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नहीं टिकेगा ये तूफान

नाम कुछ भी रख लें पर उससे काम बन ही जाए यह जरूरी नहीं है।

तूफान।

नाम कुछ भी रख लें पर उससे काम बन ही जाए यह जरूरी नहीं है। निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने ‘तूफान’ नाम की फिल्म तो बना ली लेकिन यह फिल्म प्रेमियों के दिल में देर तक टिकनेवाला तूफान नहीं है। वजह यह है कि मुक्केबाजी के साथ अंतर्धामिक प्रेम और विवाह के मसले को मिलाने की कोशिश सफल नहीं हुई है। अगर यह फिल्म सिर्फ मुक्केबाजी पर केंद्रित होती शायद ज्यादा अच्छी बनी होती। लेकिन निर्देशक की आकांक्षा बड़ी थी, सलमान खान की ‘सुुल्तान’ को मात देने की। दिक्कत यहीं से शुरू हो गई।

‘तूफान’ भी ‘सुल्तान’ की तरह एक मुक्केबाज की कहानी है जिसका नाम है अज्जू (फरहान अख्तर)। अज्जू मुंबई में रहनेवाला मवाली किस्म का शख्स है जो एक भाई के लिए काम करता है। वसूली उगाही आदि का। हालांकि अच्छे दिल का है लेकिन इस धंधे में उसमें उसे लोगों को कूटना भी पड़ता है। इस चक्कर में कभी-कभी उसकी भी कुटाई भी हो जाती है। फिर एक दिन जब उसकी कुटाई हो जाती है तो वो अस्पताल जाता है। वहां अनन्या प्रभु (मृणाल ठाकुर) नाम की एक डॉक्टर उसको हड़काती है। फिर हालात ऐसे बनते हैं अनन्या उस पर लट्टू हो जाती है और अज्जू नाना प्रभु नाम के कोच से मुक्केबाजी सीखना शुरू कर देता है।

हालांकि नाना प्रभु बजरंगबली का भक्त है और मुसलमानों को खास पसंद नहीं करता। लेकिन उस दिल पिघलता है। अलबत्ता आगे चलकर यह पिघला हुआ दिल फिर पत्थर बन जाता है चब पता चलता है कि अज्जू तो उसकी बेटी से इश्क करता है। जी हां, अनन्या नाना प्रभु की बेटी है। यानी ‘लव जिहाद’ जैसा मामला आ जाता है। अज्जू मुक्केबाज तो बन जाता है लेकिन क्या अनन्या उसकी होगी और आगे चलकर उसकी मुक्केबाजी का क्या होगा? ऐसे ही पेचों के साथ कहानी आगे बढ़ती जाती है और इतनी ज्यादा आगे बढ़ती है कि पौने तीन घंटे के बाद खत्म होती है। तब तक मोबाइल पकड़े या लैपटॉप पर फिल्म देखते दर्शक थक चुका होता है।

फिल्म में सात गाने हैं और इनमें ज्यादातर भर्ती के हैं। निर्देशक की इच्छा रही होगी कि फरहान को रोमांटिक हीरो के तौर पर भी पेश किया जाए। बॉक्सर के रूप में फरहान जमे हैं और इसके लिए उन्होंने मेहनत भी काफी की है। लेकिन रोमांटिक हीरो का खिताब जीतना उनके लिए मुश्किल हैं। जहां-जहां मुक्केबाजी से संबंधित दृश्य हैं वहां-वहां फिल्म अपना चुबंकत्व बनाए रखती है। वैसे मृणाल ठाकुर आकर्षक लगी हैं और जहां तक परेश रावल का सवाल है वे बॉक्सिंग कोच के रूप में धांसू लगे हैं।

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