बॉलीवुड अभिनेत्री शबाना आजमी और एक्टर प्रकाश राज 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए कॉकरोच जनता पार्टी के ‘चलो संसद’ प्रोटेस्ट में शामिल हुए थे। दोनों के कई वीडियो भी सामने आए। इनके अलावा कई स्टार्स ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए छात्रों को अपना समर्थन दिया था। इन सबके अलावा एक और अभिनेता थे, जो जंतर-मंतर जाकर इस प्रोटेस्ट का हिस्सा बने और वो थे अमोल पाराशर। अब अमोल ने वहां से आने के बाद सोशल मीडिया पर अपना अनुभव शेयर किया है।
अमोल पाराशर ने शेयर किया पोस्ट
अभिनेता ने अपने सोशल मीडिया हैंडल इंस्टाग्राम पर कुछ फोटो, वीडियो और नोट शेयर किए हैं। इसमें अमोल ने लिखा, “मैं 20 जुलाई, 2026 को जंतर-मंतर पर था। यह ऐसा दिन था जिसे मैं कभी नहीं भूलूंगा।” इसके बाद पाराशर ने बताया कि उन्हें वहां जाने की जरूरत क्यों महसूस हुई, पुलिस की कार्रवाई से पहले और बाद में उन्होंने क्या देखा और इन घटनाओं ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर क्यों किया कि देश के युवाओं के साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है।
पाराशर ने आगे लिखा, “पिछले 3-4 दिनों से मेरे मन में एक बेचैनी थी जिसे मैं दूर नहीं कर पा रहा था। एक मिडिल क्लास भारतीय परिवार में पले-बढ़े होने के कारण, मैं शिक्षा की अहमियत और उसकी कीमत को अच्छी तरह समझता । मैं यह भी जानता हूं कि युवा टैलेंट को सपोर्ट करने वाला एक निष्पक्ष और काबिल सिस्टम देश और समाज के निर्माण के लिए कितना जरूरी है।”
आम नागरिक की तरह रहना चाहते थे अमोल
अमोल ने बताया कि प्रदर्शन से पहले छात्रों द्वारा भेजे गए प्यार, सम्मान और उम्मीद से भरे संदेश पढ़कर उनकी आंखों में कई बार आंसू आ गए। उन्होंने कहा कि वे वहां बिना किसी घोषणा के पहुंचे क्योंकि वे सिर्फ छात्रों के बीच एक आम नागरिक की तरह रहना चाहते थे। अमोल ने लिखा, “मैं सिर्फ इन युवाओं के साथ खड़ा होना चाहता था। मैं नहीं चाहता था कि लोग मुझे पहचानें, कोई मंच मिले, कैमरा हो या मैं कोई भाषण दूं। मैं नहीं चाहता था कि बात मेरे बारे में हो। मैं सिर्फ उन्हें सुनना चाहता था।”
हालांकि, मास्क, चश्मा और टोपी पहनने के बावजूद कुछ छात्रों ने उन्हें पहचान लिया, लेकिन सभी ने उनकी निजता का सम्मान किया। अभिनेता ने लिखा, “कुछ लोगों ने मुझे पहचान लिया, लेकिन उन्होंने सिर्फ मुस्कुराकर हाथ मिलाया, फिस्ट बंप किया और धन्यवाद कहा। उन्होंने मेरी निजी रहने की इच्छा का पूरा सम्मान किया।”
इस पर अमोल ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “उन्हें ये अच्छे संस्कार किसने सिखाए? शायद कोई विदेशी प्रभाव होगा, क्योंकि पिछली पीढ़ियां तो ऐसी बातें कम ही जानती थीं।” पुलिस कार्रवाई से पहले का माहौल याद करते हुए अभिनेता ने कहा कि वहां गुस्से की जगह उम्मीद दिखाई दे रही थी।
अमोल ने लिखा, “मैंने युवाओं को सपनों और उम्मीदों से भरी आंखों के साथ देखा। वे मुस्कुरा रहे थे, गाने गा रहे थे, सवाल पूछ रहे थे और भीड़ में एक-दूसरे का हाथ थामे हुए थे।” अमोल के मुताबिक, सबसे खास बात प्रदर्शनकारियों का व्यवहार था। एक्टर ने लिखा, “दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कैसी छवि है, यह मैं जानता हूं। लेकिन इतनी बड़ी भीड़ होने के बावजूद एक भी बदसलूकी, अव्यवस्था या गलत स्पर्श की घटना नहीं हुई।”
अपने पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा कि युवा एक-दूसरे की जिम्मेदारी खुद उठा रहे थे। अमोल ने लिखा, “जिस देश में लोग अक्सर अपने पीछे सफाई भी नहीं करते, वहां ये युवा दूसरों की जिम्मेदारी भी ले रहे थे। बिना शोर मचाए, बिना श्रेय लिए, वे चुपचाप यह काम कर रहे थे। अगर आप थोड़े भी असहज या गर्म महसूस करते थे, तो कोई अजनबी अचानक आकर आपको पंखा झलने लगता था।”
अमोल ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, “ज्यादातर छात्र अलग-अलग कॉलेजों, कोर्सों और पढ़ाई के क्षेत्रों से थे। कुछ शायद नीट का पूरा नाम भी न बता पाते। कुछ बहुत छोटे थे और कुछ इतने बड़े कि नीट का उन पर कोई सीधा असर नहीं था।
फिर उनकी वहां आने की वजह क्या थी? कौन-सा विदेशी प्रभाव उन्हें उन लोगों की चिंता करना सिखा रहा था जिन्हें वे व्यक्तिगत रूप से जानते भी नहीं थे? कौन-सा विदेशी प्रभाव चाहता है कि हमारे देश में परीक्षाएं निष्पक्ष हों और हमारे चुने हुए नेता जनता के प्रति जवाबदेह हों?”
शिक्षा का मतलब सिर्फ ज्ञान हासिल करना नहीं: अमोल
अभिनेता ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, “शिक्षा का मतलब सिर्फ ज्ञान और हुनर ही नहीं, बल्कि आलोचनात्मक और स्वतंत्र सोच भी है। व्यक्तिगत तौर पर भी मुझे ये चीजें खुद ही सीखनी पड़ीं, क्योंकि हमारी औपचारिक शिक्षा में इन पहलुओं की कमी थी। अब हम खेल से भी ज्ञान और हुनर को हटा रहे हैं। तो वे कौन-सी किताब पढ़ रहे हैं जो उन्हें यह सब सिखा रही है? जरूर यह कोई विदेशी प्रोपेगैंडा होगा।”
मैं रोते-रोते सो गया: अमोल
अभिनेता ने लास्ट में अपनी बात खत्म करते हुए लिखा, “कल रात मैं रोते-रोते सो गया। उन लोगों के बारे में सोचकर जो टूटे हुए अंगों और टूटे हुए हौसले के साथ घर पहुंचे होंगे, आखिरकार उनके फोन में नेटवर्क आया होगा और उन्होंने देखा होगा कि उनके ही देशवासियों ने उन्हें पाकिस्तानी, पैसे लेकर काम करने वाले एजेंट, चीनी एजेंट और विदेशी ताकतों का मोहरा कहा है।
कल मुझे पता चला कि आंखों में तेज जलन और गले में आंसू गैस के बुरे स्वाद से भी ज्यादा बुरा क्या होता है। वह असहायपन जो तब महसूस होता है जब आप अपनी आंखों के सामने बुराई होते हुए देखते हैं और उसे रोकने के लिए कुछ नहीं कर पाते।”
यह भी पढ़ें: NEET पेपर लीक पर रवि किशन ने सुनाया PM मोदी का संदेश- देश के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे
