कभी ऐश्वर्या राय, तब्बू और कमल हासन जैसे सितारों के साथ बड़े पर्दे पर नजर आने वाले अब्बास 1990 के दशक के आखिर और 2000 के दशक की शुरुआत में लाखों दिलों की धड़कन थे। उनकी मुस्कान, आकर्षक व्यक्तित्व और रोमांटिक हीरो वाली छवि ने उन्हें साउथ सिनेमा का चॉकलेट बॉय बना दिया था। लेकिन जिस अभिनेता की एक झलक पाने के लिए प्रशंसक बेताब रहते थे।
वही एक समय ऐसा भी आया जब फिल्मों से दूर होकर न्यूजीलैंड में पेट्रोल पंप, कंस्ट्रक्शन साइट और टैक्सी चलाने जैसे काम करने को मजबूर हो गए। शोहरत से संघर्ष तक का यह सफर जितना चौंकाने वाला है, उतना ही प्रेरणादायक भी। अब्बास की कहानी बताती है कि सफलता हमेशा स्थायी नहीं होती, लेकिन मुश्किल हालात में खुद को संभालकर आगे बढ़ना ही असली जीत है। चलिए आज हम आपको उन्हीं की कहानी बताते हैं।
यह भी पढ़ें: ‘हर्षद बहुत प्यार करता है, शिवांगी उसका इस्तेमाल कर रही हैं’- राम कपूर ने लॉक अप 2 में किया बड़ा दावा
फिल्मी परिवार से रहा अब्बास का ताल्लुक
कोलकाता में जन्मे और बेंगलुरु में पले-बढ़े अब्बास का फिल्मों से पुराना नाता था। उनके दादा बंगाली और हिंदी फिल्मों के अभिनेता थे, जबकि उनका परिवार बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता-निर्देशक फिरोज खान से भी जुड़ा हुआ था। 2010 में रेडिफ को दिए इंटरव्यू में अब्बास ने बताया था कि उनकी मां अमिताभ बच्चन की बहुत बड़ी फैन थीं और वह भी बचपन से बिग बी की फिल्में देखते हुए बड़े हुए। इसलिए फिल्मों को उन्होंने हमेशा एक करियर विकल्प के तौर पर देखा।
एयर फोर्स पायलट बनना चाहते थे अब्बास
हालांकि शुरुआत में उनका सपना अभिनेता बनने का नहीं था। 2002 में उन्होंने कहा था, “मैं एयर फोर्स पायलट बनना चाहता था। अगर वह नहीं बन पाता, तो एमबीए करने का इरादा था।” लेकिन स्कूल के दिनों से की जा रही मॉडलिंग ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। दिलचस्प बात यह रही कि उन्हें पहला बड़ा मौका अपनी मातृभाषा में नहीं, बल्कि तमिल सिनेमा में मिला, जबकि उस समय उन्हें तमिल भाषा भी ठीक से नहीं आती थी।
अब्बास ने बताया था, “एक दोस्त ने मेरी मुलाकात निर्देशक काधिर से कराई। वह एक नए चेहरे की तलाश में थे। मैं अपने उन दोस्तों की सिफारिश कर रहा था जो अभिनय में रुचि रखते थे। उस वक्त मुझे तमिल नहीं आती थी और अभिनय करने का कोई इरादा भी नहीं था। लेकिन काधिर ने स्क्रीन टेस्ट देने को कहा। मैंने संदेह के साथ टेस्ट दिया और उन्होंने मुझे चुन लिया।”
रातोंरात स्टार बने अब्बास
काधिर की जिस फिल्म से अब्बास ने डेब्यू किया, उसका नाम ‘काधल देशम’ था। यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई और अब्बास रातोंरात स्टार बन गए। फिल्म में विनीत और तब्बू भी अहम भूमिकाओं में थे, जबकि एआर रहमान का संगीत आज भी बेहद लोकप्रिय माना जाता है।
2023 में गालाटा प्लस को दिए इंटरव्यू में अब्बास ने कहा था, “एक शाम मैं फिल्म के प्रीमियर में एक आम इंसान की तरह गया था, लेकिन अगले ही दिन मैं घर से बाहर नहीं निकल पा रहा था। लोग मुझ पर इतना प्यार क्यों बरसा रहे थे, यह मैं समझ ही नहीं पा रहा था। उस समय मेरी उम्र सिर्फ 19 साल थी और मैंने यह फिल्म सिर्फ कुछ अतिरिक्त पैसे कमाने के लिए की थी।”
इसके बाद अब्बास ने कई सफल फिल्मों में काम किया। इनमें ‘पडायप्पा’ (1999), ‘कंडुकोन्डैन कंडुकोन्डैन’ (2000) जिसमें अजीत और ऐश्वर्या राय भी थे, ‘हे राम’ (2000), ‘आनंदम’ (2001) और ‘मिन्नाले’ (2001) जैसी फिल्में शामिल हैं। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें मुख्य भूमिकाओं की जगह सहायक किरदार मिलने लगे और उनका स्टारडम फीका पड़ने लगा। 2010 के दशक तक उनका करियर लगभग खत्म हो चुका था। 2016 में मलयालम फिल्म ‘पचाकल्लम’ के बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली।
जब आर्थिक तंगी ने तोड़ दिया आत्मविश्वास
फिल्मों से दूर होने के बाद अब्बास अपने परिवार के साथ ऑकलैंड, न्यूजीलैंड चले गए। वहां उन्होंने पेट्रोल पंप और कंस्ट्रक्शन साइट पर काम सहित कई छोटे-मोटे काम किए। अब्बास ने बताया था, “शुरुआती सफलता के बाद मेरी कुछ फिल्में फ्लॉप हो गईं। हालत इतनी खराब हो गई कि मेरे पास किराया देने या सिगरेट खरीदने तक के पैसे नहीं थे। शुरुआत में मेरा अहंकार मुझे दूसरा काम करने से रोकता था, लेकिन बाद में मैंने निर्माता आरबी चौधरी से काम मांगा। उन्होंने मुझे ‘पूवेली’ (1998) में मौका दिया।”
उन्होंने आगे कहा, “मैंने फिल्में इसलिए छोड़ीं क्योंकि अब मुझे उनमें मजा नहीं आता था। मुझे अपना काम पसंद नहीं आ रहा था। मुझे याद है कि जब मेरे दोस्त मेरी बॉलीवुड डेब्यू फिल्म ‘अंश’ (2002) देखने जा रहे थे, तो मैंने उनसे कहा था कि अपना समय बर्बाद मत करो क्योंकि मुझे वह फिल्म बिल्कुल बेकार लगती थी।” परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए अब्बास ने न्यूजीलैंड में बाइक मैकेनिक का काम किया और टैक्सी भी चलाई।
न्यूजीलैंड में बिताए संघर्ष के दिन
यूट्यूब चैनल रेडनूल से बातचीत में उन्होंने बताया, “मैं कंस्ट्रक्शन साइट का टॉयलेट इस्तेमाल नहीं करता था। इसके बजाय पेट्रोल पंप पर जाता, कुछ खरीदता और वहां वॉशरूम इस्तेमाल करता। लोग अक्सर पूछते थे कि क्या उन्होंने मुझे कहीं देखा है। मैं कहता था, “हां, लोग अक्सर ऐसा कहते हैं। कभी-कभी मैं बता देता था कि मैं अब्बास हूं और लोग हैरान रह जाते थे। उनकी प्रतिक्रिया मैं अपने दिमाग में दर्ज कर लेता था।”
किशोरावस्था में आए थे आत्महत्या के विचार
गालाटा प्लस को दिए इंटरव्यू में अब्बास ने यह भी खुलासा किया था कि किशोरावस्था में वह आत्महत्या के विचारों से जूझ चुके थे। उन्होंने कहा, “जब मैं 10वीं में फेल हो गया था, तब मैं बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा था। उसी दौरान मेरी गर्लफ्रेंड भी मुझे छोड़कर चली गई, जिससे हालात और खराब हो गए। मैं अपनी जान लेने के बारे में सोचने लगा था।
एक दिन सड़क किनारे खड़ा था और सोच रहा था कि किसी तेज रफ्तार वाहन के सामने आ जाऊं। तभी मैंने एक बाइक सवार को देखा और अचानक महसूस किया कि अगर मैंने ऐसा किया, तो उस व्यक्ति की जिंदगी भी हमेशा के लिए बदल जाएगी। अपने सबसे बुरे दौर में भी मैं किसी दूसरे इंसान के बारे में सोच रहा था। उसी एहसास ने मुझे बदल दिया।”
