अमिताभ बच्चन आज भले ही 80 पार कर चुके हों, लेकिन उनका अनुशासन, समय की पाबंदी और काम के प्रति समर्पण आज भी वैसा ही है जैसा 50 साल पहले था। यही वो खूबी है जिसने उन्हें इंडस्ट्री में सबसे अलग बनाया। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब इसी आदत ने उन्हें अपने ही को-स्टार्स की आंखों की किरकिरी बना दिया था।
यह किस्सा 1971 में आई फिल्म ‘आनंद’ के दौर का है। उस समय राजेश खन्ना बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार बन चुके थे और उनका स्टारडम अपने चरम पर था। वहीं, अमिताभ बच्चन इंडस्ट्री में अपने पैर जमाने की कोशिश कर रहे थे।
फिल्म के सेट पर जहां अमिताभ समय से पहले पहुंच जाते थे, वहीं राजेश खन्ना के देर से आने की चर्चा आम थी। कई बार ऐसा होता था कि अमिताभ घंटों सेट पर इंतजार करते रहते, लेकिन उन्होंने कभी इस पर शिकायत नहीं की।
हालांकि, अमिताभ की यही आदत राजेश खन्ना को खटकने लगी थी। वीरेंद्र कपूर की किताब ‘Excellence: The Amitabh Bachchan Way’ के मुताबिक, एक इंटरव्यू में जब अमिताभ से उनकी तुलना की गई तो राजेश खन्ना भड़क गए। उन्होंने कहा, ‘क्लर्क समय के पाबंद होते हैं, मैं कोई क्लर्क नहीं हूं… मैं एक कलाकार हूं। मेरा मन किसी का गुलाम नहीं, मैं अपनी मर्जी का मालिक हूं।”
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कैमरा बार-बार अमिताभ पर जाने से भी राजेश खन्ना को हुई थी दिक्कत
एक और किस्सा काफी मशहूर है। वो ये कि एक बार ‘आनंद’ फिल्म के सेट पर शूटिंग के दौरान, जब निर्देशक बार-बार अमिताभ बच्चन के क्लोज-अप शॉट्स ले रहे थे, तो खन्ना ने मजाक में कहा था- “बाबू मोशाय, ये फिल्म मेरी है या इनकी?”
राजेश खन्ना भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके शानदार उभार और स्टारडम के ढलान से जुड़ी उनकी तकलीफों की कहानियां आज भी उतनी ही जिंदा हैं। हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना का दौर बेमिसाल था, लेकिन कई दिग्गजों की तरह उनका यह जलवा ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सका।
अमिताभ बच्चन के इंडस्ट्री में आने फिल्म ‘जंजीर’ की जबरदस्त सफलता के साथ इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। धीरे-धीरे बच्चन हिंदी सिनेमा का नया चेहरा बन गए और राजेश खन्ना की फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन कमजोर पड़ने लगा।
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असफलता बर्दाश्त नहीं कर पाए थे राजेश खन्ना
करीबी लोगों के मुताबिक, यह बदलाव राजेश खन्ना के लिए स्वीकार करना आसान नहीं था। कहा जाता है कि इससे वह निराश हो गए। उनके करीबी दोस्त और दिग्गज अभिनेता प्रेम चोपड़ा ने भीइस दौर को याद करते हुए बताया कि राजेश खन्ना के लिए यह मानना बेहद मुश्किल था कि वह अब इंडस्ट्री के नंबर वन सुपरस्टार नहीं रहे।
विक्की ललवानी के साथ बातचीत में प्रेम चोपड़ा ने राजेश खन्ना के करियर के गिरावट वाले दौर पर खुलकर बात की थी। जब लालवानी ने ‘अवतार’, ‘सौतन’ और ‘थोड़ी सी बेवफाई’ जैसी फिल्मों से उनके कमबैक का जिक्र किया, तो चोपड़ा ने माना, “हां, लेकिन बीच में उन्होंने इसे थोड़ा बिगाड़ दिया था।”
स्टारडम कम होता देख शराब पीने लगे थे राजेश खन्ना
जब उनसे पूछा गया कि क्या खन्ना ने कभी अपनी घटती स्टारडम के बारे में खुलकर बात की, तो उन्होंने कहा, “नहीं, उन्होंने इस पर कभी चर्चा नहीं की। लेकिन मैं महसूस कर सकता था- उनके लिए असफलता को स्वीकार करना मुश्किल था, उस मुकाम के बाद यह पचाना आसान नहीं था। वह निराश थे, इसे सह नहीं पा रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि इस दौरान खन्ना की शराब पीने की आदत भी बढ़ गई थी।
