सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का बुधवार को 18वां दिन और जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन का 25वां दिन हो चुका है। वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ रही है और उनकी हड़ताल को लेकर बॉलीवुड के कई सितारों ने चिंता जताई है।

जीनत अमान, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, स्वरा भास्कर और ओमी वैद्य के बाद अब फिल्ममेकर अनुराग कश्यप भी उनके समर्थन में आगे आए हैं। उन्होंने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।

अनुराग कश्यप ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर सरकार से किए सवाल

अनुराग कश्यप ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, “एक समय था जब भूख हड़ताल का मतलब होता था। कोई भी यूं ही भूख हड़ताल पर नहीं बैठता। यह बेहद परेशान करने वाली बात है कि सिस्टम लोगों की जिंदगी के प्रति इतना संवेदनहीन हो गया है। केवल वही व्यक्ति ऐसा कदम उठा सकता है जो सच, न्याय और इंसानियत पर विश्वास करता हो। मुझमें सोनम वांगचुक जैसा साहस नहीं है, लेकिन सत्ता में बैठे लोगों की चुप्पी इतनी तेज सुनाई दे रही है कि वह उनकी दोषी मानसिकता और अमानवीय सोच का सबूत लगती है। मैं इस बहादुर इंसान के साथ खड़ा हूं।”

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इसके बाद अनुराग ने एक और इंस्टाग्राम स्टोरी साझा करते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा, “बहरे भी इतने बहरे नहीं होते, और अंधे भी इतने अंधे नहीं होते। जानवर और राक्षसों के दिल भी इतने पत्थर नहीं होते। ये उनसे भी बदतर आदमखोर हैं। चुप रहने में शर्म आने लगी है।” उन्होंने एक पोस्ट में लिखा है, “अब हद हो गई।”

बीते कुछ दिनों में कई फिल्मी हस्तियों ने सोनम वांगचुक के आंदोलन का समर्थन किया है। शबाना आजमी ने इंस्टाग्राम पर वांगचुक की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “प्रिय सोनम वांगचुक, हमारे देश को आपकी बहुत जरूरत है। आप अन्याय के खिलाफ और सच के पक्ष में खड़े हैं। हमें आप पर गर्व है। लेकिन हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप अपनी भूख हड़ताल खत्म करें, क्योंकि छात्रों को आपके मार्गदर्शन की जरूरत है। यह लड़ाई लंबी है और इसके लिए आपका स्वस्थ रहना जरूरी है। हम सब आपके साथ हैं।”

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वहीं अभय देओल ने भी अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर वांगचुक की तस्वीर साझा करते हुए टूटे दिल वाला इमोजी लगाया। लेखक वरुण ग्रोवर ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लंबा पोस्ट लिखते हुए कहा कि शायद वांगचुक और CJP को उम्मीद थी कि सरकार या छात्र समुदाय उनकी आवाज सुनेगा। उन्होंने लिखा कि कई बार क्रांतियां जीतने के लिए नहीं, बल्कि यह दर्ज करने के लिए होती हैं कि सत्ता अहिंसक विरोध के प्रति कितनी हिंसक और असंवेदनशील हो सकती है।