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इन पांच खूब‍ियों के दम पर है अम‍िताभ बच्‍चन की कामयाबी

Amitabh Bachchan Birthday: अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म सात हिन्दुस्तानी 1969 में रिलीज हुई थी।

Amitabh Bachchan, Amitabh Bachchan Twitter, Amitabh Bachchan on Social Media, Big B, Amitabh Bachchan Followers, Amitabh Bachchan Twitter Numbers, Amitabh Bachchan Facts, Thanks Tweetबॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन।

आज (11 अक्टूबर) सदी के महानायक कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन 75 साल के हो गये। अमिताभ के जन्मदिन पर दर्जनों लेखों में ये जानने और समझाने की कोशिश की गयी है कि बॉलीवुड के शहँशाह के 48 साल लम्बे करियर का राज क्या है? आज भी अमिताभ बच्चन हिन्दी फिल्म जगत के सबसे व्यस्त कलाकारों में हैं। हाल ही में फोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें भारत का नौवां सबसे अमीर अभिनेता बताया। करीब 58 करोड़ रुपये की दौलत के साथ अमिताभ रणबीर कपूर (55 करोड़ रुपये) जैसे युवा कलाकारों से भी आगे हैं। फोर्ब्स की लिस्ट में शामिल वो एकमात्र अभिनेता हैं जिसकी उम्र 60 से ज्यादा है। आइए ये समझने की कोशिश करते हैं कि वो कौन सी खूबियाँ हैं जिनके दम पर अमिताभ बच्चन की कामयाबी टिकी है।

1- अभिनय प्रतिभा- जाहिर है अगर किसी अभिनेता ने पांच दशकों से अपना दबदबा कायम रखा है तो उसमें विलक्षण अभिनय प्रतिभा होगी। ये सुनने कहने के लायक भले ही न लगे लेकिन अमिताभ की सफलता का सबसा बड़ा श्रेय उनकी उस अतुलनीय प्रतिभा को जाता है जो कम से कम हिन्दी सिनेमा में विरल है। कई अभिनेताओं ने 50-60 की उम्र तक फिल्मी करियर खींचा। लेकिन उम्र ढलने के साथ बड़ी उम्र की अलहदा भूमिकाओं लायक खुद को जिस तरह अमिताभ ने बनाया वैसा कोई और नहीं कर सका। अमिताभ बच्चन और आमिर खान की आने वाली फिल्म ठग्स ऑफ हिन्दुस्तान अगले साल आने वाली है लेकिन उसकी शूटिंग के दौरान की एक फोटो इन दिनों इंटरनेट पर लीक हो गयी है। फिल्म में अमिताभ का लुक देखकर उनके फैंस अवाक रह गये हैं। जिस अभिनेता को वो 48 सालों से देख रहे वो अभी भी उन्हें हैरान करने की कुव्वत रखता है। अमिताभ को पहले पहले भले ही “एंग्री यंग मैन” के रूप में लोकप्रियता मिली लेकिन वो कॉमेडी, ट्रैजडी और पारिवारिक फिल्मों में भी उतने ही कामयाब रहे हैं। दिलीप कुमार के शब्दों में कहें “अमिताभ बच्चन संपूर्ण अभिनेता हैं।”

2- अनुशासन- अमिताभ बच्चन के बारे में जिन बातों पर उनके कटु आलोचक भी सहमत रहते हैं वो है उनकी अनुशासनप्रियता। अमिताभ फिल्म जगत के सबसे अनुशासित कलाकार माने जाते हैं। अमिताभ को फिल्म जगत के समय के सबसे पाबंद कलाकारों में माना जाता है। नए-नवेले सितारों की लेट-लतीफी के आपने बहुतेरे किस्से सुने होंगे लेकिन सुपरस्टार और महानायक जैसे अलंकरण पाने के बावजूद आज भी अमिताभ फिल्म सेट पर समय पर पहुंचते हैं। साल 2000 में आयी फिल्म मोहब्बतें का अमिताभ का वो डॉयलॉग आपको तो याद ही होगा- “परंपरा, प्रतिष्ठा और अनुशासन, ये इस गुरुकुल के तीन स्तंभ हैं। ये वो आदर्श हैं, जिनसे हम आपका आने वाला कल बताते हैं।”

3- परिश्रम – अपने 75वें जन्मदिन पर अमिताभ बच्चन ने ट्विट किया, “बिना परिश्रम के साँस नहीं ली जा सकती।” क्या आप किसी और अभिनेता से इस उम्र में इस कमेंट की उम्मीद कर सकते हैं? शायद नहीं। इस उम्र में भी परिश्रण को अमिताभ जो महत्व देते हैं उसका उनके महानायक बनने में विशेष योगदान है। रणबीर कपूर से एक बातचीत में अमिताभ ने कहा था कि उन्हें रोज काम करना पसंद है और 1990 के दशक में कुछ सालों के लिए काम न करने का उन्हें अफसोस है। ऐसे में ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि अमिताभ अपने काम के प्रति इतने समर्पित न होते तो महानायक नहीं होते।

4- नई पीढ़ी के साथ तालमेल- “आजकल के नौजवान तो…” ये एक ऐसी ग्रंथि जिसका इस्तेमाल दुनिया भर के बुजुर्ग करते आ रहे हैं और उनके बुजुर्ग भी। लेकिन अमिताभ बच्चन ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने खुद को नए जमाने के हिसाब से ढाला। भले ही ये उनका बड़प्पन हो लेकिन अमिताभ बच्चन हमेशा ही कहते हैं नई पीढ़ी ज्यादा प्रतिभाशाली है। शायद यही वजह है कि वो अनिरुद्ध रॉय चौधरी, नीतेश तिवारी, लीना यादव, विजय नाम्बियार जैसे नए और शूजित सरकार, आर बाल्की, अनुराग कश्यप जैसे युवा नए निर्देशकों की पसंद बने हुए हैं।

5- नए प्रयोग का साहस- 1990 के दशक में जब अमिताभ की कुछ फिल्में पिट गईं तो उन्होंने काम करना बंद कर दिया। कुछ लोग ये भी कहते हैं कि उन्हें काम मिलना बंद हो गया था। अमिताभ ने 1995 में फिल्म निर्माण और इवेंट कंपनी एबीसीएल खोली लेकिन वो भी पिट गयी। कहते हैं कि अमिताभ के इतने बुरे दिन आ गये थे कि उन्हें अपनी माली हालत छिपाने के लिए अपने घर में दोस्तों की गाड़ियां खड़ी करनी पड़ती थीं। अमिताभ के आलोचक उनका मर्सिया लिखने लगे थे। जिसके दिल में उनके खिलाफ जितना गुब्बार था वो निकाल रहा था। लेकिन ऐसे लोग भूल गये कि जिसकी आभा कभी न खत्म हो उसे ही अमिताभ कहते हैं। जुलाई 2000 में अमिताभ ने बड़ा जोखिम लेते हुए छोटे पर्दे पर वापसी की। कौन बनेगा करोड़पति की सफलता ने न केवल अमिताभ बल्कि टेलीविजन इतिहास का भी अविस्मरणीय दस्तावेज बन गया। केबीसी से पहले दूसरे नए अभिनेताओं की फिल्मों में चरित्र भूमिकाएं कर रहे अमिताभ केबीसी से देश के घर-घर में फिर से छा गये। एक तरह से उन्होंने इक्कीसवीं सदी में अपने करियर की नई पारी शुरू की जो आज तक जारी है।

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