फिल्मों की दुनिया में दर्शक जिस चेहरे को पर्दे पर देखते हैं, वह हमेशा उसी अभिनेता की असली आवाज नहीं होती। कई बार चेहरा किसी और एक्टर का होता है और आवाज किसी और की होती है। लेकिन दोनों मिलकर किरदार को दमदार बना देते हैं। इसे ही फिल्मी भाषा में डबिंग कहा जाता है। वैसे तो ये काम पर्दे के पीछे का है, लेकिन फिल्म को सफल बनाने में इसकी भूमिका बेहद जरूरी होती है।

फिल्मों में डबिंग एक ऐसी कला है, जो पर्दे के पीछे रहकर भी फिल्म को हिट बनाने में बड़ा योगदान देती है। यह सिर्फ तकनीकी जरूरत नहीं, बल्कि मेकर्स का एक क्रिएटिव फैसला भी होता है।

फिल्मों में क्या है डबिंग का खेल?

डबिंग यानी किसी कलाकार की आवाज को बाद में स्टूडियो में रिकॉर्ड करके फिल्म के सीन के साथ जोड़ना। कई बार शूटिंग के दौरान लोकेशन पर शोर, तकनीकी समस्याएं या कलाकार की आवाज किरदार से मेल ना खाने पर डबिंग जरूरी हो जाती है। इसके अलावा, भाषा और उच्चारण सही से ना कर पाने के कारण भी डबिंग करनी जरूरी हो जाती है।

क्यों पड़ती है डबिंग की जरूरत?

भाषा की समस्या: जिस भाषा में फिल्म बनाई जा रही है, अगर कोई कलाकार उस भाषा में सहज नहीं होता तो भी डबिंग की जरूरत पड़ती है।

आवाज का प्रभाव: कई बार निर्देशक को किरदार के लिए एक खास तरह की आवाज चाहिए होती है, जो कलाकार की असली आवाज से मेल नहीं खाती, तब भी इस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है।

तकनीकी खामियां: शूटिंग के दौरान सही साउंड रिकॉर्ड न हो पाने की स्थिति में भी डबिंग की जरूरत पड़ जाती है।

बॉलीवुड में डबिंग के चर्चित उदाहरण

  1. कंगना रनौत

अपने करियर की शुरुआत में कंगना रनौत की हिंदी उतनी मजबूत नहीं थी। उनकी पहली फिल्म ‘गैंगस्टर’ में उनकी आवाज को डब किया गया था। हिमाचल प्रदेश से ताल्लुक रखने के कारण उन्हें हिंदी के उच्चारण में कठिनाई होती थी, जिसे बाद में उन्होंने कड़ी मेहनत से इसे सुधारा और आज उनकी दमदार आवाज उनकी पहचान बन चुकी है।

  1. नर्गिस फाखरी

फिल्म ‘रॉकस्टार’ से बॉलीवुड में कदम रखने वाली नर्गिस फाखरी की हिंदी कमजोर थी, जिसके चलते उनकी आवाज को फिल्म में डब किया गया। मशहूरडबिंग आर्टिस्ट मोना घोष शेट्टी ने डब किया था।

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  1. जैकलीन फर्नांडिस

श्रीलंका से आई जैकलीन फर्नांडिस की शुरुआती फिल्मों में उनकी आवाज को अक्सर डब किया गया। समय के साथ उन्होंने हिंदी में सुधार किया, लेकिन शुरुआत में उनकी आवाज किसी और ने दी।

  1. कैटरीना कैफ

कैटरीना कैफ बॉलीवुड की टॉप अभिनेत्रियों में से एक हैं, लेकिन करियर के शुरुआती दौर में उनकी हिंदी और डिक्शन को लेकर काफी काम करना पड़ा। उनकी कई शुरुआती फिल्मों में उनकी आवाज डब की गई थी।

  1. ऋतिक रोशन

फिल्म ‘काइट्स’ में ऋतिक रोशन के किरदार के कुछ हिस्सों में डबिंग का सहारा लिया गया था, ताकि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए डायलॉग अधिक प्रभावी बन सकें।

  1. दीपिका पादुकोण

दीपिका पादुकोण की पहली फिल्म ‘ओम शांति ओम’ को लेकर बताया जाता है कि फिल्म के अनुसार दीपिका का उच्चारण सही नहीं था। जिसके बाद उनकी आवाज को डब करना पड़ा था। उस समय उनकी भारी या अलग आवाज के कारण, निर्देशक फराह खान ने डबिंग आर्टिस्ट मोनिका खन्ना की आवाज का इस्तेमाल किया था।

  1. टाइगर श्रॉफ

टाइगर श्रॉफ की फिल्मों में उनकी आवाज को लेकर अक्सर चर्चा होती रही है। कुछ फिल्मों में उनकी आवाज को और प्रभावी बनाने के लिए डबिंग या वॉयस मॉड्यूलेशन का इस्तेमाल किया गया।

साउथ से बॉलीवुड तक डबिंग का ट्रेंड

डबिंग का चलन सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं है। साउथ इंडियन फिल्मों में यह और भी आम है। जब साउथ की फिल्में हिंदी में रिलीज होती हैं, तो कलाकारों की आवाज बदल दी जाती है। साउथ के डबिंग के कुछ उदाहरण

प्रभास

फिल्म बाहुबली में प्रभास के हिंदी वर्जन के लिए उनकी आवाज को डब किया गया था। हिंदी दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता में इस दमदार आवाज का भी बड़ा योगदान रहा।

अल्लू अर्जुन

अल्लू अर्जुन की हिंदी डब फिल्मों में उनकी आवाज किसी और की होती है, लेकिन वही आवाज उनकी पहचान बन गई है। दर्शक उस आवाज को ही असली मानने लगे हैं।

पर्दे के पीछे के असली हीरो होते हैं डबिंग आर्टिस्ट

डबिंग आर्टिस्ट वे कलाकार होते हैं, जो अपनी आवाज से किसी किरदार में जान डालते हैं, लेकिन जिस पहचान के वो हकदार हैं, उन्हें अक्सर वो नहीं मिल पाती। उदाहरण के तौर पर, कई डबिंग आर्टिस्ट ऐसे हैं जिनकी आवाज सुपरस्टार्स से भी ज्यादा पहचानी जाती है, लेकिन उनका चेहरा लोगों को नहीं पता होता।

ये हैं हिंदी सिनेमा के मशहूर डबिंग आर्टिस्ट

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे एक्टर्स भी हैं जो कई किरदारों को अपनी आवाज दे चुके हैं। इनमें राजेश खट्टर का नाम शामिल है। ये टोनी स्टार्क/रॉबर्ट डाउनी जूनियर जैसे कलाकारों के किरदारों को अपनी आवाज दे चुके हैं। इनके अलावा शरद केलकर जो ‘बाहुबली’ में अपनी आवाज दे चुके हैं।

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मयूर व्यास और संकेत महात्रे भी हॉलीवुड और साउथ की फिल्मों को हिंदी भाषी दर्शकों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। मयूर, रजनीकांत की फिल्मों में हिंदी डबिंग कर चुके हैं। वहीं संकेत महात्रे अल्लू अर्जुन, महेश बाबू और हॉलीवुड फिल्मों की आवाज बन चुके हैं। इनके अलावा मोना घोष भी बॉलीवुड के साथ-साथ हॉलीवुड की प्रमुख अभिनेत्रियों के लिए हिंदी डबिंग कर चुकी हैं।

क्या डबिंग से असर पड़ता है?

डबिंग सही तरीके से की जाए, तो यह फिल्म को और बेहतर बना देती है। लेकिन अगर आवाज और चेहरे का तालमेल न बैठे, तो दर्शकों को यह खटक सकता है। आजकल दर्शक पहले से ज्यादा जागरूक हैं और वे एक्टिंग के साथ-साथ आवाज पर भी ध्यान देते हैं। यही वजह है कि कई कलाकार अब अपनी आवाज और डिक्शन पर खास मेहनत करते हैं।

अब बदलने लगा है डबिंग का ट्रेंड

हालांकि अब कलाकार खुद की आवाज पर भी काम करने लगे हैं। पहले जहां डबिंग आम बात थी, वहीं अब कई कलाकार अपनी असली आवाज में डायलॉग बोलने की कोशिश करते हैं। रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल जैसे कलाकार अपनी नैचुरल आवाज के लिए जाने जाते हैं और डबिंग से बचने की कोशिश करते हैं।