आज से करीब 47 साल पहले अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी पर फिल्माया गया ये सिर्फ 3 मिनट 45 सेकेंड का गाना नहीं, बल्कि उस दौर की सादगी, खूबसूरती और भावनाओं की एक ऐसी याद है, जो आज भी दिल छू जाती है। न महंगा मेकअप, न बनावटी बारिश, कलाकारों ने सचमुच बारिश में भीगते हुए इस गाने को कैमरे में कैद किया था।
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शायद यही वजह है कि इतने साल गुजर जाने के बाद भी इसकी मासूमियत और भावनाएं लोगों के दिलों में जिंदा हैं। वक्त बदल गया, तकनीक बदल गई, लेकिन इस गाने का एहसास आज भी वैसा ही है।
साल 1979 में आई फिल्म ‘मंजिल’ का गाना रिम झिम गिरे सावन गाना आज भी दर्शकों के दिल पर राज करता है। मानसून के मौसम में ये गाना और भी ज्यादा याद आने लगता है। ये गाना दो अलग संस्करण में बनाया गया है। मेल वर्जन को किशोर कुमार ने आवाज दी जबकि फीमेल वर्जन को अपनी आवाज देनी वाली लता मंगेशकर थीं।
गाने का संगीत आर. डी बर्मन में दिया और इसके शानदार बोल गीतकार योगेश ने लिखे। इस गाने से जुड़े कई शानदार किस्से हैं। इस गाने के लिए आउटडोर सीन फिल्माए जाने थे और उसके लिए कोई खास कोरियोग्राफी नहीं की गई थी। अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी से बस इतना कहा गया था कि वे बारिश में दौड़ें और मौसम का मजा लें। दोनों एक्टर्स ने इस गाने को खुद इंप्रोवाइज किया था। इसी वजह से गाने में उनके हाव-भाव बिल्कुल सहज और नेचुरल नजर आए।
इस गाने को मुंबई की असली बारिश में शूट किया गया था। फिल्म के निर्देशक बसु चटर्जी ने गाने को मरीन ड्राइव और ओवल मैदान जैसे रियल लोकेशन्स पर शूट किया। कमाल बात ये है कि मानसून की झमझमाती बारिश में अमिताभ और मौसमी चटर्जी का असल लोगों के बीच शूट करना कितना चुनौतीपूर्ण रहा होगा।
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उस दौर में कोई वाटरप्रूफ कॉस्मेटिक्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता था, जिस वजह से भारी बारिश में एक्ट्रेस का आईलाइनर बह गया था और उनकी फिरोजी रंग की साड़ी का अचानक रंग छूटने लगा था और उनके शरीर पर लग गया था।
रियल लोकेशन्स पर दर्शकों की भारी भीड़ से बचने के लिए एक्टर्स ने काफी तेजी से काम किया था, जिसमें एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने के लिए अमिताभ के भाई अजिताभ बच्चन ने उन्हें ट्रैवल में मदद की थी क्योंकि फिल्म की ऑन लोकेशन टीम काफी छोटी थी।
ये गाना आज भी काफी रिलेटेबल है, बारिश के मौसम में लोग इसे गुनगुनाते और इस पर नाचते दिखाई देते हैं। ये गाना बॉलीवुड के उन शानदार सदाबहार गानों में से एक है जो समय के साथ कभी पुराने नहीं होते बल्कि और ज्यादा गहरे हो जाते हैं।
