ओडिशा की कक्षा 8 की एक किताब में बॉलीवुड के मशहूर गाने ‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’ और ‘रिंद पोश माल’ को लोकगीत के उदाहरण के तौर पर शामिल किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। पहले से ही स्कूल की किताबों में बड़ी संख्या में मिली गलतियों को लेकर घिरी राज्य सरकार अब एक और विवाद का सामना कर रही है।
कक्षा 8 की कला शिक्षा की किताब ‘कृति’ में साल 1999 की फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के गाने ‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’ के बोलों को राजस्थानी लोकगीत का उदाहरण बताया गया है। वहीं साल 2000 में आई फिल्म ‘मिशन कश्मीर’ के गाने ‘रिंद पोश माल’ को कश्मीरी लोकगीत के तौर पर पेश किया गया है।
इतना ही नहीं, कक्षा 5 की अंग्रेजी की किताब ‘पल्लवी’ में ओड़िया गाना ‘राजा डोली’ और कक्षा 3 की किताब में ‘बुम्बरो-बुम्बरो’ को भी लोकगीत के उदाहरण के रूप में शामिल किया गया है। हालांकि इन चारों गानों की जड़ें लोकसंगीत से जुड़ी हैं। खासकर ‘रिंद पोश माल’ मूल रूप से 18वीं सदी के प्रसिद्ध कश्मीरी कवि रसूल मीर की एक प्रेम कविता है, जिसे बाद में फिल्म में इस्तेमाल किया गया।
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वहीं, कक्षा 6 की ‘कौशला शिक्षा’ (स्किल एजुकेशन) की किताब में बच्चों को झाल मूड़ी, फ्रूट सलाद, छाछ, लस्सी, पुदीने की चटनी, सैंडविच और कचुंबर रायता बनाने का तरीका भी सिखाया गया है।
इस मामले पर स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन गानों को अलग-अलग राज्यों की संस्कृति से छात्रों को परिचित कराने के लिए शामिल किया गया है।
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अधिकारी के मुताबिक, यह ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत किया गया है। उनका कहना है कि ये दोनों गाने पहले से ही एनसीईआरटी की किताबों में शामिल हैं और वहीं से इन्हें ओडिशा सरकार की पाठ्यपुस्तकों में लिया गया है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब एससीईआरटी की किताबों में पहले ही 1,678 गलतियां मिलने के बाद उनकी जांच चल रही है। इनमें तथ्यात्मक गलतियां, व्याकरण, वर्तनी और संदर्भ से जुड़ी कई खामियां शामिल हैं। सबसे ज्यादा 705 गलतियां कक्षा 8 की किताबों में पाई गई थीं।
