‘बोफोर्स’ घोटाले पर खबर देख भड़क गए थे अमिताभ बच्चन, पहुंच गए थे पत्रकार के घर

अमिताभ बच्चन की जिंदगी में ऐसा दौर आया था जब हर दिन अख़बारों में उनकी आलोचनाएं छपने लगी थीं।

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महानायक अमिताभ बच्चन (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

साल 1987 में जब राजीव गांधी सरकार बोफोर्स घोटाले में घिरी, तब अमिताभ बच्चन पर भी सवाल उठे थे। अमिताभ और राजीव करीबी दोस्त थे। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव के कहने पर अमिताभ राजनीति में आए थे। बोफोर्स का जिन्न बाहर आया तो अमिताभ बच्चन को लेकर अख़बार में तमाम तरह की खबरें और आलोचना छपने लगी। एक इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन ने उस दौर को याद करते हुए बताया था कि हर सुबह का अखबार देखना उनके लिए बड़ा भारी होता था। उस वक्त वह बेहद परेशान हो गए थे।

अमिताभ बच्चन ने अर्णब गोस्वामी के चर्चित शो ‘फ्रैंकली स्पीकिंग’ में बताया था कि उस दौर में एक पत्रकार थे जो हर दिन उनके खिलाफ कुछ न कुछ लिखते रहते थे। ऐसे में एक दिन अमिताभ के सब्र का बांध टूट गया और वह उस पत्रकार के घर जा पहुंचे। उन्होंने जब घर का दरवाजा खटखटाया तो पत्रकार उन्हें अपनी चौखट पर देखकर चौंक गए थे।

अमिताभ बच्चन ने बताया था, ‘हम कलाकार हैं, हम नकारात्मकता को नहीं देखना चाहते… जरा भी। क्योंकि इससे काम में पूरा ध्यान नहीं लग पाता। क्रिएटिव इंसान ये सब नहीं झेल सकता। उस वक्त भी ऐसी हेडलाइंस आने लगी थीं कि आप ऐसे हैं, आपकी गिरफ्तारी होनी चाहिए, आपने ये किया है, आपको गोली मार देनी चाहिए, आपको मार डालना चाहिए। ये मेरे लिए बहुत डिस्टर्बिंग था।’

बिग बी ने बताया था- ‘मैं जब हर सुबह ऐसी खबरें पढ़ता था तो बहुत सदमे में आ जाता था, मैं कैमरे के सामने जाकर परफॉर्म नहीं कर पाता था। ऐसे में एक जेंटलमैन थे, वह किसी संस्थान में एडिटर थे और कुछ सवालों के साथ हर दिन मुझे कटघरे में खड़ा कर देते थे। सवाल करते थे कि ये बताओ-ये बताओ। मैं समझ नहीं पा रहा था कि मैं क्या करूं? ऐसे में एक सुबह मैंने एक फैसला किया।’

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अमिताभ बच्चन ने आगे बताया था- ‘मैंने उस शख्स के घर का पता ढूंढ निकाला। अपनी कार उठाई और खुद चला कर वहां जा पहुंचा। मैंने उनका दरवाजा खटखटाया, उन्होंने दरवाजा खोला, मुझे देख कर उन्होंने कहा- आप यहां कैसे आए? तो मैंने पूछा कि आपने ही ये सारे सवाल मेरे लिए लिखे हैं? तो उन्होंने हां में जवाब दिया।’

अमिताभ ने आगे बताया था- ‘मैंने उनसे पूछा- क्या मैं अंदर आ सकता हूं, क्योंकि मुझे इन सारे सवालों के जवाब आपको देने हैं। तो उन्होंने कहा- अरे नहीं-नहीं सर ऐसा कुछ नहीं है, इसकी कोई जरूरत नहीं। मैंने जोर दिया औऱ कहा कि नहीं जरूरत है। मैं उस दिन उनके पास 3 घंटे बैठा। मैंने उनके हर एक सवाल का जवाब दिया था। फिर मैंने उनसे कहा कि आशा है कि अब आप संतुष्ट होंगे। तो उन्होंने कहां- हां। मुझे माफ कीजिए मैंने आपसे ये सब कुछ पूछा। इसके बाद उन्होंने कहा कि प्लीज मेरी फैमिली, पत्नी और बच्चों से भी मिलिए। फिर मैं उनके परिवार से मिला था।’

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