A prime minister, a reformer Says Madhur Bhandarkar - Jansatta
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एक प्रधानमंत्री, एक सुधारक

भारत ने कई लोकप्रिय प्रधानमंत्री देखे हैं पर मोदी उनमें विशिष्ट हैं। कुछ उन्हें जन नेता कहते हैं, तो कुछ कुशाग्र राजनीतिज्ञ और कुछ लोगों की राय में वे ऐसे नेता हैं जो विकास की राजनीति में विश्वास करते हैं। मेरी राय में वे 21वीं सदी के समाज सुधारक हैं-ऐसा नेता जो भारतीय समाज के रूपांतरण और कायापलट के लिए बना है। मोदी ने जब से पदभार संभाला है, 5.92 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनाए जा चुके हैं, जबकि 300 जिलों के तीन लाख गांव खुले में शौच की बुराई से मुक्त किए जा चुके हैं।

Author January 19, 2018 1:47 AM
मधुर भंडारकर

मधुर भंडारकर
पापा, लोग सड़कों को गंदा क्यों करते हैं? क्या उन्होंने हमारे प्रधानमंत्री को भारत को एक ‘स्वच्छ’ देश बनाने की बातें करते नहीं सुना? क्या आदतें बदल पाना इतना मुश्किल है?’ ये कुछ सवाल थे जो मेरी 11 साल की बेटी ने मुझसे एक दिन पूछे। एक मासूम मन के इन सवालों ने मुझे सोच में डाल दिया। साथ ही इससे मैंने यह भी महसूस किया कि आजकल के बच्चे अपने देश में समसामयिक घटनाओं और चर्चाओं के प्रति सामाजिक रूप से कितने जागरूक हैं। लेकिन जिस बात ने मुझ पर सबसे ज्यादा असर किया, वो यह कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कितनी आसानी से लोगों से जुड़ जाते हैं, यहां तक कि एक बच्चे से भी।

सिद्धि के ये तीक्ष्ण अवलोकन उन आमूल सामाजिक सुधारों का बस एक पहलू है जो आज हमारे देश में घटित हो रहा है। देश में राजनीतिक शोरगुल के गुबार के बीच यह देखना सचमुच सुखद है कि किस तरह से प्रधानमंत्री अपनी सकारात्मक ऊर्जा और करिश्माई व्यक्तित्व का इस्तेमाल हम भारतीयों और खासतौर से युवाओं के बीच वो सामाजिक बदलाव लाने में कर रहे हैं, जिसका उन्हें इंतजार था। भारत ने कई लोकप्रिय प्रधानमंत्री देखे हैं पर मोदी उनमें विशिष्ट हैं। कुछ उन्हें जन नेता कहते हैं, तो कुछ कुशाग्र राजनीतिज्ञ और कुछ लोगों की राय में वे ऐसे नेता हैं जो विकास की राजनीति में विश्वास करते हैं। मेरी राय में वे 21वीं सदी के समाज सुधारक हैं-ऐसा नेता जो भारतीय समाज के रूपांतरण और कायापलट के लिए बना है। मोदी ने जब से पदभार संभाला है, 5.92 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनाए जा चुके हैं, जबकि 300 जिलों के तीन लाख गांव खुले में शौच की बुराई से मुक्त किए जा चुके हैं। पिछले तीन साल में स्वच्छ भारत अभियान के तहत साफसफाई का दायरा 38 फीसद से बढ़कर अब 76 फीसद के प्रभावशाली स्तर तक जा पहुंचा है। देश को 70 साल लगे हैं जब किसी प्रधानमंत्री ने साफसफाई और स्वच्छता के मुद्दे से प्रभावी रूप से मुठभेड़ करने के लिए कदम उठाए हैं।

मुझे याद है कि किस तरह मोदी हाथ में झाड़ू लेकर स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत करने के लिए सड़क पर उतरे थे। भारतीय राजनीतिक विमर्श में यह अकल्पनीय था कि प्रधानमंत्री सड़क पर उतर कर झाड़ू लगाए। इसने राष्ट्र के मर्म को छू लिया। और नतीजे देखे जा सकते हैं। इस तरह के कई दृष्टांत हैं, जो यह दिखाते हैं कि किस तरह से हमारा समाज एक आमूल रूपांतरण के दौर से गुजर रहा है। कई पहलें हैं। योग को जन-जन तक पहुंचाने, वीआइपी संस्कृति खत्म करने के लिए लालबत्ती पर प्रतिबंध, दिव्यांगों के लिए विशेष योजनाएं व उनकी आवश्यकताओं के प्रति लोगों को संवेदनशील बनाना, आवेदनपत्रों/प्रमाणपत्रों को किसी राजपत्रित अधिकारी से सत्यापित कराने की औपचारिकता खत्म करना, लोगों को गोबर से खुद जैविक खाद बनाने के लिए प्रोत्साहित व प्रेरित करना- देखने में ये छोटी पहलकदमियां लगती हैं लेकिन इनका असर बहुत व्यापक है।

सरकार का मुखिया होने के नाते, एक प्रधानमंत्री को कड़े आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक फैसले करने की जरूरत है। लेकिन फिर भी यह देखना दुर्लभ है कि एक प्रधानमंत्री मन की बात के जरिए जनमानस से संवाद करता हो, और जहां बात देश को बदलने की होती है। या फिर लालकिले की मीनार से राष्ट्र को संबोधन हो जिसका उपयोग हमेशा देश व दुनिया को एक संदेश देने के लिए होता था, लेकिन कभी भी यह अवाम से जुड़ने और उन्हें सामाजिक कायाकल्प के लिए प्रेरित करने का माध्यम नहीं बना। खादी को पुनर्जीवित करने के प्रधानमंत्री के आह्वान से एक तरह की क्रांति हुई है। वह पार्टी जो हमेशा गांधीजी के दिखाए रास्ते पर चलने का दावा करती थी, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में खादी को मुख्य संबल बनाया था, ने गरीब किसानों और कारीगरों के उत्थान के लिए कुछ नहीं किया। यह मोदी थे जिन्होंने अलग तरीके से सोचा।

महिलाओं और लड़कियों के प्रति आम जनता की सोच में बदलाव लाने के अलावा हरियाणा जैसे राज्यों में ह्लबेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओह्व जैसे कार्यक्रमों की उपलब्धियां कल्पनातीत हैं। देश के 700 जिलों में 3.2 करोड़ गरीब महिलाओं को रसोई गैस सिलेंडर के कनेक्शन देने और लोगों को एलईडी बल्ब मुहैया कराने जैसे कदम सराहनीय हैं। ह्लजन औषधिह्व और अमृत फार्मेसी स्टोरों के जरिए लोगों को सस्ती दवाइयां मुहैया कराने और कोरोनरी स्टेंस और घुटने बदलवाने में कीमत की सीमा तय करने जैसे कदम स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में क्रांतिकारी हैं। एक मुद्दा जो मेरे दिल के करीब है, वह है तीन तलाक का। सदियों से मुसलिम महिलाएं तलाक की अमानवीय रीतियों की चक्की में पिस रही हैं। राजनीतिक पार्टियों के लिए वे सिर्फ वोट बैंक थीं। एक प्रगतिशील समाज में इस तरह के क्रूर रिवाजों के लिए कोई जगह नहीं है। प्रधानमंत्री का आभार, जो मुसलिम महिलाओं के अधिकारों व गरिमा के लिए दृढ़ता से खड़े हुए।

मैं कोई राजनेता नहीं हूं। मैं एक कलाकार, फिल्मकार, रचनात्मक व्यक्ति हूं जो सामाजिक रूप से प्रासंगिक फिल्में बनाता है। पर मैं समाज पर गहराई से नजर रखता हूं। मैं देख रहा हूं कि भारतीय समाज इस तरह से बदल रहा है, जिसके बारे में हम पहले सोचते थे कि यह संभव नहीं है। नेता के आह्वान पर लोग अब राजनीतिक कारणों से प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं, बल्कि उन सामाजिक बदलावों के लिए दे रहे हैं जो भारतीय मानस को हमेशा के लिए बदल कर रख देगा। मैं इसलिए यह लिख रहा हूं क्योंकि मैं देख रहा हूं कि एक मजबूत, फैसले लेने वाला नेता जो समाज के आखिरी आदमी के बारे में सोचता है, भारत का भविष्य गढ़ रहा है। मैं मोदी को एक राजनीतिक व्यक्ति के बनिस्बत समाज सुधारक के रूप में देखता हूं। मैं विश्वास के साथ सिद्धि व औरों से कह सकता हूं कि भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। तुम्हारा कल हमारे आज से बेहतर होगा।
(लेखक फिल्मकार हैं)

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