फिल्म: ऐल्फा
कलाकार: आलिया भट्ट, शरवरी वाघ, अनिल कपूर, बॉबी देओल, दिव्येंदु भट्टाचार्य, दीया मिर्जा और ऋतिक रोशन
लेखक: उदय चोपड़ा, सौमिल शुक्ला और श्रीधर राघवन
निर्देशक: शिव रवैल
निर्माता: आदित्य चोपड़ा
रेटिंग: 2.5/5

यशराज स्पाई यूनिवर्स की पहली फीमेल लीड फिल्म ‘ऐल्फा’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है, जिसमें हाई-ऑक्टेन एक्शन देखने को मिला। फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद ऐसा लगा था कि मेकर्स ने उसी में पूरी फिल्म दिखा दी है, लेकिन ऐसा नहीं है। डायरेक्टर शिव रवैल ने इसे इंटरनेशनल स्पाई थ्रिलर लुक देने में मेहनत पूरी की है, लेकिन इसकी कहानी उम्मीद पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती। चलिए आपको बताते हैं कि इसे थिएटर जाकर देखना चाहिए नहीं।

क्या है फिल्म ‘ऐल्फा’ की कहानी?

फिल्म की कहानी जुलाई 1999 से शुरू होती है। करगिल युद्ध में कई फौजियों की जान चली जाती है और सिर्फ कर्नल विक्रांत काैल (अनिल कपूर) और फतेह सिंह लखावत (बॉबी देओल) बचते हैं। इसके बाद फतेह अपने खोए हुए साथियों का बदला लेने के लिए विक्रांत को अपने सीक्रेट प्रोग्राम ‘ऐल्फा’ के बारे में बताता है। फतेह, विक्रांत से कहता है कि वो सरकार से इस प्रोग्राम को पास करवाने में उसकी मदद करें।

‘ऐल्फा’ एक ऐसा प्रोग्राम है, जिसमें फौजियों को ताकतवर बनाने के लिए उनकी बॉडी में ऐल्फा नाम का सीरम डाला जाएगा। यह सीरम इंसान की ताकत, रिफ्लेक्स और रिकवरी को कई गुना बढ़ा देता है। इस दौरान विक्रांत को पता चलता है कि उसकी पत्नी जानकी (दीया मिर्जा) प्रेग्नेंट है, लेकिन उसका दिल कमजोर है और उसका जिंदा बचना मुश्किल है। ऐसे में विक्रांत ऐल्फा सीरम चुराकर चुपके से अपनी पत्नी को दे देता है।

उसका यह फैसला उसकी पूरी जिंदगी बदल देता है। अपनी बेटी को जन्म देने के बाद जानकी दम तोड़ देती है। फिर फतेह को इस बारे में पता चलता है, तो वह विक्रांत से कहता है कि सीरम उसने देश के लिए बनवाया था व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए नहीं। ऐसे में फतेह, विक्रांत को उसकी नवजात बेटी से अलग कर देता है और बाद में उसे यकीन दिला देता है कि उसकी बेटी मर चुकी है।

फिर फतेह, विक्रांत की बेटी का नाम सीता (आलिया भट्ट) रखता है और उसे ‘ऐल्फा’ की तरह तैयार करता है। बचपन से उसे मिशन दिए जाते हैं और वह देश के दुश्मनों को खत्म करती है, लेकिन एक दिन उसे पता चलता है कि जिस इंसान को वह अपना गुरु मान रही है, वह वैसा नहीं है। इसके बाद कहानी में दुर्गा (शरवरी) की एंट्री होती है। वह कौन है, ओडिसी क्या है और आखिर फतेह का असली मिशन क्या है। क्लाइमैक्स इन्हीं सवालों के जवाब देता है। यह सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

कैसा है सितारों का अभिनय?

‘ऐल्फा’ में किसी का भी अभिनय कमजोर नहीं है। आलिया ने बेहतरीन काम किया है। ‘जिगरा’ के बाद अब इसमें उनका एक्शन अवतार देखने लायक है। शरवरी को स्क्रीन स्पेस कम मिला है, लेकिन जितना मिला उसमें उन्होंने भी शानदार काम किया है। अनिल कपूर हमेशा की तरह सधे हुए नजर आए। बॉबी देओल का अभिनय अच्छा है, लेकिन कुछ जगह उनका हरियाणवी बोलना खटकता है। फिल्म में ऋतिक का भी छोटा सा कैमियो है।

कैसा है फिल्म का डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले

डायरेक्टर शिव रवैल ने फिल्म को कई जगह हॉलीवुड स्टाइल स्पाई थ्रिलर दिखाने की कोशिश की है। खूबसूरत लोकेशंस फिल्म को शानदार विजुअल देते हैं। हालांकि कहानी के लेवल पर फिल्म कई जगह कमजोर पड़ जाती है। स्क्रीनप्ले कमजोर है। फर्स्ट हॉफ में ट्विस्ट हैं और फिल्म का क्लाइमैक्स बॉबी देओल के किरदार के साथ सरप्राइज लेकर आता है।

कहां रह गई कमी

जैसा की हमने आपको बताया फिल्म अपनी कहानी में मात खा जाती है। कुछ सीन देखने के बाद आप समझ जाएंगे कि फिल्म आगे क्या दिखाने वाली है। कई जगह स्पाई एजेंट्स को इतना सुपरह्यूमन बना दिया कि कहानी वास्तविकता से दूर जाने लगती है। फतेह की बैक स्टोरी भी कुछ जगह नकली लगती है। फिल्म में एक दो गाने आए और वो भी ऐसे जिनके लिरिक्स भी याद नहीं रहते। फिल्म सिर्फ एक्शन दिखाती है।

देखें या नहीं

इसमें न कोई लव स्टोरी है न इमोशनल एंगल ऐसे में अगर आप सिर्फ एक्शन फिल्मों के शौकीन हैं, तो इसे थिएटर में जाकर जरूर देख सकते हैं। इसके अलावा अगर आप यशराज स्पाई यूनिवर्स के फैन हैं, तो फिल्म एक बार देख सकते हैं। कुल मिलाकर इसे थिएटर में वन टाइम वॉच कर सकते हैं।