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आप धोखेबाज़ हो, मैं आपको श्राप देता हूं- फिल्म से निकाले जाने पर गुस्से में महेश भट्ट से बोले थे अनुपम खेर

महेश भट्ट ने अनुपम खेर को फिल्म सारांश से निकालकर संजीव कुमार को रोल दे दिया था। इससे अनुपम खेर बहुत नाराज़ हुए और गुस्से में उन्होंने महेश भट्ट के पास जाकर उन्हें श्राप दे दिया था।

mahesh bhatt, anupam kher, anupam kher first movieअनुपम खेर ने गुस्से में महेश भट्ट को श्राप दे दिया था (Photo-Indian Express/File)

बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर सर्वश्रेष्ठ चरित्र अभिनेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने महेश भट्ट की फिल्म सारांश से अपने करियर की शुरुआत की थी। फिल्म के वक्त वो 24 साल के थे लेकिन उन्होंने एक वृद्ध बाप का किरदार निभाया था जिसने उन्हें जबरदस्त पहचान भी दिलाई। अनुपम खेर को यह रोल बड़े ही मुश्किलों के बाद मिला था। उन्होंने इसके लिए 6 महीने पहले से ही अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। लेकिन इसके बाद उन्हें पता चला कि महेश भट्ट ने उन्हें फिल्म से निकालकर संजीव कुमार को वो रोल दे दिया। इससे अनुपम खेर बहुत नाराज़ हुए और गुस्से में उन्होंने महेश भट्ट के पास जाकर उन्हें श्राप दे दिया था।

अनुपम खेर ने इस घटना को ‘द लल्लनटॉप’ पर बताते हुए कहा था कि जब उन्होंने फिल्म से निकाले जाने की खबर सुनी तो उन्होंने मुंबई शहर छोड़ने का मन बना लिया। उन्होंने अपना सामान पैक किया और टैक्सी में निकल पड़े। लेकिन शहर छोड़ने से पहले वो महेश भट्ट से मिलने गए जहां गुस्से में उन्होंने महेश भट्ट को खूब बुरा- भला कहा।

उन्होंने बताया था, ‘मैं टैक्सी से स्टेशन की तरफ निकल रहा था लेकिन मैंने कहा कि नहीं मैं भट्ट साहब को जाकर बोल देता हूं कि मैं उनके बारे में क्या सोचता हूं। मैं उनके घर जाकर उन्हें खिड़की के पास ले गया। उन्हें टैक्सी दिखाते हुए कहा कि मैं ये शहर छोड़कर जा रहा हूं। आपसे बड़ा धोखेबाज, फ्रॉड कोई नहीं है। मैं रो भी रहा था।’

 

अनुपम खेर ने आगे कहा, ‘आप फिल्म सच्चाई पर बना रहे हो, आपकी जिंदगी में ही सच्चाई नहीं है। मैंने गुस्से में रोते हुए कहा कि मैं ब्राह्मण हूं, आपको श्राप देता हूं। ये देखकर भट्ट साहब शॉक हो गए थे। मैं जाने लगा तो भट्ट साहब ने मुझे रोका और कहा कि तुमने जो अभी किया वो कोई नहीं कर सकता, तुम ही फिल्म करोगे।’

 

अनुपम खेर ने फिल्म किया और यह फिल्म 25 मई 1984 को रिलीज हुई थी। इस फिल्म से अनुपम खेर के अभिनय को काफी पहचान मिली और उनका आगे का सफर आसान हो गया। अनुपम खेर का यहां तक पहुंचने का सफर भी आसान नहीं रहा था। जब वो मुंबई आए थे तब उनके पास 50 रुपए भी नहीं थे। वो एक छोटे से घर में रहते थे। लेकिन उन्होंने अपनी आर्थिक परिस्थितियों को राह का रोड़ा नहीं बनने दिया और आज वो सफल अभिनेताओं में गिने जाते हैं।

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