दिग्गज गायिका आशा भोसले का रविवार, 12 अप्रैल को 92 वर्ष की उम्र में मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। आशा भोसले ने अपने आठ दशक से भी लंबे करियर में लगभग 20 भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए। उनकी आवाज का जादू ऐसा था कि उनके पुराने गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं, जितने अपने समय में हुआ करते थे।

इन्हीं सदाबहार गीतों में से एक है 1971 में आई फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ का ‘दम मारो दम’। यह आज भी लोगों के बीच पसंद किया जाता है और यह लगभग हर पीढ़ी को झूमने पर मजबूर कर देता है। यह गीत अभिनेत्री जीनत अमान पर फिल्माया गया था, जिसमें उनका किरदार चिलम पीते हुए दिखाया गया। इस गाने को बढ़ते हुए ‘हिप्पी कल्चर’ के बैकग्राउंड में फिल्माया गया था, क्योंकि यह दिखाता था कि नशीले पदार्थों का बढ़ता इस्तेमाल पूरी एक पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है।

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लेकिन जब यह गाना फिल्माया और रिकॉर्ड किया गया, तो ऐसा लगा कि यह उन सभी चीजों को ग्लैमराइज करता हुआ नजर आया, जिन्हें फिल्म बुरा दिखाने की कोशिश कर रही थी। नतीजतन, ‘दम मारो दम’ युवाओं के बीच एक तरह का एंथम बन गया। इसकी जबरदस्त लोकप्रियता के बावजूद, उस समय इसे काफी आलोचना का भी सामना करना पड़ा। यहां तक कि इसे कुछ समय के लिए ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर बैन भी कर दिया गया था। इस गीत को मशहूर संगीतकार आरडी बर्मन ने कंपोज किया था

लता मंगेशकर को ऑफर हुआ था गाना

जहां आज ‘दम मारो दम’ को आशा भोसले की आवाज के बिना कल्पना करना लगभग नामुमकिन है। वहीं शुरुआत में इस गाने को एक डुएट के रूप में सोचा गया था। इसे लता मंगेशकर और उषा उथुप की आवाज में रिकॉर्ड करने की योजना थी। इसे जीनत अमान और मुमताज पर फिल्माया जाना था, जो उस फिल्म में अहम भूमिकाओं में थीं।

लेकिन किसी अज्ञात कारण से लता मंगेशकर इस गाने से अलग हो गईं। इसके बाद यह तय किया गया कि आशा भोसले अपनी बड़ी बहन की जगह लेंगी और उषा उथुप के साथ इस गाने को रिकॉर्ड करेंगी। हालांकि, लास्ट में यह गाना पूरी तरह से आशा भोसले का बनकर उभरा। उषा उथुप को गाने के कुछ इंग्लिश हिस्से रिकॉर्ड करने के लिए शामिल किया गया, जो बाद में काफी लोकप्रिय भी हुए।

जब देव आनंद फिल्म से हटाना चाहते थे गाना

फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ के निर्माता-निर्देशक देव आनंद इस गाने के रिकॉर्ड होने के बाद भी दुविधा में थे। उन्हें अंदेशा था कि इसे लेकर विवाद हो सकता है। रिकॉर्डिंग के दौरान भी उन्होंने एसडी बर्मन के साथ अपनी इस झिझक को बताया था। विवाद की आशंका को कम करने के लिए देव आनंद ने इस गाने को फिल्म से हटाने का मन भी बना लिया था।

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लेकिन जब आशा भोसले को यह बात पता चली, तो उन्होंने खुद देव आनंद को मनाने का फैसला किया। एक 2020 में ‘द हिंदू’ को दिए इंटरव्यू में आशा ने बताया, “मैं बहुत परेशान हो गई थी और सीधे देव साहब के घर पहुंच गई। मैंने उनसे कहा कि यह एक बेहतरीन गाना है और इसे किसी भी हालत में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कुछ देर सोचा और फिर कहा-अगर तुम ऐसा कह रही हो, तो मैं इसे रखूंगा।” आखिरकार, यह फैसला सही साबित हुआ और यह गाना आज हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार गीतों में गिना जाता है।

AIR पर बैन, रेडियो सीलोन पर ‘सरताज गीत’

‘दम मारो दम’ अपने रिलीज के साथ ही विवादों में घिर गया था। इस गाने को ऑल इंडिया रेडियो पर बैन कर दिया गया, लेकिन Radio Ceylon पर इसे खुलकर बजाया गया। वहीं के मशहूर कार्यक्रम Binaca Geetmala में यह गाना लगातार महीनों तक नंबर 1 पर बना रहा। 12 हफ्तों तक शीर्ष स्थान पर रहने के कारण इसे ‘सरताज गीत’ का खिताब भी मिला।

इतना ही नहीं, दूरदर्शन पर भी इस गाने को लंबे समय तक बैन रखा गया। जब भी फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ टीवी पर दिखाई जाती थी, तो इस गाने को काट दिया जाता था। एक इंटरव्यू में आशा भोसले ने उस दौर को याद करते हुए कहा था कि उन्हें इस गाने के लिए काफी आलोचना झेलनी पड़ी। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस गाने को रेडियो पर बजाने से रोक दिया था और टीवी पर भी इसे दिखाने की अनुमति नहीं थी।

हालांकि, उस समय जितना विरोध इस गाने को झेलना पड़ा, समय के साथ इसकी लोकप्रियता और भी बढ़ती गई। आज ‘दम मारो दम’ को आशा भोसले के सबसे यादगार और आइकॉनिक गीतों में गिना जाता है।

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