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राष्ट्रगान: अनुपम खेर बोले- खड़े होने से पता चलती है कैसी है इंसान की परवरिश

विद्या ने उस वक्त कहा था कि हम अब किसी स्कूल के छोटे बच्चे नहीं है कि रोज पहले राष्ट्रगान गाना होगा और तभी दिन शुरू होगा।

Author नई दिल्ली | October 30, 2017 4:08 PM
अनुपम ने सवाल किया है कि लोग रेस्तरां में इंतजार कर सकते हैं, सिनेमाघरों में टिकट के लिए लंबी लाइनों में खड़े हो सकते हैं तो 52 सेकंड राष्ट्रगान के लिए खड़े होने में क्या दिक्कत है?

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का समर्थन किया जिसमें सिनेमाघरों में फिल्म शुरू करने से पहले राष्ट्रगान बजाने की बात कही गई थी। अनुपम ने कहा- कुछ लोगों का मानना है कि राष्ट्रगान के समय खड़े होना अनिवार्य नहीं होना चाहिए, लेकिन मेरे लिए राष्ट्रगान के लिए खड़े होना उस व्यक्ति की परवरिश को दिखाता है। उन्होंने कहा- हम जिस तरह से अपने पिता या शिक्षक के सम्मान में खड़े होते हैं, ठीक उसी तरह राष्ट्रगान के लिए खड़ा होना अपने देश के प्रति सम्मान को दर्शाता है। गौरतलब है कि हाल ही में सीबीएफसी की सदस्य विद्या बालन ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि ऐसा किया जाना गलत है।

विद्या ने उस वक्त कहा था कि हम अब किसी स्कूल के छोटे बच्चे नहीं है कि रोज पहले राष्ट्रगान गाना होगा और तभी दिन शुरू होगा। विद्या ने कहा था कि देशभक्ति की भावना को किसी पर थोपा नहीं जा सकता। सीबीएफसी (सेंट्रल बोर्ड फॉर फिल्म सर्टिफिकेशन) की सदस्य विद्या बालन ने कहा कि जब उन्हें इस बोर्ड से जुड़ने का मौका मिला तो उन्होंने सोचा कि उनके पास कुछ परिवर्तन लाने का मौका है।

जहां तक बात अनुपम खेर के बयान की है तो बता दें कि वह पुणे में दिवंगत बीजेपी नेता ‘प्रमोद महाजन मेमोरियल अवॉर्ड’ लेने के लिए पहुंचे हुए था जहां उन्होंने यह बयान दिया। अनुपम के अलावा तीन तलाक मामले में मूल याचिकाकर्ता शायरा बानो को भी इस इसी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अनुपम ने सवाल किया है कि लोग रेस्तरां में इंतजार कर सकते हैं, सिनेमाघरों में टिकट के लिए लंबी लाइनों में खड़े हो सकते हैं, या पार्टी के स्थलों पर खड़े हो सकते है, तो फिर वे सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के लिए महज 52 सेकंड तक खड़े क्यों नहीं हो सकते?

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