ताज़ा खबर
 

अमिताभ बच्‍चन के महानायक होने पर सवाल उठाती हैं ये पांच घटनाएं

Amitabh Bachchan Birthday: आज (11 अक्टूबर) को सुपरस्टार अमिताभ बच्चन 75 साल के हो गये।
अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद में हुआ था।

साल था 1969। उस साल आने वाली दर्जनों फिल्मों में दो फिल्में ऐसी थीं जो हिन्दुस्तानी सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद रखी जानी थीं।  भुवन सोम और सात हिन्दुस्तानी। भुवन शोम के निर्देशक मृणाल सेन ने फिल्म में सूत्रधार की आवाज के तौर पर एक नये अभिनेता को मौका दिया था। फिल्मी दुनिया पर ये आवाज पहली बार गूँजी थी। हालाँकि आवाज के पीछे का चेहरा दर्शकों को करीब छह महीने बाद उसी साल आयी एक दूसरी फिल्म से देखने को मिला। मई 1969 में रिलीज हुई भुवन शोम के क्रेडिट रोल में उस आवाज का परिचय केवल “अमिताभ” के तौर पर दिया गया था। नवंबर 1969 में रिलीज हुई सात हिन्दुस्तान के निर्माता-निर्देशक ख्वाजा अहमद अब्बास ने अपनी फिल्म के सात हिन्दुस्तानियों में एक अनवर अली अनवर की भूमिका कवि हरिवंश राय बच्चन के बेटे अमिताभ बच्चन को दी थी। आज 48 साल बाद अमिताभ बच्चन को हम सब महानायक या सुपरस्टार के तौर पर जानते हैं। 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद में हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन के घर में जन्मे अमिताभ की महानायक जैसी छवि पर कई बार सवाल भी उठे हैं। अमिताभ ने कई बार खुद पर उठे सवालों का जवाब दिया, कई बार चुप लगा गये। आइए देखते हैं कि किन पाँच मौकों पर बॉलीवुड के शहँशाह सवालों से घिरे गये।

1- पनामा पेपर्स- टैक्स चोरों के लिए स्वर्ग माने जाने वाले देशों में फर्जी कंपनियां खोलकर कालाधन सफेद करने से जुड़े पनामा पेपर्स मामले में अमिताभ बच्चन का नाम उनके लाखों-करोड़ों प्रशंसकों के लिए दिल तोड़ने वाला रहा। दुनिया के कई बड़े समाचार संस्थाओं के साथ मिलकर इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया था कि 1993 से 1997 के बीच पनामा स्थित मोजैक फोंसेका कंपनी के दस्तावेज के अनुसार अमिताभ बच्चन चार विदेशी शिपिंग कंपनियों के निदेशक रहे थे। उन्होंने टेलीफोन से उनकी बोर्ड मीटिंग में हिस्सा भी लिया था। ये मामला सामने आने पर एक बयान जारी करके बच्चन ने कहा था कि वो ऐसी किन्हीं कंपनियों के निदेशक नहीं थे और न ही ऐसी किन्हीं कंपनियों को वो जानते हैं। बच्चन ने कहा कि संभव है कि उनके नाम का दुरुपयोग हुआ हो। पनामा पेपर्स मामले में अभी भारत सरकार की जांच जारी है।

2- महिला मुद्दों का इस्तेमाल- यूँ तो अमिताभ बच्चन के अभिनय के मुरीद करोड़ों में हैं लेकिन पिछले साल आई उनकी फिल्म पिंक को लेकर वो आलोचनाओं से घिर गये। फिल्म की वजह से नहीं बल्कि उसके प्रचार को लेकर। अमिताभ ने फिल्म की रिलीज से पहले अपनी नातिन नव्या नवेली को एक भावप्रवण पत्र लिखा जिसमें औरत की आजादी की पुरजोर पैरवी की गयी थी। बाद में पता चला कि अमिताभ ने वो पत्र फिल्म के प्रचार के लिए लिखा था। इसे लेकर सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना हुई। अमिताभ पर फिल्म के प्रचार के लिए एक सामाजिक मुद्दों के दुरुपयोग का आरोप लगा। अमिताभ के उस पत्र को लेकर तब भी आलोचनाएं हुई जब अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा को स्कर्ट पहनकर पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने पर सोशल मीडिया पर ट्रॉल होना पड़ा। मीडिया और सोशल मीडिया के बार-बार कुरेदे जाने पर भी अमिताभ ने प्रियंका के मामले पर टिप्पणी नहीं की जिसकी वजह से उन्हें आलोचना का शिकार होना पड़ा।

3- यूपी में है दम कैंपेन- साल 2007 के यूपी विधान सभा चुनाव के दौरान अमिताभ बच्चन ने सत्ताधारी समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए विज्ञापन में काम किया था। उस विज्ञापन की पंच लाइन थी, “यूपी में है दम क्योंकि जुर्म यहां है कम।” इस कैंपेन के लिए अमिताभ बच्चन की काफी आलोचना हुई क्योंकि उस समय उत्तर प्रदेश अपराध बढ़ने की वजह से चर्चा में था। राज्य सरकार पर आरोप लग रहे थे कि वो अपराधियों पर लगाम नहीं लगा पा रही है। ऐसे में देश के महानायक द्वारा ऐसा प्रचार बहुतों को नहीं भाया। अमिताभ बच्चन की पत्नी जया भादुड़ी सपा की सांसद थीं। तो लोगों ने माना कि महानायक को अपने गृह प्रदेश से ज्यादा घरेलू हित प्यारे हैं।

4- एबीसीएल का दिवालिया होना- अमिताभ बच्चन ने साल 1995 में अमिताभ बच्चन कार्पोरेशन लिमिटेड (एबीसीएल)  की स्थापना की। कंपनी ने 1996 का मिस वर्ल्ड का आयोजन करके पूरे दुनिया में नाम कमाया लेकिन जल्द ही ये कंपनी  घाटे में चली गयी। कंपनी पर बकायेदारों का पैसा और कर्मचारियों की तनख्वाह न देने के आरोप लगे। एबीसीएल की वजह से अमिताभ की काफी बदनामी और किरकिरी हुई। उनके आलोचकों ने माना कि महानायक का बरताव उनकी सार्वजनिक छवि के अनुरूप नहीं था।

5- बोफोर्स तोप घोटाला – पहली बार अमिताभ के नाम पर दाग बोफोर्स घोटाले में लगा। 1986 में भारत सरकार ने स्वीडन की कंपनी बोफोर्स से तोप खरीदने का सौदा किया। साल 1987 में स्वीडन के रेडियो पर प्रसारित एक समाचार में दावा किया गया कि इस सौदे में कुछ लोगों को दलाली दी गयी है। बाद में भारतीय मीडिया में जब ये खबर आयी तो सरकार हिल गयी। राजीव गांधी के अलावा उस समय सांसद अमिताभ बच्चन भी आरोपों से घिर गये। अमिताभ बच्चन ने एक स्वीडिश अखबार पर इस घोटाले में उनका नाम घसीटने के लिए लंदन की अदालत में मुकदमा कर दिया। अदालत में अमिताभ सही साबित हुए, स्वीडिश अखबार को माफी मांगनी पड़ी। लेकिन उसके बावजूद कई सालों तक बोफोर्स घोटाले का भूत अमिताभ का पीछा करता रहा।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.