एक्टर राजेश कुमार को किसी पहचान की जरूरत नहीं है। ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ सीरियल के शानदार किरदार कवि रोशेश सराभाई नाम से वह हमेशा लोगों को याद रहेंगे। वह हमेशा एक ऐसे एक्टर रहे हैं जो अपने अभिनय और शानदार किरदारों से जाने गए हैं।

उन्होंने कई शानदार प्रोजेक्ट्स में काम किया है लेकिन एक दिन उन्होंने ऐसा फैसला लिया, जिसनें उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल दी। उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ कैमरे के सामने नहीं, बल्कि उससे दूर आया। जब उनका अभिनय करियर अपने शिखर पर था, तब उन्होंने इंडस्ट्री से ब्रेक लेकर खेती करने का फैसला किया।

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इसके बाद के उनके कुछ साल आर्थिक नुकसान, संघर्ष और खुद की खोज से भरे रहे। उस दर्द और संघर्ष के बारे में एक्टर ने स्क्रीन के साथ बातचीत की। 2022 में जब उन्होंने अभिनय में वापसी की, तो वे पहले वाले राजेश कुमार नहीं थे, बल्कि जीवन के कठिन एक्सपीरियंस के बाद काफी बदल चुके थे। पिछले एक साल में उनकी इस नई एनर्जी की झलक लगातार देखने को मिली।

कमबैक के बाद शानदार फिल्मों मे काम

फिल्म ‘सैयारा’, अनुराग कश्यप की ‘निशानची’ और निखिल आडवाणी की ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ जैसे प्रोजेक्ट्स में उन्होंने एक के बाद एक दमदार अभिनय किया। अब 7 अगस्त को रिलीज होने जा रही अपनी अगली फिल्म ‘ओह माय डॉग’ से पहले राजेश कुमार ने स्क्रीन से बातचीत में अपने जीवन के सबसे मुश्किल दौर और उससे मिली सीख पर खुलकर बात की।

’42 की उम्र में एक्टिंग छोड़ शुरू की खेती’

राजेश कुमार कहते हैं, “मुझे लगता है कि जो कुछ हुआ, वह ईश्वर की योजना का हिस्सा था। जब लोग कहते थे कि मैं अपने करियर के शिखर पर हूं, उसी समय 42 साल की उम्र में मैंने अभिनय से ब्रेक लेकर खेती करने का फैसला किया।”

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“लेकिन खेती में मुझे भारी नुकसान हुआ और मैं लगभग सब कुछ खो बैठा। 2022 में दोबारा अभिनय की दुनिया में लौटा। उन पांच वर्षों ने मुझे पूरी तरह बदल दिया। मैं पहले से कहीं ज़्यादा वास्तविक और ज़मीन से जुड़ा इंसान बन गया। मैंने समझा कि इंसान कितना दर्द सह सकता है और जब आपके पास कुछ नहीं बचता, तब अपमान कैसा महसूस होता है।”

रिकवरी एजेंट फोन करके गाली देते थे

अपने सबसे कठिन दौर को याद करते हुए वे बताते हैं, “ऐसे दिन भी आए जब क्रेडिट कार्ड की रिकवरी करने वाला एजेंट मेरे अपार्टमेंट के नीचे चौकीदार के केबिन में फोन करके मुझे गालियां देता था, क्योंकि मेरे पास भुगतान करने के पैसे नहीं थे। मैंने अपनी कार बेच दी। आख़िरी गाड़ी मेरे पास एक इको कार थी, जिसे भी मुझे नासिक में अपने किसानों को देना पड़ा क्योंकि मैं उनका पैसा नहीं चुका पा रहा था। मैंने बहुत कुछ झेला है।”

कभी डिप्रेशन, एंग्जायटी को हावी नहीं होने दिया

हालांकि, इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी खुद को टूटने नहीं दिया। राजेश कहते हैं, “मैंने कभी डिप्रेशन, एंग्जायटी या किसी नकारात्मक भावना को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। पिछले चार-पांच वर्षों की सबसे बड़ी कमाई यही रही कि मैंने जीवन को नए तरीके से समझा। संघर्ष ने मुझे बहुत कुछ सिखाया और यही अनुभव मेरी सबसे बड़ी पूंजी बन गए।”