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ओडिशी नृत्य की एक शाम

कलासंधानी कल्चरल सोसायटी की ओर से राजधानी दिल्ली में हुए नृत्य कार्यक्रम में ओडिशी नृत्यांगना पोषाली मुखर्जी और मधुमिता सेन के सानिध्य में उनकी शिष्याओं ने नृत्य पेश किया।

कलासंधानी कल्चरल सोसायटी की ओर से राजधानी दिल्ली में हुए नृत्य कार्यक्रम में ओडिशी नृत्यांगना पोषाली मुखर्जी और मधुमिता सेन के सानिध्य में उनकी शिष्याओं ने नृत्य पेश किया। इस प्रस्तुति में गुरु केलुचरण महापात्र व पोषाली मुखर्जी की नृत्य रचनाएं शामिल की गर्इं। इस समारोह का आयोजन मुक्तधारा सभागार में हुआ।  प्रस्तुति का आरंभ मंगलाचरण शिव तांडव से हुआ। रावण रचित रचना पर आधारित इस नृत्य में शिव के रौद्र रूप का विवेचन पेश किया। इसे तानिया, मीतोस्मिता, कादंबरी, वाणी व अनुष्का ने प्रस्तुत किया। दूसरी पेशकश ‘ल’ अक्षर पर आधारित चंपू नृत्य था। कवि सूर्यदेव रथ की रचना ‘हे लीलानिधि’ पर आधारित थी। इस प्रस्तुति में कलाकारों में शामिल थे-अस्मिता सेन, आकांक्षा, ऋतिका, माधवी, साक्षी, मृदु और दिशा। अगली पेशकश शृंगार पल्लवी थी। पोषाली मुखर्जी की इस नृत्य रचना को संगीतबद्ध सोमंत दास ने किया। इसे साक्षी ओर स्मिता ने पेश किया।

कार्यक्रम में कवि जयदेव के गीत गोविंद की दो अष्टपदियों को नृत्य में पिरोया गया। पहली अष्टपदी ‘चंदन चर्चित नील कलेवर पीत वसन बनमाली’ में कृष्ण के सौंदर्य का सुंदर वर्णन है। यह गुरु केलुचरण महापात्र की नृत्य रचना व भुवनेश्वर मिश्र की संगीत रचना थी। इसमें अस्मिता, दलाय व मीनाक्षी ने शिरकत की। दूसरी अष्टपदी ‘ललित लवंग लता परिशीलं’ थी। इसमें मधुमिता सेन और पोशाली मुखर्जी ने बसंत ऋतु का सुंदर वर्णन पेश किया। प्रस्तुति का समापन मोक्ष नृत्य से हुआ। इसमें नृत्यांगना मधुमिता सेन, साक्षी, मीनाक्षी, ऋतिका, आकांक्षा और एश्वर्या ने शिरकत किया।

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