप बच्चे की जिम्मेदारी नहीं उठा सकते, तो उसे इस दुनिया में लाना सही फैसला नहीं है।”

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वहीं, कुछ लोगों ने उनके तर्क की आर्थिक बुनियाद पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा, “‘अमीरी बढ़ेगी’ वाले तर्क का समर्थन करने वालों को यह भी बताना चाहिए कि आखिर पूंजी (कैपिटल) अपने आप कैसे बढ़ेगी।”

माधुरी जैन ग्रोवर का यह बयान अब सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग इसे व्यावहारिक सोच मान रहे हैं, जबकि कई इसे सामाजिक और आर्थिक असमानता को बढ़ावा देने वाली मानसिकता बता रहे हैं।