आशा भोसले ने अपने आठ दशकों से ज्यादा के करियर में 12,000 से ज्यादा गीत गाए। उनके इस विशाल संगीत सफर में कई ऐसे यादगार गाने शामिल हैं, जिन्हें आरडी बर्मन ‘पंचम दा’ के नाम से मशहूर ने संगीतबद्ध किया था। आशा भोसले और पंचम की पहली मुलाकात काम के दौरान हुई थी।
उस समय दोनों ही कहीं और शादीशुदा थे, लेकिन धीरे-धीरे उनके बीच बढ़ती नजदीकियां एक खास रिश्ते में बदल गईं। आखिरकार, दोनों ने 1980 में शादी कर ली। आशा और पंचम का यह साथ 1994 तक रहा, जब पंचम दा का निधन हो गया।
जब आशा भोसले ने बताई थी अपनी कहानी
1993 में रिकॉर्ड की गई एक पुरानी बातचीत में, जिसमें आशा और पंचम दोनों मौजूद थे, उन्होंने अपनी प्रेम कहानी के बारे में खुलकर बात की थी। आशा तीन बच्चों की मां थीं और अपनी पहली शादी में दुर्व्यवहार का सामना करने के बाद अपने पहले पति से अलग हो गई थीं। आरडी की भी पहली शादी असफल रही थी। आशा के लिए, यह एक ऐसा रिश्ता था जो इसलिए बना क्योंकि वे दोनों समझदार थे और एक-दूसरे को समझते थे।
आशा ने न्यूस्ट्रैक के लिए मृत्युंजय कुमार झा को बताया था, “हमारी शादी… हम 20-22 साल के नहीं थे। हम दोनों समझदार थे। हमारा रिश्ता हमारे संगीत की वजह से बना और धीरे-धीरे शादी में बदल गया। वह जानते हैं कि मैं कैसी हूं और मैं जानती हूं कि वह कैसे हैं। सुर का नाता है हमारा।”
आशा भोसले को फूल भेजते थे आरडी बर्मन
जब उनसे पूछा गया कि उन्हें एक-दूसरे से प्यार कैसे हुआ, तो आरडी ने बताया कि वह लगभग हर दिन बिना नाम बताए आशा को फूल भेजते थे। ऐसा तब भी था जब वे रिकॉर्डिंग के लिए लगभग हर दूसरे दिन एक-दूसरे से मिलते थे। एक दिन आशा को फूल तब मिले जब वह उनके साथ ही थीं और तभी उन्हें पंचम की भावनाओं के बारे में पता चला।
पंचम ने याद करते हुए कहा, “मैं बिना नाम बताए फूल भेजता था। एक बार हम रिकॉर्डिंग कर रहे थे। मैं, आशा और मजरूह सुल्तानपुरी (गीतकार) वहां थे। तभी फूलवाला गुलदस्ता देकर गया और आशा ने उसे फेंक दिया। आशा ने कहा कि ये रोज-रोज कौन भेजता है?’ मैं चुप रहा। तब मजरूह साहब ने उनसे कहा कि यही है वह कसूरवार।” फिर बातचीत में आशा ने आगे बताया कि वह मेरे पीछे पड़े रहते थे। आशा, तुम कितना अच्छा गाती हो। मुझे तुम्हारी आवाज बहुत पसंद है। आखिर मैं क्या करती? मैंने हां कह दिया।”
आशा के साथ आरडी के आखिरी पल
आरडी बर्मन के साथ अपने आखिरी पलों को याद करते हुए आशा ने एक बार बताया था, “वह मेरा नाम लेने की कोशिश भी कर रहे थे, ‘आ..आ..’, लेकिन शब्द पूरा नहीं कर पाए।” बता दें कि आरडी बर्मन का 1994 में 54 साल की उम्र में निधन हो गया। दोनों की कोई संतान नहीं थी। वहीं, आशा ने लास्ट में उनके कमरे में जाने से भी मना कर दिया था। आशा भोसले ने कहा, “मैं उस कमरे में नहीं जाऊंगी। मैं उन्हें मृत नहीं देख सकती। मैं उन्हें जीवित देखना चाहती हूं।”
