हिंदी सिनेमा के शहंशाह कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन के शुरुआती दिनों में उन्हें लेकर कई लोगों की राय बहुत अलग थी। आज जिन्हें एंग्री यंग मैन और बॉलीवुड का सबसे बड़ा सुपरस्टार माना जाता है, उन्हें कभी फिल्म इंडस्ट्री में उनके लुक और आवाज को लेकर गंभीर संदेहों का सामना करना पड़ा था।
एक ऐसा ही किस्सा फिल्मी गलियारों में अक्सर सुनाया जाता है, जिसमें कहा जाता है कि एक फिल्म निर्माता ने अमिताभ बच्चन को देखकर साफ शब्दों में कह दिया था- “तुम कभी हीरो नहीं बन सकते।” उस समय उनका लंबा कद, गंभीर आवाज और हीरो जैसे चेहरे की कमी को उनकी कमजोरी माना जाता था।
शुरुआती संघर्षों का दौर
अमिताभ बच्चन जब मुंबई आए थे, तो उनके पास न तो फिल्मी बैकग्राउंड था और न ही इंडस्ट्री में कोई मजबूत पहचान। शुरुआती दौर में उन्हें कई फिल्मों से रिजेक्शन मिला। कई निर्माता और कास्टिंग डायरेक्टर मानते थे कि वे उस समय के पारंपरिक हीरो जैसे फिट नहीं बैठते।
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इसी दौरान यह भी कहा जाता है कि एक ऑडिशन या मुलाकात के दौरान किसी निर्माता ने उन्हें यह तक कह दिया कि उनका भविष्य हीरो के रूप में नहीं है। यह बात अमिताभ के लिए निराशाजनक जरूर थी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
हार नहीं मानी, मेहनत जारी रखी
इन तमाम नकारात्मक टिप्पणियों के बावजूद अमिताभ बच्चन ने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार ऑडिशन दिए, छोटे रोल किए और खुद को साबित करने की कोशिश जारी रखी।
उनकी किस्मत तब बदली जब उन्हें फिल्मों में गंभीर और अलग तरह के किरदार मिलने लगे। खासकर 1970 के दशक में उनकी फिल्मों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।
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एंग्री यंग मैन बनकर छा गए
फिल्म ‘जंजीर’, ‘दीवार’ और ‘शोले’ जैसी फिल्मों ने अमिताभ बच्चन को हिंदी सिनेमा का सबसे बड़ा चेहरा बना दिया। जिस आवाज और व्यक्तित्व को कभी कमजोरी माना गया था, वही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। उनका एंग्री यंग मैन अवतार उस दौर के युवाओं की आवाज बन गया और वे रातों-रात सुपरस्टार बन गए।
आज का सफर और विरासत
आज अमिताभ बच्चन न केवल भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में से एक हैं, बल्कि चार दशकों से अधिक समय तक उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है।
