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‘तुम बीमार हो, कितनी डार्कनेस है तुम्हारे अंदर…’, कैसे बदली Anurag Kashyap की जिंदगी, बताया पूरा किस्सा

Anurag Kashyap: गैंग्स ऑफ वासेपुर, घोस्ट स्टोरीज, अग्ली, बॉम्बे वेल्वेट, देवडी और ब्लैक फ्राइडे जैसी फिल्मों का निर्माण करने वाले अनुराग कश्यप बताते हैं ..

Author Updated: March 19, 2020 1:27 PM
बॉलीवुड एक्टर-डायरेक्टर अनुराग कश्यप

Anurag Kashyap: अनुराग कश्यप खास तरह की फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं। गैंग्स ऑफ वासेपुर, घोस्ट स्टोरीज, अग्ली, बॉम्बे वेल्वेट, देवडी और ब्लैक फ्राइडे जैसी फिल्मों का निर्माण करने वाले अनुराग कश्यप बताते हैं कि एक बार उनके टीचर ने उन्हें कहा था कि उनके अंदर बहुत डार्कनेस है। वह बीमार हैं। इसकी वजह थी कि टीचर ने अनुराग की एक लिखी कहानी पढ़ ली थी। ऐसे में अनुराग की कहानियां स्कूल में कभी भी छपा नहीं करती थीं।

नीलेश मिश्रा के चैट शो में अनुराग कश्यप कहते हैं- ‘मैं जब स्कूल में था तो मैं कहानियां लिखता था। तब मेरे मास्टर पंडित आत्मराम जी बोलते थे कितनी डार्कनेस है तुम्हारे अंदर, तुम बीमार हो। क्योंकि मैं कहानी ही ऐसी लिखता था। मेरी कहानियां कभी नहीं छपती थीं स्कूल में। ‘

ये थी अनुराग कश्यप की वह कहानी…

अनुराग बताते हैं-‘मैंने एक कहानी लिखी थी ‘अपेक्षित’। कहानी में एक लड़का था जो रोज इमली के पेड़ के नीचे खड़े होकर रोज इमली तोड़ने की कोशिश करता था, लेकिन उसका निशाना चूकता भी नहीं था, बस थोड़ा दूर रहता था। तो लोग उसपर हंसते थे। एक बार वह पत्थर एक लड़के को जा लगता है जो उस पत्थर मारने वाले लड़के को बुली करता था। बात में पता चलता है कि भाई वो लड़का तो प्रैक्टिस कर रहा था कि कैसे पत्थर मारे और लोगों को लगे कि इमली तोड़ रहा है। ये  मैंने सिंधिया स्कूल में लिखी थी।’

अनुराग ने आगे बताया- ‘जब इस कहानी को टीचर ने पढ़ा तो कहा कि तुम्हारे अंदर कितनी डार्कनेस है। ये कहानियां कभी नहीं छपीं।’ अनुराग बताते हैं कि -‘मुझे कहा जाता था कि तुम्हारी कहानियां जेन्युअन नहीं हैं, तुमने कहीं से उठाई हैं। उस वक्त मुझे जेन्युअन का मतलब नहीं पता था। मैंने डिक्शनरी में ढूंढा तो मुझे बड़ा बुरा लगा था।  फिर जब मैंने वर्ल्ड सिनेमा देखा 93 में तब मुझे लगा अरे सब ऐसे ही कहते रहते हैं, जैसे मैं सोचता हूं वैसी फिल्में तो बनती हैं दुनिया भर में, मैं जा रहा हूं फिल्में बनाने।’

अनुराग कश्यप बताते हैं कि जब वह स्कूल में पढ़ते थे तो उन्हें लड़के अकसर परेशान किया करते थे। उनके साथ गाली गलौच की जाती थी। अनुराग ये भी बताते हैं कि जब वो थोड़े बड़े हुए तो वह भी दूसरों के साथ ऐसा ही करने लगे। लेकिन एक बार एक लड़के के पेरेंट्स ने जब अनुराग की खबर ली तो वह सुधर गए। उसके बाद उन्होंने किसी लड़के को परेशान नहीं किया अनुराग कहते हैं कि ‘उन पेरेंट्स की वजह से मैं खराब होने से बच गया।’

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