आपके पति बेचारे पॉलिटिक्स से डर गए- प्रभु चावला की टिप्पणी पर जया बच्चन ने दिया था ऐसा जवाब

अमिताभ बच्चन के राजनीति से सन्यास लेने पर प्रभु चावला ने जया बच्चन से पूछ लिया था कि क्या अमिताभ राजनीति से डर गए थे? जवाब में जया ने कहा था कि वो राजनीति से हार गए थे।

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जया बच्चन का तरह अमिताभ बच्चन का राजनीतिक सफ़र लंबा नहीं रहा (Photo-Indian Express Archive/File)

अमिताभ बच्चन ने गांधी परिवार से नजदीकियों के चलते राजनीति का रुख किया था। साल 1984 में राजीव गांधी के कहने पर वो राजनीति में आए और इलाहाबाद संसदीय सीट से उन्होंने चुनाव भी लड़ा। अमिताभ चुनाव तो जीते लेकिन 3 सालों बाद ही उन्होंने इस्तीफा देकर राजनीति से तौबा कर लिया। वहीं उनकी पत्नी जया बच्चन राजनीति में लंबी पारी खेल चुकीं हैं और अब तक सक्रिय राजनीति का हिस्सा हैं। अमिताभ बच्चन के राजनीति से सन्यास लेने पर प्रभु चावला ने जया बच्चन से पूछ लिया था कि क्या अमिताभ राजनीति से डर गए थे जिसके जवाब में उन्होंने कहा था कि वो राजनीति से हार गए थे।

प्रभु चावला के शो, ‘सीधी बात’ में जया बच्चन से पूछा गया, ‘आपके पतिदेव भी चुनाव लडे। वो बेचारे डर के मारे.. पॉलिटिक्स उनको भायी नहीं, क्या रीजन था?’ जया बच्चन ने जवाब दिया था, ‘डर के मारे तो नहीं छोड़े, उन्होंने कहा कि वो पॉलिटिक्स से हार गए हैं, पॉलिटिक्स नहीं कर सकते हैं।’ प्रभु चावला ने फिर पूछा था, ‘वो हार गए..हार इतनी जल्दी मान ली उन्होंने? फिर उन्होंने कहा कि पत्नी को भेज देते हैं पॉलिटिक्स में?’

जया बच्चन ने जवाब दिया था, ‘आर्टिस्ट आदमी हैं। उन्होंने तो ये नहीं कहा कि पत्नी को भेज दो मगर, उन्होंने कहा कि अगर आप कर सकती हैं, आपमें हिम्मत है तो जो करना है करिए। मगर पॉलिटिक्स से दिक्कत है उन्हें बहुत।

अमिताभ बच्चन ने भी राजनीति में आने के अपने फैसले को कई मौकों पर गलत बताया। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि राजनीति में आना मेरी सबसे बड़ी भूल भी। अमिताभ बच्चन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे लोकप्रिय और मजबूत नेता हेमवती नंदन बहुगुणा को चुनाव में कड़ी शिकस्त दी थी। अमिताभ की लोकप्रियता उनके राजनीतिक करियर पर ग्रहण बनकर छा गई थी। चुनाव में मिली हार के बाद बहुगुणा ने राजनीति से ही सन्यास ले लिया था।

 

इतनी बड़ी जीत के बाद भी अमिताभ ने राजनीति से सन्यास ले लिया था। उन दिनों उनकी फ़िल्म ‘मर्द’ बड़ी हिट साबित हुई थी और वो फिल्मी दुनिया में मशगूल रहे। कहा जाता है कि चुनाव जीतने के बाद अमिताभ अपने संसदीय क्षेत्र इलाहाबाद लौटे तक नहीं।

साल 1987 में जब कांग्रेस पर बोफोर्स घोटाले के आरोप लगे तब अमिताभ बच्चन का नाम भी उसमें घसीटा गया। कहा जाता है कि अमिताभ पर कई आरोप लगे जिससे हारकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया और राजनीति छोड़ दी। हालांकि बाद में बोफोर्स मामले में अमिताभ को क्लीन चिट दे दी गई थी।

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